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Homeनेचर एंड वाइल्ड लाइफजानिये, कंचनजंघा की कोख में बसे विशाल काजीरंगा नेशनल पार्क का इतिहास!

जानिये, कंचनजंघा की कोख में बसे विशाल काजीरंगा नेशनल पार्क का इतिहास!

Kaziranga National Park
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Kaziranga National Park: कंचनजंघा की कोख में बसा विशाल काजीरंगा नेशनल पार्क का इतिहास अत्यधिक पुराना है। वर्ष 1904 में भारत के वायसराय लॉर्ड क्रूजॉन (Lord Cruzon-The Viceroy of India) के संरक्षण में पार्क की देख रेख करनी शुरू की गई। इसके पश्चात 1 जून 1905 में पार्क के 223 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को काजीरंगा प्रस्तावित रिजर्व फॉरेस्ट नाम दिया गया।

एशियाई हाँथी (Asian Elephant), एक सिंग वाले गेंडे (Greater one-Horned Rhinoceros), Asiatic Water Buffalo, सांभर (Sambar), हॉग हिरन (Hog Deer), बाघ (Tiger), मन्टजक (Muntjac), एशियाई काले भालू, शियार, फिशिंग केट, लोमड़ी, नारंगी पेट वाली हिमालयी गिलहरी (Orange-bellied Himalayan squirrel) जैसे वन्य प्राणियों की मौजूदगी से बना है काजीरंगा नेशनल पार्क।

इस पार्क को वर्ष 1908 में रिजर्व फॉरेस्ट घोषित किया गया:- 

बात उस समय की है जब लॉर्ड क्रूजॉन की पत्नी लेडी क्रूजॉन काजीरंगा के दौरे पर आई थीं। असम के प्रसिद्ध बलराम हज़ारिका- आसामी जानवरों के संरकक्षक ने जानवरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। एक सिंह वाले गेंडों की संख्या कम हो रही थी उनकी सुरक्षा पर विचारणा की गई। और इस पार्क को वर्ष 1908 में रिजर्व फॉरेस्ट घोषित किया गया।

काजीरंगा का यह नेशनल पार्क असम की जीवनदायिनी ब्रह्मपुत्र नदी के बीच स्थित:-  

क्यूंकि काजीरंगा का यह नेशनल पार्क असम की जीवनदायिनी ब्रह्मपुत्र नदी के बीच स्थित है इसलिए, आस-पास के लोगों का आर्थिक जीवन नदी पर आधारित था। स्थानीय लोग मत्स्य पालन, जंगलों की लकड़ियों को काटकर, जानवरों को मारकर उनकी खालों को और सिंघों को बेचकर अपना जीवनयापन करते थे।

kaziranga park

kaziranga park, Image Credit: Google Image 

काजीरंगा पार्क का संरक्षण और स्थानीय लोगों की आजीविका दोनों ही चिंता का विषय बन चुके थे। लेकिन वर्ष 1950 में असम सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया, और Rhinoceros Bill पास किया इस बिल के अंतर्गत यदि कोई भी Rhinoceros Bill यानि कि गेंडों का शिकार करेगा तो उसे बड़ी रकम का भुगतान करना पड़ेगा।

यहाँ पढ़ें: इस झील की शीतलता, सुंदरता और प्राकृतिक नजारे हैं, सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र!

11 फरवरी 1974 को काजीरंगा नेशनल पार्क (Kaziranga National Park) को भारत सरकार द्वारा आधिकारिक मान्यता:-

 वर्ष 1950 में असम सरकार द्वारा पास किए गए अधिनियम के अंतर्गत इस पार्क को काजीरंगा वन्यजीव आभ्यारण घोषित किया गया। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए गए, वर्ष 1968 में असम के प्रसिद्ध पार्क को राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने के पश्चात, आखिरकार वह दिन या ही गया जब 11 फरवरी 1974 को काजीरंगा नेशनल पार्क को भारत सरकार द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई। तब से यह अभ्यारण काजीरंगा नेशनल पार्क के नाम से जाना जाने लगा।

आज के दिनों में भारत के असम राज्य में स्थित यह राष्ट्रीय पार्क करीब 430 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।

