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Homeन्यूजछठे चरण का चुनाव सीएम योगी के लिए अग्निपरीक्षा की तरह क्यों हैं, समझिए सियासी गणित

छठे चरण का चुनाव सीएम योगी के लिए अग्निपरीक्षा की तरह क्यों हैं, समझिए सियासी गणित

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उत्तर प्रदेश में पांच चरणों के चुनाव(UP Election 2022) संपन्न हो चुके हैं, अगले एक हफ्ते में पूरी तरह से चुनावी शोर थम जाएगा और परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे. 10 मार्च को इस बात का फैसला हो जाएगा कि उत्तर प्रदेश की सत्ता पर योगी आदित्यनाथ(Yogi Adityanath) दोबारा काबिज होंगे या फिर सत्ता बदल जाएगी. यूं तो पूरा यूपी चुनाव (UP Election 2022) ही योगी के लिए अग्निपरीक्षा है लेकिन छठे चरण का चुनाव(Sixth Phase of Voting) कुछ खास मायने रखता है.

आज यानि 3 मार्च को उत्तर प्रदेश की 57 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग जारी है. 10 जिले की 57 विधानसभा सीटें जो पूर्वांचल(Purvanchal) में आती हैं, उनमें से कई पर योगी आदित्यनाथ की शानदार पकड़ मानी जाती है. अगर आप बलिया और अंबेडकरनगर को छोड़ दें तो बाकी के गोरखपुर, बस्ती, संतकबीर नगर, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, बलरामपुर और सिद्धार्थनगर जिले में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की अच्छी पकड़ है.

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पिछली बार रहे थे ये परिणाम

अब चूंकि चुनाव गोरखपुर(Gorakhpur) में है, जो योगी आदित्यनाथ का गृह जिला है तो इसलिए अपने प्रदेश के साथ-साथ गृहजिले में शानदार प्रदर्शन योगी आदित्यनाथ के लिए बेहद जरूरी है. इस बार भीम आर्मी आंदोलन से अपनी पहचान बनाने वाले चंद्रशेखर आजाद गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ को चुनौती दे रहे हैं, जिसका असर कितना होगा ये देखने वाली बात होगी. गोरखपुर जिले की कुल 9 में से 8 विधानसभा सीटों पर 2017 के चुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की थी. लेकिन इस बार यहां की दो सीटों पर बगावत के सुर भी दिखाई दे रहे हैं.

ओबीसी-दलित वोट बैंक पर नजर

पूर्वांचल में ओबीसी(OBC) और दलित वोटबैंक(Dalit Vote bank) की संख्या काफी है, ऐसे में पिछली बार इन वोटर्स के सहारे सत्ता में पहुंचने वाली बीजेपी इस बार भी इन्हें साधना चाहती है, जबकि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव(Akhilesh Yadav) जो इस बार रोजगार समेत कई ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं जो लोगों से जुड़े हों, वह इस सहारे प्रदेश की बड़ी आबादी को अपने साथ लाना चाहते हैं. पूर्वांचल में प्रियंका गांधी(Priyanka Gandhi) ने भी नजरे जमाने की कोशिश की, हालांकि उसका कोई खास असर नहीं दिखता, ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है.

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Image Courtesy: Google.com

ये भी पढ़ें: 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में 300 से ज्यादा सीटें जीतेंगे: अमित शाह

इस बार क्या बदल गया

पिछली बार बीजेपी के साथ राजभर समुदाय के नेता ओमप्रकाश राजभर(OP Rajbhar) थे तो वहीं इस बार उन्होंने अपना पाला बदल लिया है और वह सपा के साथ हो गए हैं. पिछले चुनाव में राजभर की पार्टी सुभासपा ने भी एक सीट पर जीत हासिल की थी. पूर्वांचल में जाति के आधार पर चुनावी जीत हासिल करने का इतिहास पुराना है. रोजगार समेत कई मुद्दों को लेकर जहां योगी आदित्यनाथ सरकार पर इस बार कई सवाल खड़े हुए हैं तो वहीं साल 2018 में हुए उपचुनाव में गोरखपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था. इसलिए छठे चरण का चुनाव योगी के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है.

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