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Thursday / September 29.
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जानिए पांडवों ने कौन सी जगह की थी जीवदानी माता की स्थापना

Jivdani Devi
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माता जीवदानी, सबके जीवन का उद्धार करती हैं. जी हां, महाराष्ट्र में पालघर जिले के विरार स्थित माता जीवदानी के बारे में ऐसा ही कहा जाता है. माता का यह मंदिर सतपुड़ा के पहाडियों पर है. इन पहाड़ियों के बारे में कहा जाता है कि यहां जीवनदायी औषधियां मिलती थी. इन औषधियों से लोगों के प्राणों की रक्षा होती थी, और उन्हें नया जीवन मिलता था, इसलिए माता का नाम जीवदानी पड़ा.

 पांडवों ने करवाया था माता जीवदानी मंदिर का निर्माण

ऐसी मान्यता है कि वनवास के समय पांडवों ने यहां एकवीरा माता की मुर्ति की स्थापना गुफा मे की थी. वे उन्हें भगवती जीवदानी कहते थे. बताया जाता है कि माता की मुर्ति के अलावा पांडवों ने ऋषियों-मुनियों के लिए कई गुफाओं का भी निर्माण करवाया था. शायद इसी वजह से आज भी इस क्षेत्र को पांडव डोंगरी के नाम से जाना जाता है.

देखें ये वीडियो: जानिए पांडवों ने कौन सी जगह की थी जीवदानी माता की स्थापना

जीवदानी किले पर स्थित है माता की प्रतिमा

इतिहासकार बताते हैं कि 17 वीं सदी  में यहां पर जीवदानी किले का निर्माण किया गया था. इसी किले के एक हिस्से में माता की प्रतिमा की स्थापना की गई थी. ऐसी मान्यता है कि उस समय किले के अंदर पानी के कई कुंड थे, जो समय के साथ सुख गए हैं.

मुगलों और पुर्तगालियों ने किया था मंदिर पर हमला

जीवदानी माता को एकविरा देवी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि कभी इस जगह का नाम एक-वीरा था, जो  अब विरार के नाम से प्रसिद्ध है. ऐसा कहा जाता है कि मुगलों ने यहां पर हमला किया था और मंदिर को नुकसान भी पहुंचाया था. मुगलों के बाद पुर्तगालियों ने भी यहां पर शासन किया था, जिसकी वजह से मंदिर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गया था. उस समय बस कुछ आस-पास के लोग ही माता के दर्शन करने आते थे. उन सभी भक्तों की आस्था की लौ आज भी प्रज्जवलित हो रही है. मंदिर की महिमा को आदि शक्ति से भी जोड़ा जाता है. ऐसी भी मान्यता है कि यहां देवी शक्ति के अंग गिरे थे. इस मंदिर की गिनती महाराष्ट्र के 18 शक्तिपीठों में से एक मानी जाती है.

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रविवार को उमड़ती है भक्तों की भारी भीड़

पहाड़ी पर मंदिर होने की वजह से आपको करीब 13 सौ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. हांलाकि यहां पर अब रोव- वे की भी सुविधा है. साथ ही फ्युनिक्युलर ट्रॉली भी लगाया गया है. जिससे आप बड़ी आसानी से माता के दर्शन कर सकते हैं. इस ट्रॉली में एक साथ 70 लोग पहाड़ी पर जा सकते हैं.

नवरात्र और दशहरा के समय पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है. आम दिनों की बात करें तो, शुक्रावार और रविवार को माता जीवदानी के दर्शन करने बड़ी संख्या में लोग आते हैं. वैसे यहां मुर्गे की बलि देने की परंपरा है. साथ ही मन्नत पूरी होने पर भक्त मंदिर की सीढ़ियों पर दीप प्रज्वलित करते हैं. इतना ही नहीं, मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त नंगे पांव सीढ़ियों पर चढ़कर माता के दर्शन करते हैं. लोग देवी माता को मिठाई, कंगन, चुनरी, सिंदूर और नारियल चढ़ाते हैं.  

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