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Homeभक्तिशची की तपस्या से प्रसन्न होकर पवित्र स्थान पर मां पार्वती ने दीप्त ज्वालेश्वरी के रूप में दिए दर्शन

शची की तपस्या से प्रसन्न होकर पवित्र स्थान पर मां पार्वती ने दीप्त ज्वालेश्वरी के रूप में दिए दर्शन

Jawala Temple Shaktipeeth
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श्रीं ज्वालपा देवी मंदिर (Jawala Devi): उत्तराखंड की नवालिका नदी के किनारे स्थित देवी का ये मंदिर यहां ज्वालपा देवी के नाम से मशहूर है, देवी का ये मंदिर पार्वती मां को समर्पित है जो कि दुर्गा का अवतार मानी गई है, मां ज्वालपा देवी मंदिर में उपलब्ध लेखों के मुताबिक ज्वालपा देवी सिद्धपीठ की मूर्ति की स्थापना आदि गुरू शंकराचार्य के हाथों की गई थी. देवी का ये मंदिर नवालिका नदी के बाएं किनारे करीब 350 मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है, फिलहाल मंदिर की देखभाल का काम ज्वालपा देवी मंदिर समिती के जरिए किया जाता है. देवी पर अपार आस्था रखनेवाले भक्त मंदिर में किसी तरह की कमी होने नहीं देते, मंदिर में विश्वास रखनेवालों की माने तो देवी के इस धाम से कोई खाली हाथ नहीं जाता. 

देखें यह वीडियो: नवरात्रि के शुभ अवसर पर करें ज्वालादेवी मंदिर  

मंदिर की पौराणिक कथा:-

वैसे तो देवी की अनेकों कथाए है लेकिन स्कन्दपुराण की कथा के मुतबाकि सतयुग में दैत्यराज पुलोम की पुत्री शची ने देवराज इंद्र को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए ज्वालपाधाम में हिमालय की अधिष्ठात्री देवी पार्वती की तपस्या की. शची की तपस्या से प्रसन्न होकर मां पार्वती ने दीप्त ज्वालेश्वरी (Jawala Devi)के रूप में दर्शन दिए और आशिर्वाद दिया की उसकी मनोकामना जरूर पूरी होगी. देवी पार्वती का दैदीप्यमान ज्वालपा रूप में प्रकट होने के प्रतीक के स्वरूप में यहां अखंड दीपक निरंतर प्रज्वलित रहता है, और अखंड ज्योती को जलाए रखने की ये परंपरा आज भी चली आ रही है. इस प्रथा को यथावत रखने के लिये प्राचीन काल से ही निकटवर्ती गांव से तेल एकत्रित किया जाता है. यहां देवी के मंदिर के लिए सत्रहवी शताब्दी में राजा प्रद्युम्नशाह ने 11.82 एकड़ सिंचित भूमि दान की थी. इसी भूमि पर वर्तमान समय में सरसों की खेती कर अखण्डज्योति को जलाये रखने लिये तेल प्राप्त किया जाता है, और देवी का अखंड दीपक आज भी प्रज्वलायमान है.

यहां पढ़ें: अजमेर में मणिबंद शक्तिपीठ, जानिए मां दुर्गा के इस शक्तिपीठ से जुड़ी पौराणिक कथा

कहा ये भी जाता है कि आदिगुरू शंकराचार्य ने यहां मां की पूजा की थी. मां ने उन्हे दर्शन दिए,  बताया जाता है, मंदिर के एक तरफ मोटर मार्ग और दूसरी ओर नयार नदी बहती है यही वजह है कि ये खूबसूरत नज़ारा देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है.

योग्स वर पाने के लिए होती है पूजा:-

इस सिद्धपीठ में चैत्र और शारदीय नवरात्रों में विशेष पाठ का आयोजन होता है. इस मौके पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. खासतौर पर अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर की कामना लेकर यहा आती है. यहां ज्वाल्पा देवी को थपलियाल और बिष्ट जाति के लोगों की कुलदेवी माना जाता है. कहा गया है कि मां ज्वालपा का मंदिर धरती के  सबसे जागृत मंदिरों में से एक है, यही वजह है कि देवी के दरबार में भक्तों की भीड़ लगी रहती है.

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