Ott India News Logo
Recent Posts
Connect with:
Saturday / June 25.
Homeन्यूज241 साल बाद बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी को PM मोदी ने संवारा, जानें काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की खासियत

241 साल बाद बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी को PM मोदी ने संवारा, जानें काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की खासियत

kashi vishwanath corridor
Share Now

भगवान भोले के त्रिशूल पर बसा काशी(Kashi) धाम अब कुछ इस तरह सज-धजकर तैयार हो रहा है, मानो इसका पूरी तरह से कायाकल्प हो गया हो. गलियों के शहर बनारस में अगर आपने साल 2019 से पहले कदम रखा होगा तो वाकई एक दूसरे से जुड़ी कितनी संकरी गलियां दिखी होंगी जिनके सहारे आप बाबा विश्वनाथ(Baba Vishwanath) के दर्शन के लिए पहुंचे होंगे. हालांकि अब ये बातें पुरानी हो जाएंगी, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर(Kashi Vishwanath Corridor) के उद्घाटन के बाद अब बनारस की बंद गलियां चौड़ी सड़कों के रूप में तब्दील हो जाएंगी.

लंबे अरसे बाद पूरा हुआ पीएम मोदी का सपना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट(PM Modi Dream Project) लंबे अरसे बाद पूरा हुआ है. 8 मार्च 2019 को पीएम मोदी ने वाराणसी में काशी धाम(Kashi Dham) के सौंदर्यीकरण की परियोजना का शिलान्यास करते हुए कहा था कि जब मैं राजनीति में नहीं था तभी से ये सोचता रहा हूं कि कैसे काशी की सुंदरता बढ़ाई जाए. वर्षों से बाबा विश्वनाथ बंधे हुए थे, ठीक से सांस भी नहीं ले पा रहे थे लेकिन अब उन्हें मुक्ति मिलेगी. करीब ढाई साल बाद अब ये कॉरिडोर जब लगभग बनकर तैयार हो गया है तो पीएम मोदी 13 दिसंबर को इसका उद्घाटन करेंगे.

कॉरिडोर निर्माण से पहले ऐसी थी काशी की सूरत

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के साथ ही पीएम मोदी का काशी को क्योटो(Kashi To Kyoto) बनाने का सपना भी पूरा होता दिख रहा है. अगर आप सोच रहे हैं कि इस कॉरिडोर के निर्माण से क्या बदल जाएगा, तो दो साल पहले की काशी की तस्वीर देखिए और सोचिए. कैसे गंगा घाट से बाबा विश्वनाथ के मंदिर तक पहुंचने के लिए संकरी गलियों से होते हुए जाना पड़ता था. जब भी कोई गंगा घाट से स्नान कर निकलता था तो फूल और प्रसाद बेचने वालों के संकरी गलियों से होते हुए बाबा विश्वनाथ मंदिर(Baba Vishwanath Temple) के मेन गेट तक पहुंचता था, उसके बाद भी टेढ़ी-मेढ़ी गलियों में करीब एक किलोमीटर लंबी लाइन होती थी, जिसके बाद आप अंदर मंदिर में प्रवेश करते थे.

kashi vishwanath

Image Courtesy: Google.com

संकरी गलियों की जगह बनी 50 फीट चौड़ी सड़क

अब इस कॉरिडोर(Kashi Vishwanath Corridor) के निर्माण से संकरी गलियां बीते दिनों की बात हो जाएंगी. अब आप जैसे ही गंगा घाट से स्नान कर निकलेंगे, 50 फीट चौड़ी साफ-सुथरी सड़कों के रास्ते मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचेंगे. वहां जाने के बाद टेढ़ी-मेढ़ी और संकरी गलियों की बजाय आपको ऐसी ही चौड़ी सड़क मिलेगी, जहां भीड़ की वजह से लाइन तो लंबी हो सकती है लेकिन खड़े होने की पर्याप्त सुविधा होगी. अब आप पहले की तुलना में काफी आराम से बाबा भोले(Baba Bhole) के दर्शन कर सकेंगे.