एक सिंग वाले गेंडे काजीरंगा नेशनल पार्क के आकर्षण का केंद्र हैं। पूरे विश्व में सबसे ज्यादा मात्रा में इन गेंडो की झलक सिर्फ यहीं देखने को मिलती है। इसके अलावा यहाँ तरह तरह की वनस्पतियाँ, प्राकृतिक नजारे, सफारी की सवारी, हाँथी की सफारी, स्तनधारी जीवों का समूह, पहाड़ों की श्रंखलाओं से बहती नदियों की धारा पर्यटकों को यहाँ एक बार नहीं बल्कि बार बार आने पर मजबूर करती हैं।

देखें यह वीडियो:- The Beast of Kaziranga


Kaziranga National Park में कुल मिलाकर 35 स्तनधारी प्रजातियाँ:-

  • काजीरंगा नेशनल पार्क में कुल मिलाकर 35 स्तनधारी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। जिनमें से 15 प्रजातियाँ खतरे में हैं।
  • 118 से भी ज्यादा मात्रा में जंगली बिल्लियाँ को भी निवास स्थान है।
  • इस पार्क में एशियाई हाँथी और बंगाल की शान शाही बंगाल बाघ भी सबसे ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं।
  • काजीरंगा के विशाल पार्क के प्रति 5 वर्ग किलोमीटर एरिया में एक बाघ नजर आता है। वर्ष 2006 में भारत सरकार ने बाघ अभ्यारण घोषित किया।
  • और वर्ष 2008 में, काजीरंगा नेशनल पार्क ने लाओखोवा (Laokhowa) और बुराचपोरी (Burachapori)  वन्यजीव अभयारण्यों को मंडली में शामिल कर बाघ रिजर्व के रूप में शामिल किया गया।
काजीरंगा नेशनल पार्क

काजीरंगा नेशनल पार्क, वर्ष 2008 में बाघ रिजर्व के रूप में शामिल

जीव-जन्तु, जंगलों के आकर्षक दृश्य, और सेइबेरियन प्रवासी पक्षी सैलानियों को आने से मजबूर करते हैं:- 

जीव-जन्तु , जंगलों के आकर्षक दृश्य, और सेइबेरियन प्रवासी पक्षी यहाँ की शोभा को और भी बढ़ाते हैं। यहाँ पर मौजूद पक्षियों की बात करें तो इनमे सफेद- हंस, फेरुगिन डक, बेयर पोचर्ड बतख, काली गर्दन वाले सारस, एशियाई ओपनबिल कॉर्क, बेलीथ के किंगफिशर, सफेद बेल वाले बगुले, डालमेशियन पेलिकन, स्पॉट-बिल्व्ड जैसे पक्षी शामिल हैं। इनके अलावा काजीरंगा नेशनल पार्क में गिद्धों की तीन प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं। जिनमें इंडियन वल्चर, सिलेंडर बिल्ड वल्चर, इंडियन व्हाइट वल्चर देखने को मिलते हैं। राष्ट्रीय उद्यान ब्रह्मपुत्र नदी से घिरा हुआ विस्तार है, यहाँ पर बारिश अत्यधिक मात्रा में होती है। यहाँ पर उगने वाली वनस्पतियाँ वन्यजीवों का पेट भरती हैं।

काजीरंगा नेशनल पार्क

काजीरंगा नेशनल पार्क

1986 में किए गए वनस्पतियों के सर्वेक्षण के अकंडों के मुताबिक, 

वर्ष 1986 में किए गए वनस्पतियों के सर्वेक्षण के अकंडों के मुताबिक, 41% ऊंची घाँस, 29% खुले जंगल, 11% छोटी घास, 8% नदियाँ और अन्य जल स्त्रोत, तहत 6% रेतीले स्थानों के अलावा 4% स्वामपलैंड पाए जाते हैं।

अन्तराष्ट्रीय तौर पर 1985 में काजीरंगा नेशनल पार्क को यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया। आज, काजीरंगा एक विश्व धरोहर स्थल है और संभवत: दक्षिणी एशिया के सबसे समृद्ध, सबसे सुरम्य वन्यजीव आवासों में से एक है।

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