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इस पवित्र मंदिर में महारुद्राभिषेक एवं वैदिक पूजा अर्चना का है विशेष महत्व!

Koteshwar Mahadev Mandir
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कोटेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड: (Koteshwar Mahadev Mandir)

हिन्दू श्रद्धालुओं की वृहद् आस्था का केंद्र कोटेश्वर महादेव मंदिर  उत्तराखंड राज्य के जिला रुद्रप्रयाग में पवित्र अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। कहा जाता है कि यहां के कण कण में भगवान शिव विराजमान हैं। चारधाम की यात्रा पर निकले ज्यादातर श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन के बाद ही आगे बढ़ते है। कोटेश्वर महादेव के दर्शन के बिना चार धाम की यात्रा पूरी नहीं होती है। पवित्र श्रावन मास में  यहां हजारों की संख्या में भोले नाथ के भक्त उनका दर्शन करने आते हैं।

इस पवित्र मंदिर में महारुद्राभिषेक एवं वैदिक पूजा अर्चना का विशेष महत्व है। महाशिवरात्रि पर यहां संतानहीन दंपती विशेष अनुष्ठान करते हैं जिससे उनकी संतान प्राप्ति की मनोकामना शीघ्र पूरी होती है।

देखें यह वीडियो: कोटेश्वर महादेव मंदिर

मंदिर की पौराणिक कथा:-

पौराणिक कथाओं  के अनुसार देवाधिदेव महादेव का इस मंदिर से विशेष जुड़ाव है। मान्यताएं है कि भगवान शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए इस मंदिर के पास मौजूद गुफा में रहकर कुछ समय बिताया था। जिसके पश्चात् यहां पर कोटेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण हुआ। शिवभक्त भस्मासुर ने शिवजी की आराधना करके ये वरदान प्राप्त किया था कि जिसके सिर पर भी वो हाथ रख देगा, वो उसी क्षण भस्म हो जायेगा। इस वरदान को आजमाने के लिए उसने भगवान शिव को ही चुना। 

भगवान विष्णु ने किया मोहिनी रूप धारण:- 

ऐसे मुश्किल वक्त में इस गुफा ने शिवजी की रक्षा की थी। शिव भगवान को आपत्ति में देखकर भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण करके भस्मासुर का संहार करते हुए शिवजी की सहायता की थी।  जनश्रुतियों की माने तो कौरवों की मृत्यु के बाद जब पांडव मुक्ति का वरदान मांगने के लिए भगवान शिव को खोज रहे ‌थे, तो भगवान शिव इसी गुफा में ध्यानावस्था में रहे थे। मंदिर की यह मान्यता है कि केदारनाथ धाम के दर्शन करने से पहले कोटेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन कर लेने से सातो जन्म के पापो से मुक्ति मिल जाती है। 

Koteshwar Mahadev Mandir

Koteshwar Mahadev Mandir Image Credit: Google Image

अलकनंदा नदी का मनमोहक दृश्य श्रद्धालुओं को मनभावन प्रतीत होता है:-

आस्था के प्राचीन स्थल कोटेश्वर महादेव मंदिर के पास सीधी खड़ी बड़ी चट्टानों के बीच से निकलते पेड़ और चट्टानों पर लगी विशेष किस्म की वनस्पतियां अत्यंत आकर्षक लगती हैं। मंदिर के बाहर अविरल बहती अलकनंदा नदी का मनमोहक दृश्य श्रद्धालु और पर्यटकों को अपनी ओर लुभाता है। पूर्णिमा की रात में अलकनंदा की सुंदरता देखते ही बनती है। गुफा के अंदर प्राकृतिक रूप से बनी मूर्तियां और शिवलिंग प्राचीन काल से स्थापित हैं।

यहां पढ़ें: अमरेली शहर का यह मंदिर श्रद्धालुओं को अधिक है लोकप्रिय!

हिन्दुओं के प्रख्यात मंदिरों में शामिल कोटेश्वर मंदिर का निर्माण 14वि शताब्दी में किया गया था , इसके बाद 16 वी और 17 वी शताब्दी में इस मंदिर का पुनः निर्माण किया गया था। इस गुफा के अलावा मंदिर के आस-पास माँ पार्वती, श्री गणेश जी, हनुमान जी, और माँ दुर्गा की जो मूर्तियाँ है, वो भी प्राकृतिक रूप से प्रकट हुई है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यहाँ एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। उक्त अवसर पर संतान की कामना रखने वाले निःसंतान दंपती रुद्राभिषेक एवं अन्य अनुष्ठानों से भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां पहुँचते हैं।

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