kashi vishwanath corridor

Image Courtesy: Google.com

स्थापत्य कला का भव्य उदाहरण 

पूजा-पाठ के अलावा काशी विश्वनाथ धाम(Kashi Vishwanath Dham) सौंदर्यीकरण परियोजना के तहत मंदिर में प्रवेश के लिए 7 भव्य गेट, परिक्रमा पथ, वैदिक और आध्यात्मिक लाइब्रेरी(Spritual Library), पिक्चर गैलरी, पर्यटन केन्द्र, बहुद्देशीय हॉल, सुरक्षा हॉल, फूड कोर्ड, स्ट्रीट लाइट्स, दिव्यागों-वृद्धों के लिए रैंप-एक्सेलेटर की सुविधा और सड़कों पर साफ-सफाई की अच्छी व्यवस्था होगी. इसकी खास ये बात ये है कि निर्माण में वही पत्थर लगाए जा रहे हैं जो एक हजार साल पहले मंदिरों के निर्माण में लगाए जाते थे, बकायदा उन पर नक्काशी भी की गई है. काशी विश्वनाथ सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट(Kashi Vishwanath Dham Beautification Project)  स्थापत्य कला का एक भव्य उदाहरण पेश करेगा. काशी विश्वनाथ धाम में रानी अहिल्याबाई, कार्तिकेय और आदि शंकराचार्य की मूर्तियां भी स्थापित की गईं हैं.

kashi vishwanath corridor

Image Courtesy: Google.com

काशी कॉरिडोर की खास बातें

  • 241 साल बाद पीएम मोदी ने किया काशी का कायाकल्प 
  • करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ प्रोजेक्ट
  • 5.5 लाख स्कवॉयर फीट जमीन का किया है अधिग्रहण
  • गर्भगृह से मंदिर के शिखर तक का स्वरूप होगा भव्य
  • मंदिर परिसर से गंगा के किनारे तक ग्रीन बेल्ट का निर्माण
  • रुद्राक्ष, पारिजात और बेल के पौधे बढ़ाएंगे मंदिर परिसर की शोभा
  • मंदिर चौक, बनारस गैलरी और टूरिस्टों के लिए खास इंतजाम
  • म्यूजियम, स्प्रिचुअल लाइब्रेरी, हॉल और फूड कोर्ट भी हैं प्रोजेक्ट का हिस्सा
  • स्काई बिम लाइट चांदनी रात में बढ़ाएगी काशी की सुंदरता
  • मणिकर्णिका घाट और ललिता घाट से मंदिर तक सीधा रास्ता
  • उद्घाटन के बाद 7 लाख घरों में बांटे जाएंगे लड्डू
  • देशभर के हजारों साधू-संत बनेंगे उद्घाटन समारोह के साक्षी
  • गंगा घाट पर जलाए जाएंगे 5 लाख दीये
  • देव दीपावली जैसा मनाया जाएगा उत्सव

 

करीब ढाई साल में ऐसे पूरा हुआ पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी(PM Modi) का ये ड्रीम प्रोजेक्ट रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ है. इस कॉरिडोर को बनाना कोई आसान काम नहीं था. कॉरिडोर की ज़द में आने वाले सैकड़ों घरों और दुकानों के मालिकों को समझाना, उनकी जमीन का अधिग्रहण करना, उचित मुआवजा देना और फिर ज़द में आने वाले मंदिरों को संरक्षित करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था. पीएम मोदी ने इसके लिए को-ऑर्डिनेशन, को-ऑपरेशन और रिहैबिलिटेशन का फॉर्मूला दिया था. मतलब जिनकी मकानें या जमीनें ली जाएं उनके पुनर्वास की व्यवस्था हो, उन्हें उचित मुआवजा मिले.

