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Homeभक्तिजब भगवान श्रीराम और भक्त हनुमान के बीच ही छिड़ गया युद्ध, जानें क्या थी वजह और क्या रहा परिणाम

जब भगवान श्रीराम और भक्त हनुमान के बीच ही छिड़ गया युद्ध, जानें क्या थी वजह और क्या रहा परिणाम

ram hanuman yudh
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भगवान हनुमान(Hanuman) के हृदय में श्रीराम बसते हैं, ये बातें तो आप भी जानते होंगे, भगवान हनुमान प्रभु श्रीराम(Shri Ram) के अनन्य भक्त हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया था जब भक्त हनुमान को भी अपने प्रभु श्रीराम से युद्ध करना पड़ा था. हनुमान जी की अनन्य भक्ति के बारे में सुनकर हो सकता है आपको इस बात पर आसानी से विश्वास न हो, लेकिन ये पौराणिक कथा है ही कुछ ऐसी.

गुरु विश्वामित्र का ययाति ने किया अपमान

एक बार की बात है राजा ययाति(King Yayati) ने भगवान श्रीराम के गुरु विश्वामित्र का अपमान कर दिया, जिससे क्रोधित गुरु विश्वामित्र अयोध्या पहुंचे और प्रभु श्रीराम से गुस्से में कहा कि एक राजा ने मेरा अपमान किया है. जिस पर प्रभु श्रीराम(Shri Ram) ने वचन दिया कि मैं खुद उस पापी को दंड दूंगा आप उसका नाम बताइए. गुरु विश्वामित्र(Guru Vishwamitra) ने बताया कि राजा ययाति ने ऐसा दुस्साहस किया है. ऐसा सुनकर भगवान श्रीराम ने युद्ध की तैयारी करने की आज्ञा दे दी.

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Image Courtesy: Canva.com

राजा ययाति के वध करने का श्रीराम ने लिया प्रण

उधर राजा ययाति इस बात को सुनकर बेहद दुखी हुए कि कल प्रभु श्रीराम उसका वध कर देंगे. राजा ययाति को कोई भी रास्ता नहीं दिख रहा था, इसी दौरान नारद मुनि ने उन्हें सलाह दी कि अब सिर्फ हनुमान जी ही आपको इस संकट से मुक्ति दिला सकते हैं. ऐसी सलाह सुनकर राजा ययाति हनुमान जी की माता अंजनि(Anjani) से अपनी प्राण रक्षा का वचन लिया. जैसे ही हनुमान जी अपनी माता के पास पहुंचे मां ने कहा कि एक राजा कुटिया में शरणार्थी बनकर पहुंचा है, उसकी प्राण रक्षा का वचन दो.

हनुमान जी ने दिया प्राण रक्षा का वचन

माता के कहने पर हनुमान जी(Hanuman Ji) राजा ययाति के प्राण रक्षा का वचन तो दिया लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि प्रभु श्रीराम से ययाति की प्राण रक्षा करना है तो हनुमान जी चिंतित हो गए. हालांकि उन्होंने अपनी माता को वचन दिया था, इसलिए अब पीछे नहीं हट सकते थे. दूसरे दिन हनुमान जी राजा ययाति को लेकर एक जंगल में जा छिपे लेकिन प्रभु श्रीराम(Shree Ram) से क्या छिपा रहा है, उन्होंने सैनिकों का आदेश दिया और पता चला कि हनुमान जी ययाति को शरण दी है.

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Image Courtesy: Google.com

गुरु विश्वामित्र ने ययाति को किया माफ

रामभक्त हनुमान(Ram-Hanuman Yudh) अपने इष्टदेव पर अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग नहीं कर सकते थे, इसलिए जब तक प्रभु श्रीराम बाणों की वर्षा करते रहे हनुमान जी राम-राम जपते रहे. जिसका प्रभाव(Ram-Hanuman Yudh) यह हुआ कि कोई भी बाण उन्हें नहीं लगा.

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आखिरकार हनुमान जी(Hanuman Ji) की भक्ति देखकर गुरु विश्वामित्र ने भगवान श्रीराम( Lord Ram) को युद्ध रोकने का आदेश दिया और ययाति को माफ कर दिया. इस तरह प्रभु श्रीराम और भगवान हनुमान दोनों ने अपने वचन का पालन किया.  

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