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ये है मौत का 7वां बड़ा कारण, हर 12वां भारतीय निशाने पर!

Diabetes: A silent killer
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मधुमेह यानी डायबिटीज एक ऐसी बीमारी, जिससे हर साल दुनिया में लाखों लोगों की मौत होती हैं. ये बीमारी आदमी को अंदर से धीरे-धीरे खोखला कर देता है. छोटे बच्चे से लेकर बड़े- बूढ़े तक इससे ग्रसित है. भारत में डायबिटीज की बीमारी तेजी से फैल रही है. अगर ऐसा ही हाल रहा तो साल 2030 तक 9 करोड़ से ज्यादा लोग देश में टाइप 2 मधूमेह की गिरफ्त में होंगे. तो चलिए जानते हैं कि डायबिटीज क्या है और कैसे आप इसे कंट्रोल कर सकते है. हमारे शरीर की पैंक्रियास ग्लैंड के ठीक से काम ना करने या फिर पूरी तरह से बेकार हो जाने से डायबिटीज जैसी घातक बीमारी जन्म लेती है. पैंक्रियास ग्लैंड से कई तरह के हार्मोनस निकलते हैं, इन्हीं में से है इंसुलिन और ग्लूटेन.

हम जब कुछ खाते हैं तो शरीर कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में चेंज कर देता है. इसके बाद पैंक्रियाज से इंसुलिन नाम का एक हार्मोन निकलता है जो कि हमारी बॉडी की कोशिका को ग्लूकोज को सोखने का निर्देश देता है. इससे हमारे शरीर में ताकत आती है. लेकिन जब इंसुलिन का फ़्लो रुक जाता है तो हमारे शरीर में ग्लूकोज़ की संख्या बढ़ना शुरू हो जाती है. इंसुलिन हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी है. इंसुलिन के जरिए ही हमारे रक्त में, कोशिका को शुगर मिलती है, यानी इंसुलिन शरीर के अलग-अलग भागों में शुगर पहुंचाने का काम करता है.

इंसुलिन द्वारा पहुंचाई गई शुगर से ही कोशिका को ताकत मिलती है. डायबिटीज का कारण है इंसुलिन हार्मोन का कम बनना. जब इंसुलिन बनना कम हो जाता है तो कोशिका और रक्त में शुगर ठीक से नहीं पहुंच पाती जिससे कोशिका की ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है और इसी कारण से शरीर को नुकसान पहुंचता है.

परिवार में बीमारी की जड़ें

डायबिटीज के होने का एक बड़ा कारण जेनेटिक भी होता है. अगर आपके परिवार के किसी सदस्य यानी माता-पिता, भाई-बहन में से किसी को डायबिटीज है, तो भविष्य में आपको भी डायबिटीज होने की आशंका बढ़ जाती है. जो लोग ओबेसिटी के शिकार होते हैं, उन्हें भी डायबिटीज होने का ज्यादा खतरा रहता है. इसके अलावा एक्सरसाइज की कमी भी डायबिटीज को निमंत्रण देती है.

देखिए ये विडियो: Silent killer- Diabetes

डायबिटीज के लक्षण क्या हैं?

  • प्यास ज्यादा लगना
  • सामान्य से ज्यादा पेशाब होना, विशेषकर रात में
  • थकान महसूस होना
  • बिना प्रयास किए वजन गिरना
  • मुंह में अक्सर छाले होना
  • आंखों की रोशनी कम होना
  • घाव भरने में समय लगना

ऐसे रोकें डायबिटिज का रास्ता

मधूमेह से बचने के लिए आपको अपने ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करना जरूरी है. आपके ब्लड शुगर का लेवल तभी कंट्रोल होगा जब आप अपने खानपान में बदलाव करेंगे और पौष्टिक भोजन लेंगे. आप टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज को खाने के जरिए कंट्रोल कर सकते हैं.  आपको अपने डाईट में इन 8 चीज़ों को शामिल करने की जरूरत है.