kashi vishwanath corridor

Image Courtesy: Google.com

समय-समय पर जायजा लेते रहे पीएम मोदी

उत्तर प्रदेश सरकार(Yogi Government) ने इसकी निगरानी के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की. जिसमें काशी विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विशाल सिंह और दो अन्य सदस्य शामिल रहे. इस समिति ने मिट्टी की जांच से लेकर टेंडर जारी करने और काशी धाम के सौंदर्यीकरण का काम तेजी से पूरा किया. खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिलान्यास के अगले साल 30 नवंबर 2020 को देव दीपावली(Dev Diwali) कार्यक्रम में हिस्सा लिया जहां उन्होंने इस प्रोजेक्ट का भी जायजा लिया और अब 13 दिसंबर को इसे जनता के लिए समर्पित करेंगे. दो दिवसीय वाराणसी दौरे पर के पहले दिन पीएम मोदी सबसे पहले कालभैरव के दर्शन करेंगे, उसके बाद जलमार्ग से होते हुए बाबा विश्वनाथ मंदिर(Baba Vishwanath Mandir) का जलाभिषेक करने के बाद काशी कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे.

ये भी पढ़ें: महादेव की नगरी काशी में है ये पवित्र दुर्गा मंदिर

मुस्लिमों ने भी दान की जमीन

5.5 लाख स्कवॉयर फीट में बने इस कॉरिडोर(Kashi Vishwanath Corridor) के निर्माण में करीब 800 करोड़ रुपये की लागत आई है. जिसके तहत मंदिर के आसपास के करीब 300 दुकानों और घरों को खरीदा गया है. जिस काशी के ज्ञानवापी मस्जिद(Gyanvapi Mosque) को लेकर बराबर चर्चाएं होती हैं वहां के मुस्लिमों ने इस कॉरिडोर के लिए जमीन दान कर एक मिसाल पेश की है. ज्ञानवापी मस्जिद ने 1,700 वर्ग फीट जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए दान दी है. ये वह जमीन है जहां मंदिर और मस्जिद की सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी कंट्रोल रूम स्थापित था.

kashi vishwanath corridor

Image Courtesy: Google.com

168 साल पहले महाराजा रणजीत सिंह ने लगवाए थे स्वर्ण कलश

इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में कई कानूनी चुनौतियां भी पेश आईं. इस प्रोजेक्ट के विरोध में मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा, लेकिन आखिरकार तमाम अड़चनों के बावजूद पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट पूरा हुआ. उनके सपने के साथ-साथ करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र काशी 241 साल बाद एक बार फिर सज-संवर कर तैयार है. इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने साल 1780 में यहां का जीर्णोद्धार करवाया था और उसके बाद 1853 में महाराज रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर समेत कई जगहों पर स्वर्ण लगवाए थे.

देव दीपावली जैसा मनेगा उत्सव 

अब 241 साल बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने काशी(Kashi) का कायाकल्प कर दिया है. इसी अवसर पर 13 से 15 दिसंबर तक काशी में देव दीपावली जैसा उत्सव मनाया जाएगा. गंगा घाट पर 5 लाख दीये जलाएं जाएंगे, इसके अलावा देश और प्रदेश में लोग घर-घर दीये जलाएंगे. पीएम मोदी जैसे ही इस कॉरिडोर(Kashi Vishwanath Corridor) का उद्घाटन करेंगे, उसके बाद 7 लाख घरों में 16 लाख लड्डू बांटे जाएंगे. घर-घर प्रसाद पहुंचाने की जिम्मेदारी बकायदा खाद्य विभाग को सौंपी गई है.

ये भी पढ़ें: यहां कोतवाल की कुर्सी पर विराजते हैं बाबा काल भैरव, जानें क्यों इन्हें कहा जाता है काशी का कोतवाल

बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और देशभर के हजारों साधु-संत इस कॉरिडोर के लोकार्पण के साक्षी बनेंगे. काशी कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह का लाइव प्रसारण 51 हजार से ज्यादा जगहों पर किया जाएगा, ताकि देश के हर मंदिर में लोग इसका उद्घाटन समारोह देख सकें.

No comments

leave a comment