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पंजाब में जन्मे कांशीराम ने यूपी में तैयार की राजनीतिक जमीन, पढ़ें कद्दावर नेता की कहानी

Kanshiram
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Kanshi Ram death anniversary: कांशीराम एक ऐसे समाज सेवक और राजनीतिक नेता थे जिन्होंने अनुसूचित जाति के लोगों के हक के लिए काफी संघर्ष किया था। दलित समुदाय के लोगों को जीने की राह दिखाई और गरीबों की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया था। बसपा के संस्थापक माने जाते है कांशीराम (Kanshi Ram). आज उनकी पुण्यतिथि पर लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थल में बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांशीराम को श्रद्धांजलि दी और एक रैली का आयोजन किया गया। 

रैली को संबोधित करते हुए सुप्रीमो मायावती कहा कि 2022 में अगर बसपा की सरकार बनीं तो बदले की भावना से केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को रोका नहीं जाएगा बल्कि उन्हें समय से पूरा करवाया जाएगा। 

कांशीराम का जीवन परिचय:- 

पंजाब के सिख परिवार में 15 मार्च 1934 में कांशीराम का जन्म हुआ था। वे बचपन से ही सरल स्वभाव के व्यक्ति थे, उन्होंने पुणे में रक्षा विभाग में नौकरी की। इसके बाद वे महाराष्ट्र में रहते दलितों के मसीहा बने। कांशीराम युवावस्था से ही समाज सेवा में सक्रिय कार्यकर्ता माने जाते थे।  वर्ष 1978 में उन्होंने ‘बामसेफ’ (All India Backward and Minority Communities Employees’ Federation) की स्थपना की। इस संगठन की धनराशि के द्वारा उन्होंने दलितों के संघर्षों के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए उनकी सहायता की। इसके पश्चात वर्ष 1981 में उन्होंने ‘दलित शोषित संघर्ष समाज समिति’ की स्थापना की। 

वर्ष 1948 में बहुजन समाज पार्टी की स्थापना की और कद्दावरों मसीहा बने: 

(Kanshi Ram) कांशीराम  ने वर्ष 1948 में दलितों के संगठन का निर्माण किया बसपा यानी की (बहुजन समाज पार्टी) का निर्माण किया। वे डॉ भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों पर चलते थे उनके मूल सूत्र ‘सत्ता ही सभी चाबियों की चाबी है’। इस प्रकार उन्होंने चुनाव लड़ना प्रारंभ किया वे मानते थे कि चुनाव लड़ने से पार्टी को मजबूती मिलती है, परिस्थितियों को सुधारा जा सकता है। उन्होंने वर्ष 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के विरुद्ध चुनाव लड़ा था। उस दौरान उन्हें कमजोर करने के लिए उन पर कई आरोप लगाए गए लेकिन वे डटे रहे। 

यहां पढ़ें: Lal Bahadur Shastri Jayanti 2021: जानिए ‘श्रीवास्तव’ से ‘शास्त्री’ बने लाल बहादुर के जीवन से जुड़े किस्से

कांशीराम को संगठनों के द्वारा जो भी राशि प्राप्त होती उन सभी राशियों को वे परिवार पर और निजी कार्यों में कभी खर्च नहीं करते। उस राशियों से वे जरूरतमंदों की सहायता करते थे। वर्ष 1993 में इटावा से चुनाव जीतकर लोकसभा के सांसद बने।

Kanshi Ram and Mayavati

Kanshi Ram and Mayawati, Image Google.com 

मायावती को मुख्यमंत्री बानाने में कांशीराम का महत्वपूर्ण योगदान रहा:- 

मायावती को राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से राज्य में पहली बार बसपा सरकार बनी और वर्ष 1995 में मायावती मुख्यमंत्री बनी। मायावती महान समाज सेवक को अपने पिता के समान मानती थी। राजनीति करियर में किसी भी प्रकार के निर्णयों को लेने से पहले कांशीराम की सलाह लेती थी। उनका मार्गदर्शन लेकर नए कार्य की शुरुआत करती थी। कांशीराम जी द्वारा दिखाए गए पदचिन्हों पर मायावती चली है और दलितों की सहायता की। कांशीजी द्वारा शुरू किए गए कार्यों को आगे बढ़ा रही है।   

कांशीराम (Kanshi Ram) द्वारा गठित की गई बसपा पार्टी उनके दिखाए गए मार्गदर्शन पर चल रही है। उन्होंने कभी भी ऊंचे पद पाने की महत्वाकांक्षा नहीं रखी। वे राजनीतिक दलों और केन्द्र सरकार के समर्थन में काम करते रहे। कांशीराम का निधन 9 अक्टूबर 2006 में 72 साल की उम्र में हुआ था। बसपा की स्थापना व दलितों को देश की राजनीति में विशेष स्थान दिलाने के लिए कांशी राम को हमेशा याद किया जाएगा।

देखें यह वीडियो: जानिए साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की कहानी

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