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Homeन्यूजJustice Bela Trivedi Career: सुप्रीम कोर्ट की नव नियुक्त जस्टिस के करियर की ऐसे हुई थी शुरुआत, जानें इनके बारे में सबकुछ….

Justice Bela Trivedi Career: सुप्रीम कोर्ट की नव नियुक्त जस्टिस के करियर की ऐसे हुई थी शुरुआत, जानें इनके बारे में सबकुछ….

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सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में 9 जजों ने गोपनीयता की शपथ ली. इस बार इन 9 जजों में 3 महिलाएं शामिल है और यही वजह है कि इन जजों की नियुक्ति इस बार चर्चा का विषय बनी हुई है. ऐसा पहली बार हुआ है जब सुप्रीम कोर्ट के लिए 3 महिला जजों की एकसाथ नियुक्ति हुई. इन्हीं तीन महिला जजों में से एक जस्टिस बेला त्रिवेदी हैं. बेला त्रिवेदी गुजरात के अहमदाबाद से हैं. ऐसे में एक नजर बेला त्रिवेदी के अबतक के सफर पर डालते हैं. लेकिन इससे पहले आपको बता दें कि इन जजों की नियुक्ति के नाम की लिस्ट सुप्रीम कॉलेजियम ने जारी की थी तो इसलिए आपको जानने की जरुरत है कि कॉलेजियम क्या होता है.

क्या होता है कॉलेजियम?

साल दर साल सुप्रीम कोर्ट या कोर्ट के जजों की नियुक्ति की जाती है. ऐसे में जिस व्यवस्था के तहत जजों की नियुक्ति की जाती है उसे कॉलेजियम सिस्टम कहा जाता है.

ऐसा शुरु हुआ बेला त्रिवेदी का सफर

जस्टिस बेला त्रिवेदी (Justice Bela Trivedi Career) का जन्म 10 जून, 1960 में हुआ था। B.com और LLB की पढ़ाई पूरी करने के बाद, 18 सितंबर, 1983 में वकील के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई। अहमदाबाद गुजरात हाई कोर्ट से उन्होंने सिविल, क्रिमिनल और संविधान से जुड़े मामलों का अध्ययन किया। सितंबर, 1983 में वकील के तौर पर नियुक्ति हुई। उन्होंने वकालत के करियर में सिविल, क्रिमिनल और संविधान से जुड़े मामलों में गुजरात हाई कोर्ट में हिस्सा लिया।

अहमदाबाद के सिटी सिविल और सेशन कोर्ट में 10 जुलाई 1995 को उन्हें जज के तौर पर नियुक्त किया गया। इसके साथ उन्होंने अलग अलग जगहों पर न्यायिक अधिकारी के तौर पर काम किया। इसके बाद 17 फरवरी 2011 में उन्हें गुजरात हाई कोर्ट के एडिशनल जज के लिए नियुक्त किया गया।

26 जून 2011 में उनका ट्रांसफर राजस्थान में हुआ और 26 जनवरी 2013 में उनको परमानेंट जज नियुक्त किया गया। इस तरह से उनका वकालत से लेकर जस्टिस का सफर शुरू हुआ। जस्टिस बेला गुजरात उच्च न्यायालय की न्यायाधीश थीं। जस्टिस बेलाबेन त्रिवेदी की बात करें तो फरवरी 2011 से गुजरात हाईकोर्ट में वह न्यायमूर्ति के तौर पर कार्यरत थीं।

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याचिका में ये कहा गया था कि डेड बॉडी मैनेजमेंट के नाम पर पर COVID-19 दिशानिर्देशों ने पारंपरिक पारसी अंतिम संस्कार का उल्लंघन किया है। जस्टिस त्रिवेदी की अगुवाई वाली बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि “राज्य की सुरक्षा और कल्याण सर्वोच्च कानून है. सभी जीवित प्राणियों के कल्याण पर जस्टिस त्रिवेदी का काम उल्लेखनीय है। गौरतलब है की द्वारा सुप्रीम कोर्ट के जज के लिए तीन महिला जजों के नाम पर मोहर मारी थी। जिसमें उन्होंने तेलंगाना हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस हिमा कोहली, कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस बीवी नागरत्ना और गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस बेलाबेन त्रिवेदी का समावेश हुआ है।

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