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माता सती का देहत्याग, भगवान शिव का तांडव और कामदेव का भस्म होना, कुछ ऐसी है अनंग त्रयोदशी की कहानी

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अक्सर आप सुनते होंगे कि शंकर भगवान अपनी तीसरी आंख(Third Eye) से पूरी दुनिया को भस्म कर सकते हैं, हो सकता है आपने ये भी सुना हो कि शंकर भगवान ने त्रिनेत्र से कामदेव को भस्म कर दिया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर देवाधिदेव महादेव को ऐसा क्यों करना पड़ा था, इसके पीछे की पौराणिक कथा क्या है. साथ ही ये भी जानेंगे कि इसका अनंग त्रयोदशी(Anang Trayodashi 2021) से क्या संबंध है. 

कामदेव के भष्म होने की कहानी

कामदेव(Kamdeva) के भस्म होने की कहानी शुरू होती है माता सती(Sati Mata) के देह त्यागने से. एक बार की बात है ब्रह्मा के पुत्र राजा प्रजापति दक्ष ने विशाल यज्ञ का आयोजन करवाया, जिसमें उन्होंने सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया लेकिन अपनी पुत्री सती और भगवान शिव को निमंत्रण नहीं भेजा. जिसके बाद भगवान शिव ने माता सती का बगैर निमंत्रण जाना अनुचित करार दिया, पर सती नहीं मानीं और अपने पिता प्रजापति दक्ष के यहां पहुंच गईं.

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Image Courtesy: Google.com

माता सती ने स्वयं को किया भस्म

वहां पहुंचते ही उन्होंने देखा कि यज्ञस्थल में भगवान शिव(Lord Shiva) का निरादर किया जा रहा है, भगवान शिव के अपमान से आहत हो माता सती ने यज्ञस्थल की योगाग्नि में ही स्वयं को भस्म कर दिया. माता सती की मृत्यु का समाचार जैसे ही भगवान शिव को मिला उन्होंने अपने दूत वीरभद्र को भेजकर यज्ञ विध्वंस करवा दिया, वीरभद्र ने प्रजापति दक्ष का सिर काट दिया, जिसके बाद दक्ष को बकरे का सिर लगाया गया.

भगवान शिव के तांडव से मचा हाहाकार

वहीं भगवान शिव जैसे ही यज्ञस्थल पर पहुंचे उन्होंने अपनी पत्नी का पार्थिव शरीर यज्ञ कुंड से निकाला और कंधे पर रखकर पत्नी वियोग में तांडव करने लगे. जिससे ब्राह्मांड का संतुलन बिगड़ गया, चारों तरफ हाहाकार मच गया. ऐसी स्थिति को देख भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के पार्थिव शरीर के 51 टुकड़े किए और ये अंग जहां-जहां गिरे वह बाद में शक्तिपीठ कहलाए. इसके बाद भी भगवान शिव का तांडव शांत(Shiv Tandav) नहीं हुआ तब देवताओं के समझाने पर भोले तपस्या में लीन हो गए.

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तपस्या भंग करने पहुंचे कामदेव

देवाधिदेव महादेव ऐसी तपस्या में लीन थे जिसे कोई तोड़ नहीं सकता था. इसी बीच तारकासुर(Tarkasur) नाम के राक्षस ने भगवान भोले को प्रसन्न कर ये वरदान प्राप्त कर लिया कि शिव पुत्र के सिवाय उसे कोई नहीं मार सकता. ऐसे में तारकासुर का आतंक जब बढ़ गया तो देवों ने महादेव से विनती की लेकिन उनकी तपस्या को कोई भंग नहीं कर सकता था. ऐसे में सभी देवता कामदेव के पास गए.

महादेव ने त्रिनेत्र से कामदेव को किया भष्म  

कामदेव(Kamdeva) ने अपनी पत्नी रति के साथ मिलकर कई कोशिशें की कि भगवान भोले की तपस्या भंग हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ. आखिरकार कामदेव ने आम के पेड़ की आड़ में छिपकर पुष्प बाण चलाए जो भगवान भोले के हृदय में जा लगा और उनकी तपस्या भंग हो गई. ऐसा होते ही महादेव ने कामदेव को अपने त्रिनेत्र से भस्म कर दिया. कहते हैं कि आज भी उत्तर प्रदेश के बरेली में कामेश्वर धाम(Kameshwar Dham) है, जहां वह आम का पेड़ मौजूद है.

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यह है अनंग त्रयोदशी का महत्व

ये देख कामदेव की पत्नी रति विलाप करने लगी और देवताओं ने तपस्या भंग करने का कारण बताया तो महादेव बोले कि यह द्वापर युग में प्रद्युम्न के नाम से जन्म लेगा और फिलहाल ये अनंग के रूप में होगा, जिसका कोई अंग नहीं होगा.

ये भी पढ़ें: जानें कब है भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत, क्या है पूजा विधि और कथा

उस दिन त्रयोदशी(Trayodashi) तिथि थी इसलिए इसे अनंग त्रयोदशी(Anang Trayodashi 2021) के नाम से भी जाना जाता है, जो हर साल मार्गशीर्ष (अगहन) महीने की शुक्लपक्ष की त्रयोदशी(Trayodashi ) तिथि को मनाय जाता है. इस दिन शिव-पार्वती के साथ-साथ कामदेव और रति की भी पूजा की जाती है.   

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