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राधारानी ने कृष्ण भगवान को पाने के लिए की थी इस शक्तिपीठ की पूजा

Maa Katyayani
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हिंदु धर्मग्रंथों की माने तो इस पृथ्वी पर 51 शक्तिपीठ मौजूद है। माता सती के वियोग में जिस समय भगवान शिव तांडव कर रहे थे, उस समय संसार को प्रलय से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के कई टुकड़े कर दिए। धरती पर कई जगहों पर माता सती के शरीर के अंग गिरे , जिन्हे आज शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।

ऐसा ही एक शक्तिपीठ है माता कात्यायनी शक्तिपीठ। ये पीठ उत्तर प्रदेश के मथुरा नगर में स्थित है। कहते है भगवान श्री कृष्ण की क्रिडा भूमि श्रीधाम वृंदावन में भगवती देवी के केश गिरे थे। यह स्थान 51 शक्तिपीठों में  से 11वीं पीठ है। इनकी रक्षा के लिए जो भैरव यहां विराजमान हैं, उन्हें भूतेश के साथ भूतेश्वर के नाम से जाता है। यहां माता का दूसरा नाम पाताल देवी भी है। दरअसल माता के दर्शन पाना भी अद्भुत है। इसके लिए भक्तों को सीढ़ी चढ़नी नहीं बल्कि उतरनी पड़ती है जी हां सही सुन रहे है आप। यहीं खास वजह माता को पाताल देवी नाम भी दिया है। माता के दर्शन के लिए भक्तों को भूतेश्वर मंदिर परिसर से 25 फुट नीचे सीढ़ीयों से उतरना पड़ता है, जिसके बाद मां उमा कात्यायनी शक्तिपीठ या कहें तो पाताल देवी के दर्शन होते है।

देखें ये वीडियो: राधारानी ने कृष्ण भगवान को पाने के लिए की थी इस शक्तिपीठ की पूजा

आर्यशास्त्र, ब्रम्हवैवर्त पुराण एवं आद्या स्तोत्र आदि कई जगहों में माता कात्यायनी देवी के इस शक्तिपीठ का उल्लेख मिलता है। यहीं नहीं देवर्षि श्री वेदव्यास जी ने श्रीमद भागवत के दशम स्कंध के बाईसवें अध्याय में भी मां का जिक्र किया है।

कहते हैं कि भगवान श्री कृष्ण को पाने की लालसा में ब्रजांगनाओं ने अपने हृदय की लालसा पूर्ण करने हेतु यमुना नदी के किनारे से घिरे हुए राधाबाग़ नामक स्थान पर श्री कात्यायनी देवी का पूजन किया। माता ने उन्हे वरदान दिया, लेकिन भगवान एक और गोपियां अनेक, ऐसा संभव नहीं था। इसलिए भगवान कृष्ण ने वरदान को साक्षात करने के लिए महारास किया। तभी से कुंवारे लड़के और लड़कियां मनचाहा वर और वधु प्राप्त करने के लिए यहां आकर माता की पूजा करते है। इतना ही नहीं बताया जाता है कि राधारानी ने भी श्रीकृष्ण को पाने के लिए इस शक्तिपीठ की पूजा की थी।

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स्थानीय निवासियों की माने तो भगवान कृष्ण का वध करने से पहले यमुना किनारे माता कात्यायनी को कुलदेवी मानकर बालू से मां की प्रतिमा बनाई थी। उस प्रतिमा की पूजा करने के बाद भगवान कृष्ण ने कंस का वध किया था। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से माता का पूजन करता है उसकी मनोकामना पूरी भी होती है। नवरात्र के मौके पर देश-विदेश से लाखों भक्त माता के दर्शन करने के लिए यहां आते है। खास तौर पर नवरात्र के मौके पर यहां मेले का भी आयोजन होता है।

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