पत्तेदार साग

पत्तेदार सब्जियां बेहद पौष्टिक होती हैं. इनमें कम कैलोरीज होती है. नियमित खाने में पत्तेदार वेजिटेबल को शामिल करने से डाइबिटीज का खतरा कम रहता है. पत्तेदार वेजिटेबल से ब्लड शुगर का लेवल कंट्रोल रहता है. इसके अलावा पत्तेदार वेजिटेबल में कई तरह के विटामिन और खनीज भी मौजूद होते हैं. पत्तेदार साग में एंटीऑक्सीडेंट ल्यूटिन और जेक्सैंथिन की पूरी तादाद होती है.

दालचीनी

दालचीनी से ब्लड शुगर का लेवल कंट्रोल रहता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट की भी पूरी मात्रा होती है. कई रिसर्च में इस बात का पता चला है कि दालचीनी इंसुलिन सेंसटीविटी के लेवल में सुधार करता है. इसके अलावा दालचीनी में कोलेस्ट्रोक की भी तादाद कम होती है. अपने खाने में दालचीनी का प्रयोग करने से डायबिटीज का खतरा कम होता है.

अंडे

खाने में अंडे शामिल करने के कई लाभ हैं. नियमित खाने में सीमित तादाद में अंडे लेने से हार्ट की बीमारी का खतरा कम रहता है. अंडे भी दालचीनी की ही तरह इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करते हैं. रिसर्च में यह बात सामने आई है कि टाइप-2 डाइबिटीज वाले जिन मरीजों ने हर रोज दो अंडे अपनी खाने में शामिल किए, उनके कोलेस्ट्रोल और ब्लड शुगर का लेवलकंट्रोलरहा. इसके अलावा अंडे में पूरी तादाद में ल्यूटिन और जेक्सैंथिन और एंटीऑक्सीडेंट की तादाद होती है.

हल्दी

हल्दी के कई स्वास्थ लाभ हैं. मेडिकल फायदों की वजह से हल्दी का भारतीय मसालों में अलग ही स्थान है. डाइबिटीज में भी हल्दी लाभदायी है. हल्दी से ब्लड शुगर का लेवलकंट्रोलरहता है और हार्ट अटैक का भी खतरा कम होता है.

ड्राई फ्रूट्स

खाने में काजू, बादाम, अखरोट और मेवे शामिल करने से डाइबिटीज कंट्रोल रहती है. रिसर्च में इस बात की जानकारी मिली है कि प्रत्येक दिन नियमित तादाद में ड्राई फ्रूट्स लेने से ब्लड शुगर का लेवल कंट्रोल रहता है.

दही

अगर आपको डाइबिटीज से बचना है तो अपनी डाइट में कर्ड को शामिल करें. दही सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती है. इससे डाइबिटीज के साथ ही हार्ट की बीमारियों का खतरा भी कम होता है. इसके अलावा दही वजन कम करने में भी लाभकारी होती है.

मछली

अगर आप मांसाहारी हैं तो अपने खाने में फिश शामिल करें. फिश को धरती पर सबसे स्वस्थ फूड की संज्ञा दी गई है. फिश में ओमेगा-3 की पूरी तादाद होती है जो आपके हार्ट के लिए बेहद लाभकारी होता है. अगर आप अपनी खाने में पूरी तादाद में फिश शामिल करते हैं तो आपको डाइबिटीज का खतरा कम रहता है. स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी जानलेवा बीमारी से भी बचाव होता है. दरअसल, फिश में डीएचए और ईपीए ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है जो आपकी रक्त धमनियों में मौजूद कोशिकाओं की रक्षा करते हैं. रिसर्च में इस बात का पता चला है कि नियमित तौर पर भोजन में फिश को शामिल करने से हार्ट अटैक के खतरे को कम किया जा सकता है. फिश में प्रोटीन की भी उच्च तादाद होती है जिसकी वजह से आपका मेटाबॉलिज्म का लेवल बढ़ता है.

 

ऐसे ही और रोचक जानकारी के लिए डाउनलोड करें:-

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