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Homeभक्तिन कोई पुरोहित, न कोई यजमान और ना ही कर्मकांड की चिंता, कुछ इस तरह भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं श्रद्धालु

न कोई पुरोहित, न कोई यजमान और ना ही कर्मकांड की चिंता, कुछ इस तरह भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं श्रद्धालु

Chhath Puja
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बिहार, झारखंड और पूर्वांचल से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक छठ पूजा (Chhath Puja) की धूम है. बिहार की राजधानी पटना में गंगा घाट पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ है तो वहीं औरंगाबाद जिले के देव में स्थित तालाब पर भी पांच लाख से ज्यादा श्रद्धालु भगवान सूर्य की आराधना के लिए पहुंचे हैं.

लाखों की संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु

बता दें कि देव को बाबा भास्कर की नगरी भी कहते हैं, जहां स्थित भगवान सूर्य का मंदिर करीब साढ़े नौ लाख साल पुराना है. छठ पूजा के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं. वहीं दिल्ली में इस बार जहरीले झाग के बीच श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर रहे हैं.

Chhath Puja

Image Courtesy: Google.com

 

न कोई पुरोहित, न कोई यजमान

बता दें कि छठ महापर्व (Chhath Puja) एक ऐसा त्यौहार है, जिसमें न कोई पुरोहित होता है और ना ही कोई यजमान होता है. बल्कि व्रती (व्रत करने वाले पुरुष या महिलाएं) बस मन में भगवान की आराधना करता है और तालाब में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करता है.

Chhath Puja Yamuna

Image Courtesy: Google.com

तालाब या नदी में देते हैं अर्घ्य

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्य को अर्घ्य देने का खास महत्व है. इसलिए इस दिन महिलाएं या पुरुष पारंपरिक परिधान (साड़ी/धोती) पहनकर तालाब या नदी के किनारे पहुंचते हैं जिसे घाट कहते हैं. वहां तालाब या नदी में स्नान करने के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य देते है. मान्यता है इस दिन अर्घ्य देने से संतान की प्राप्ति होती है और सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

Chhath Puja

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ऐसे देते हैं अर्घ्य

इस त्यौहार की खास बात ये है कि इसमें पुरोहित की जरूरत नहीं होती मतलब किसी अन्य विशेष पूजा की तरह इसमें अगर पंडित जी नहीं भी है तो आप अर्घ्य दे सकते हैं. तालाब या नदी में स्नान करने के बाद दूध या जल किसी भी भगवान सूर्य को अर्घ्य दे सकते हैं. अर्घ्य देते हुए जल में खड़े होकर श्रद्धालु परिक्रमा भी करते हैं. लोग मंत्रोच्चारण के साथ भी भगवान सूर्य और छठी मइया को अर्घ्य समर्पित करते हैं. अर्घ्य देने का मंत्र कुछ इस प्रकार है.

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मॉरिशस समेत कई मुल्कों में मनाया जाता है त्यौहार

मॉरीशस समेत दुनिया के कई मुल्कों में जहां भी बिहार और पूर्वांचल के लोग हैं, वहां तक हर साल छठ पूजा (Chhath Puja) की धूम दिखाई देती है. इस व्रत की महता ये है कि यह प्राकृतिक से जुड़ाव को दिखाती है, हर तरह के भेदभाव को खत्म करती है. प्राचीन काल में जहां जात-पात की वजह से निम्न जाति के लोगों को पूजा-पाठ का अधिकार नहीं था तो वहीं इस व्रत में ऐसा कुछ भी नहीं है. हर जाति के लोग एक ही घाट पर अर्घ्य देते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं.

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Image Courtesy: Google.comये भी पढ़ें: 8 नवंबर से नहाए-खाए के साथ होगी छठ महापर्व की शुरुआत, पढ़ें हर दिन की पूजा की विधि

छठ पर्व में ठेकुआ का है खास महत्व

बड़ी बात ये है कि इस व्रत में बनने वाला ठेकुआ काफी प्रसिद्ध है, जिसे बनाने के लिए चक्की का आटा इस्तेमाल में नहीं लिया जाता बल्कि पहले गेहूं को धोकर सुखाया जाता है, पूरे दिन गेहूं की कोई न कोई रखवाली करता है ताकि कोई पक्षी भी उसे खा न सके, मान्यता है कि उससे वह जूठा माना जाएगा और फिर भगवान सूर्य को कैसे अर्पित किया जा सकता है. उसके बाद जांते पर गेहूं को पीसकर शुद्ध घी में ठेकुआ बनाया जाता है. ठेकुआ के साथ-साथ गन्ना, केला, शकरकंद, सूथनी, हल्दी, मूली, अदरक, सिंदूर, दीपक और शहद समेत कई फल सूप में रखे जाते हैं.

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