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Wednesday / October 5.
Homeन्यूजक्रीमी लेयर तय करने के लिए सिर्फ आर्थिक आधार पर्याप्त नहीं: SC

क्रीमी लेयर तय करने के लिए सिर्फ आर्थिक आधार पर्याप्त नहीं: SC

Supreme Court
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि केवल आर्थिक मानदंडों के आधार पर पिछड़े वर्गों की क्रीमी लेयर (Creamy Layer) का निर्धारण नहीं किया जा सकता है. केवल आर्थिक मापदंड के आधार पर पिछड़े वर्गों को सरकारी नौकरियों में प्रवेश और आरक्षण के लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता.

 

शीर्ष अदालत ने 17 अगस्त 2016 की अधिसूचना को लेकर कहा कि अधिसूचना ने इंदिरा साहनी के मामले में अदालत द्वारा जारी निर्देशों का घोर उल्लंघन किया है.बता दें कि इंदिरा साहनी का मामला मंडल निर्णय के रूप में जाना जाता है. 

हरियाणा सरकार ने जारी की थी अधिसूचना

दरअसल हरियाणा सरकार की अधिसूचना के अनुसार, पिछड़ा वर्ग के लोगों को जिनकी कुल वार्षिक आय 3 लाख रुपये तक है, उन्हें आरक्षित सेवाओं और शैक्षणिक संस्थानों में प्रथम सेवाओं में प्रवेश का लाभ मिलेगा. पिछड़े वर्ग के लोगों को इससे अधिक की राशि दी जाएगी. कोटा में शेष स्थान का लाभ और उन्हें राज्य सरकार के कानून के अनुसार क्रीमी लेयर (Creamy Layer)  माना जाएगा.

 

न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश को खारिज करते हुए कहा कि निर्देश के आधार पर शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और राज्य सेवाओं की नियुक्ति में कोई बाधा नहीं होगी. बेंच में जस्टिस अनिरुद्ध बोस भी थे. पीठ ने कहा कि घोषणा केवल आर्थिक मानदंडों के आधार पर जारी की गई थी और इसलिए यह आधार इस घोषणा को निरस्त करने के लिए पर्याप्त है. शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को इंदिरा साहनी मामले में आज से तीन महीने के भीतर नई अधिसूचना जारी करने की आजादी दी थी.

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आर्थिक मानदंड पर निर्धारण नहीं

फैसले का व्यापक संदर्भ देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पिछड़े वर्ग में “क्रीमी लेयर” का निर्धारण केवल आर्थिक मानदंडों के आधार पर नहीं किया जा सकता है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और अन्य संबंधित कारकों को भी ध्यान में रखना होगा. यह फैसला पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा हरियाणा और अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर लिया गया है.

नोटिस रद्द करने की की गई थी मांग

याचिकाओं में राज्य सरकार द्वारा 17 अगस्त, 2016 और 28 अगस्त, 2018 को जारी दो नोटिसों को रद्द करने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पिछड़े वर्गों की “क्रीमी लेयर” का निर्धारण केवल आर्थिक मानदंडों के आधार पर नहीं किया जा सकता है. केवल आर्थिक मापदंड के आधार पर पिछड़े वर्गों को सरकारी नौकरियों में प्रवेश और आरक्षण के लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता है.

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