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भारतीय-अमेरिकियों ने काबुल में मारे गए सैनिकों को मोमबत्ती जलाकर दी श्रद्धांजलि

Canlde light Vigils
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काबुल ब्लास्ट में मारे गए जवानों के परिजनों की सिसकियां और एक-एक कर विमान से उतारे जाने वाले शवों को देखकर हर अमेरिकी की आंखें नम हो गईं. रविवार को जब अमेरिका में जवानों का शव पहुंचा तो हर कोई शोक में डूब गया. राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) ने उन्हें असली हीरो बताया तो वहीं भारतीय-अमेरिकी नागरिकों ने भी जगह-जगह कैंडल जलाकर (Candlelight Vigils) मारे गए जवानों को श्रद्धांजलि दी.

बोस्टन में भारतीय-अमेरिकी का प्रदर्शन 

इन शहरों में लोगों ने कैंडल जलाकर दी श्रद्धांजलि

वाशिंगटन डीसी, न्यूयॉर्क सिटी, न्यू जर्सी, सैन फ्रांसिस्कों, लॉस एंजेल्स, अटलांटा, ह्यूस्टन, बोस्टन, डलास, शिकाहो, ओहायो, कोलंबस और कनेक्टिकट शहरों में कैंडल जलाकर लोगों ने श्रद्धांजलि दी और हमले में जान गंवाने वाले सैन्य कर्मियों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्ति की.

कोलंबस में भारतीय-अमेरिकियों का कैंडल मार्च

आतंकवाद को हराने के लिए साथ आना जरूरी

ह्यूस्टन में आयोजित एक कार्यक्रम में बांगर रेड्डी ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए विदेश नीति का जिक्र किया तो वहीं डॉ. सुरिंदर कौल और अचलेश अमर ने कहा कि आतंकवादियों की इच्छा दुनिया के अच्छे लोगों जैसे भारत, अमेरिका, इजरायल समेत कई देशों के लोगों की इच्छा से बड़ी नहीं है. इसलिए हम आतंकवाद को हराने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे, एक दूसरे का समर्थन करेंगे. उन्होंने बताया कि कैसे उनके समुदाय के 5 लाख लोग 31 साल पहले कश्मीर में पाकिस्तान समर्थित जिहादी आतंकवाद के शिकार हुए थे.

वाशिंगटन डीसी में भारतीय-अमेरिकियों ने दी श्रद्धांजलि

हम शहीदों का सम्मान करते हैं

वहीं न्यूयॉर्क शहर के प्रसिद्ध टाइम्स स्कवॉयर में आयोजित एक कार्यक्रम में भारतीय अमेरिकी मुकेश मोदी और कृष्णी रेड्डी ने कहा कि हम एकता का संदेश देने के लिए साथ आए हैं. हम आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हैं, हमें एकजुट को होकर आतंकवाद को हराना चाहिए, हम शहीदों का सम्मान करते हैं.

दुनिया का एकजुट होना जरूरी

इसके अलावा वाशिंगटन डीसी में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रमुख भारतीय अमेरिकी अदापा प्रसाद, कंवलजीत सोनी और कृष्णा गुडीपति ने कहा कि पूरी दुनिया उन अमेरिकी सैनिकों पर हुए कायरतापूर्ण हमले की निंदा करती है. जो शांतिपूर्वक लोगों को निकालने में जुटे थे. दुनिया को इस खतरे से लड़ने के लिए एकजुट रहना चाहिए.

ह्यूस्टन में भारतीय-अमेरिकियों का प्रदर्शन

पीड़ित परिजनों के प्रति गहरी संवेदना

इसके अलावा लॉस एंजिल्स में आयोजित एक कार्यक्रम में अमित देसाई ने कहा कि भारतीय अमेरिकी समुदाय 13 बहादुर सैनिकों के मारे जाने पर शोक व्यक्त करता है. साथ ही सैन फ्रांसिस्को क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रमुख भारतीय अमेरिकी चंद्रभाभरा, गौरव पटवर्धन, जुड़ाजीत और जीवन जुत्शी ने कहा कि हम इस कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा करते हैं, पीड़ित परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं. वहीं बोस्टन में आयोजित एक कार्यक्रम में समन्वयक अभिजीत सिंह ने कहा कि आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए दुनिया को एक साथ आना होगा.

कोलंबस में शहीदों को दी श्रद्धांजलि

विशेष प्रार्थना सभा का किया गया आयोजन

बता दें कि कई यूनिवर्सिटी के भारतीय-अमेरिकी छात्रों ने भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुट और दृढ़ निश्चय के साथ लड़ने का संकल्प लिया. मारे गए अमेरिकी सैनिकों की आत्मा की शांति के लिए फ्रेमोंट हिंदू मंदिर और न्यू जर्सी के गायत्री चेतना केन्द्र में विशेष प्रार्थना सभा का भी आयोजन किया गया. जहां कई भारतीय-अमेरिकी सैनिकों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी. संयुक्त राज्य अमेरिका के करीब 25 जगहों पर मारे गए सैनिकों की याद में कैंडल लाइट निकाले गए. जिनमें स्थानीय परिषद के प्रतिनिधि, कांग्रेस के प्रतिनिधि, अफगानी नागरिक और कई दिग्गज शामिल रहे. वहीं ट्विटर पर #Indianamericanagainstterror ट्रेंड कर रहा था.

फ्रेमोंट हिंदू मंदिर में प्रार्थना सभा का आयोजन

आईएसआईएस-के ने ली थी हमले की जिम्मेदारी

बता दें कि आतंकवादी समूह आईएसआईएस-के ने काबुल में हुए हमले की जिम्मेदारी ली थी. उसके बाद अमेरिका ने ड्रोन हमले में आईएसआईएस-के के साजिशकर्ता आतंकी को मार गिराने का दावा किया.

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