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जानिए, काशी के संकट मोचन मंदिर का 400 साल पुराना रोचक इतिहास!

Sankat Mochan Hanuman Temple
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संकट ते हनुमान छुड़ावे , मन क्रम वचन ध्यान जो लावे।  

सब पर राम तपस्वी राजा , तिन के काज सकल तुम साजा।। 

अर्थात:- जो हनुमान जी को मन, कर्म और शब्दों से याद करता है पूरी निष्ठा और श्रद्धा से, उसके सारे कष्ट हनुमान जी दूर कर देते है । तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यों को आपने सहज में कर दिया।

संकट मोचन हनुमान मंदिर का 400 साल पुराना इतिहास:-

(Sankat Mochan Hanuman Mandir Varanasi) वाराणसी में स्थित देश के ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है, काशी के संकट मोचन हनुमानजी का मंदिर। पुराणों में बताया गया है कि, काशी के संकट मोचन के मंदिर का इतिहास  करीब 400 साल पुराना है। बताया जाता है कि, संवत 1631 और 1680 के बीच इस मंदिर को बनवाया गया था। मंदिर की स्थापना तुलसीदासजी ने कराई थी। मान्यता है कि जब वे काशी में रह कर रामचरितमानस लिख रहे थे, तब उनके प्रेरणा स्त्रोत संकट मोचन हनुमान थे। कहा जाता है कि यहां आने वाले भक्तों के सभी कष्‍ट हनुमान के दर्शन मात्र से ही दूर हो जाते हैं।

काशी के संकट मोचन मंदिर की रोचक विशेषताएं:- 

कहा जाता है कि, इसी मंदिर में हनुमानजी ने राम भक्त गोस्वामी तुलसीदासजी को दर्शन दिए थे, जिसके बाद बजरंगबली मिट्टी का स्वरूप धारण कर यहीं स्थापित हो गए थे।

hanuman-Chalisa-Pujavidhi.in

hanuman-Chalisa-Image Credit: Pujavidhi.in

  • लोकमान्यता है कि 600 साल पुराने इसी सघन जंगल में, तुलसीदास को तपस्या के दौरान हनुमान जी ने दर्शन दिए थे। 
  • तुलसीदास जी ने यहीं हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की और ये स्थान बाद में संकटमोचन मंदिर के नाम से विख्यात हुआ। 
  • गोस्वामी तुलसीदास ने स्वरचित “हनुमानाष्टक” में संकटमोचन का उल्लेख किया है। 
  • ख़ास बात ये भी है कि इस वन में कदम्ब की ऐसी प्रजाति का भी एक वृक्ष है जो यहां के अतिरिक्त सिर्फ मथुरा में मिलता है। 
  • इसी कदम्ब की एक डाल प्रतिवर्ष नागनथैया की लीला में प्रतिवर्ष भेजी जाती है।
  • इस मंदिर को वानर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस मंदिर के आस-पास बंदरों की संख्या बहुत है। 
  • ऐसा प्रतीत होता है कि श्री हनुमान जी अपनी वानर सेना के साथ इस मंदिर में रमे हुए हैं ये मंदिर वाराणसी शहर के दक्षिण में स्थित है। 
sankatmochahanumantemple

sankat mochahan human temple
Image Credit: Google Image

  • संकट मोचन नाम के अनुसार ही यह मंदिर अपने भक्तों के संकट को दूर करने वाला पवित्र मंदिर है।
  • शहर के कम लोग ही जानते होंगे कि संकट मोचन मंदिर परिसर में सैकड़ों वर्ष प्राचीन तालाब भी है।
  • सरकारी दस्तावेजों में उल्लेख है कि असि नदी, कंदवा , कंचनपुर, नवादा, बटुआपुर, संकटमोचन तालाब समेत 54 तालाबों से होकर गुज़रती थी।
  • परन्तु इनमे से आज संकटमोचन और कंचनपुर के ही तालाब अस्तित्व में हैं।
  • आज भी मंदिर प्रशासन (Hanuman Mandir) ने जंगल और तालाब को बचाकर रखा है।
  • पगडंडियों से होकर जंगल तक पहुंचने वाले रास्ते की जानकारी मंदिर से जुड़े पुराने लोगों को ही है। 

