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पाकिस्तान देश की नापाक साजिशें

IndiaPakistanWar1971
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पाकिस्तान द्वारा शुरुआत से ही युद्ध की चरम सीमा का उल्लंघन होता रहा है। अखंड भारत को 14 अगस्त 1947 के रोज अंग्रेजों द्वारा दो टुकड़ों में विभाजित कर दिया गया। मजहब के आधार पर अंग्रेजों ने कृत्रिम देश पाकिस्तान बनाया। जबकि भारत को मध्य रात्री 15 अगस्त 1947 के दिन स्वातंत्रता मिली। पाकिस्तान के इरादे शुरुआत से ही नापाक रहे। पाकिस्तान की नजर हमेशा से ही काश्मीर पर कब्जा करने की रही है। 1947-1948 में पाकिस्तान ने अचानक से काश्मीर पर आक्रमण कर दिया, इस वजह से भारत को युद्ध का आगाज करना पड़ा। भारत और पाकिस्तान के बीच एक दीवार बन गई। इस दीवार का महत्वपूर्ण कारण कश्मीर की स्वातंत्रता रही।

यहाँ तक कि भारत – पाकिस्तान के पहले युद्ध की वजह भी कश्मीर ही रहा। भारत पाकिस्तान का पहला युद्ध 1947-1948 में हुआ। दोनों देशों के बीच शुरुआत से ही काश्मीर समस्या का केंद्र रहा।  

आजाद काश्मीर आंदोलन 

वहीं काश्मीर की रियासत हिन्दू शासक के महाराजा हरिसिंह ने स्वतंत्र कश्मीर का सपना देखा था। तभी 1947 में कश्मीर के पश्चिम विस्तारों में विद्रोह द्वारा आजाद कश्मीर सरकार की घोषणा की गई। स्वतंत्र काश्मीर का लाभ उठाने के लिए पाकिस्तान ने कबाइलियों को भेजा। जो कि राजधानी श्रीनगर से 15 माईल दूर थे। ऐसी परिस्थितियों को देख महाराज हरीसिंह ने भारत से मदद मांगी। भारत सरकार ने जम्मू और काश्मीर के विलय के दस्तावेज कराने की सूचना दी। नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ काश्मीर के तत्कालीन नेता शेख अब्दुला ने महाराज हरिसिंह को दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दी। इस तरह आजाद काश्मीर आंदोलन शुरू हुआ। भारत सरकार द्वारा जम्मू-काश्मीर के विलय को स्वीकारा गया बाद में, भारत सरकार ने काश्मीर में सेना को भेजा। जम्मू-काश्मीर में कबालियों की घुसपैठ जैसे कई कारणों की वजह से भारत को पाकिस्तान पर आक्रमण करना पड़ा। जब भारतीय सेना आगे बढ़ रही थी उसी दौरान संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से राजद्वारी संसोधनों के लिए आदर्शवादी मार्ग अपनाया गया। भारत के तत्कालीन प्राधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा अनियमित रूप से बढ़ रही पाकिस्तानी सेना को वापस लौटने का आग्रह किया। पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव को मानने से इनकार किया क्यूंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा समिति का प्रस्ताव-39 एवं 47 भारत के पक्ष में नहीं था। इसलिए 1947 और 1948 में काश्मीर के लिए किया गया ये युद्ध अनिर्णायक रहा। काश्मीर की स्वातंत्रता का ये विवाद लगभग सात दसक से अटका हुआ है।

आखिर कैसे हुआ जमू-काश्मीर का विलय ? जानने के लिए देखिए ये विडिओ: 

ऑपरेशन चंगेजखान (Operation Chengiz Khan)

सर्वप्रथम पाकिस्तान द्वारा 1971 में भारत के खिलाफ युद्ध का आगाज किया, पाकिस्तान ने चंगेजखान ऑपरेशन नाम दिया। 3 दिसम्बर 1971 के दिन शाम को 5:30 बजे पाकिस्तानी वायुसेना को हमले  का आदेश मिलते ही युद्धी विमानों ने शाम को 5:45 बजे अमृतसर, शाम को 5:50 बजे पठानकोट, श्रीनगर, अवन्तीपुर पर हवाई विमानों द्वारा हमला किया गया। तुरंत 3 मीनट बाद 5:53 बजे फरीदकोट पर पाकिस्तानी युद्धविमानों टूट पड़े, भारतीय एयरफोर्स के पी-35 रडार नामके हवाई विमान को नस्ट करने में सफल रहे। उस दौरान तत्कालीन प्राधानमंत्री इंदिरा गांधी 3 दिसम्बर 1971 को कोलकाता की एक सभा को सम्बोधन दे रही थीं। बीच सभा में अधिकारियों द्वारा सूचना उन्हें सूचना दी गई, बताया गया कि पाकिस्तान ने हवाई हमला कर दिया है। यह सुनकर इंदिरा गांधी चिंतित हो गईं, उन्हें बीच सभा के सम्बोधन को छोड़कर दिल्ली के लिए रवाना होना पड़ा। परिस्थितियाँ इतनी गंभीर बन चुकी थी, दिल्ली में ब्लैकआउट होने के कारण प्लेन को लखनऊ डायवर्ट करना पड़ा, 3 दिसम्बर रात को 11 बजे दिल्ली पहुंची। केबिनेट के साथ वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और बेथक के बाद तत्कालीन प्राधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो पर देश के नाम संदेश देते हुए पाकिस्तान के सामने युद्ध की घोषणा की। साथ ही रात को 9 बजे भारतीय वायुसेना के युद्ध विमानों ने पाकिस्तान के सात एयर बेस को तबाह कर दिया। जिनमें शामिल थे मुरीद, मियावाली, सरगोथा, चांदेर, त्रिसलेवाला, रफीकी और मसरूर जैसे एयर बेस जिनको पूरी तरह को तबाह कर दिया। हमेंशा की तरह पाकिस्तान अपने नापाक इरादों में नाकामियाब रही। इस युद्ध में वायु सेना ने अपना अच्छा प्रदर्शन दिखाया। इस युद्ध के दूसरे दिन नौसेना ने भी अपना शौर्य दिखने में पीछे नहीं रही।  

मुद्दे की बात: बात हुई भारत-पाकिस्तान के प्रथम वॉर की, हमने जाना जम्मू-काश्मीर का विलय कैसे हुआ, पाकिस्तान द्वारा हमले की कोशिशें कैसे नाकाम हुई। आगे और भी दिलचस्प इतिहास के बारे में जानेंगें। बस तो फिर बने रहिए OTTIndia के साथ, हम आगे भी आपके साथ साझा करते रहेंगें ऐसी एतिहासिक घटनाएं।   

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