तुलसीदासजी को दिए हनुमानजी ने दर्शन से जुड़ी पौराणिक कहानी:- 

 धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसीदास स्नान-दान के बाद गंगा के उस पार जाते थे। वहां एक सूखा बबूल का पेड़ था। ऐसे में वे जब भी उस जगह जाते, एक लोटा पानी डाल देते थे। धीरे-धीरे वह पेड़ हरा होने लगा। एक दिन पानी डालते समय तुलसीदास को पेड़ पर भूत मिला। उसने कहा- ‘क्या आप राम से मिलना चाहते हैं? मैं आपको उनसे मिला सकता हूं।’ इस पर उन्होंने हैरानी से पूछा- ‘तुम मुझे राम से कैसे मिला सकते हो?’ उस भूत ने बताया कि इसके लिए आपको हनुमान से मिलना पड़ेगा। काशी के कर्णघंटा में राम का मंदिर है। वहां सबसे आखिरी में एक कुष्ठ रोगी बैठा होगा, वो हनुमान हैं। यह सुनकर तुलसीदास तुरंत उस मंदिर में गए।

यहाँ पढ़ें: आखिर क्यूँ, बेट द्वारका हनुमान को ‘मकरध्वज मंदिर’ के नाम से जाना जाता है?

गोस्वामी तुलसीदासजी

गोस्वामी तुलसीदासजी, Image Credit: Google Image

बताया जाता है कि जैसे ही तुलसीदास उस कुष्ठ रोगी से मिलने के लिए उसके पास गए, वो वहां से चला गया। तुलसीदास भी उनके पीछे-पीछे चलते रहे। आज जिस क्षेत्र को अस्सी कहा जाता है, उसे पहले आनद कानन वन कहते थे। यहां पहुंचने पर उन्होंने सोचा कि अब तो जंगल आ गया है, पता नहीं यह व्यक्ति कहां तक जाएगा। ऐसे में उन्होंने उसके पैर पकड़ लिए और कहा कि आप ही हनुमान हैं, कृपया मुझे दर्शन दीजिए। इसके बाद बजरंग बली ने उन्हें दर्शन दिया और उनके आग्रह करने पर मिट्टी का रूप धारण कर यहीं स्थापित हो गए, जो आज संकट मोचन मंदिर के नाम से जाना जाता है।

गोस्वामी तुलसीदासजी थे हनुमानजी के अभिन्न भक्त:- 

तुलसीदास के बारे में कहा जाता है कि वे हनुमान जी के अभिन्न भक्त थे। एक बार तुलसीदास के बांह में पीड़ा होने लगी, तो वे उनसे शिकायत करने लगे। उन्होंने कहा कि ‘आप सभी के संकट दूर करते हैं, मेरा कष्ट दूर नहीं करेंगे।’ इसके बाद नाराज होकर उन्होंने हनुमान बाहुक लिख डाली। बताया जाता है कि यह ग्रंथ लिखने के बाद ही उनकी पीड़ा खुद ही समाप्त हो गई।

इस मंदिर में सिन्दूरी रंग की स्थापित मूर्ति को देख कर ऐसा आभास होता है जैसे साक्षात हनुमान जी विराजमान हैं। माना जाता है कि ये हनुमान जी की जागृत मूर्ति है। 

देखें यह वीडियो: “गेला हनुमान “


भूत, प्रेत, पिसाच निसाचर। अगिन बेताल काल मारी मर॥

इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥

यहाँ पढ़ें: चमत्कारी गायत्री मंत्र का अर्थ और उसके फायदे क्या आप जानते है ?

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