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जानिए कैसे इस शक्तिपीठ का नाम कुंजापुरी देवी पड़ा !

Kunjapuri shakti peeth
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आज हम बात करेंगे ऋषिकेश(Rishikesh) में स्थित एक ऐसे ही शक्तिपीठ की, जिसकी कहानी और परंपराएं सदियों पुरानी है। देवी का ये मंदिर भी 51 शक्तिपीठों में से एक है और धार्मिक दृष्टि से इस स्थान की काफी महत्वता है। कुंजापुरी देवी शक्तिपीठ मंदिर(Kunjapuri Devi Temple) हिन्दू धार्मिक, पवित्र एवम् प्राचीन मंदिर है। यह उत्तराखंड(K) के टिहरी गढ़वाल जिले में अदली नामक स्थान पर स्थित है।

कुंजापुरी देवी मंदिर 51 शक्तिपीठ में से है, यह मंदिर टिहरी जिले के 3 शक्ति पीठों में से एक है। इसकी स्थापना जगद्गुरु शंकराचार्य ने की थी। देवी का ये मंदिर टिहरी गढ़वाल (Garhwal) जिले में पहाड़ी की चोटी पर स्थित तीन सिध्पीठो ( कुंज पूरी , सुरकुंडा देवी और चन्द्रबदनी सिद्ध) के त्रिकोण को भी पूर्ण करता है, देवी का ये मंदिर शिवालिक पहाड़ियों की 13 सबसे महत्वपूर्ण देवियों में से एक को समर्पित है। देवी का ये मंदिर बेहद सुंदर रुप से निर्मित किया गया है, यह स्थान के प्रसिद्ध शक्तिपीठों से एक माना जाता है।

शक्तिपीठ का नाम कुंजापुरी कैसे पड़ा ?

दरअसल एक समय की बात है कि सृष्टि के आरंभकाल के दौरान राजा दक्ष(Raja Daksh) ने एक यज्ञ का आयोजन करवाया था, जिसमें सभी देवी देवताओं, यक्ष, किन्नर, ऋषि मुनियों को बुलाया गया लेकिन भगवान शिव को इसका निमंत्रण नहीं दिया। माता सती यानि भगवान शिव(Lord Shiva) की पत्नि और राजा दक्ष की पुत्री को जब इस बात की खबर लगी तो वो भगवान शिव की आज्ञा के बिना ही यज्ञ स्थली पहुंच गई। राजा दक्ष ने भगवान शिव का अपमान कर दिया, जिससे माता सती नाराज हो गई और क्रोध में वहीं स्थित यज्ञकुंड में आत्मदाह कर लिया।

kunjapuri shakti peeth history

सती के भस्म होने का समाचार सुनकर भगवान शिव ने दक्ष का सिर काट दिया और सती के देह को लेकर तीनों लोक तांडव करने लगे। प्रलय जैसी स्थिती देखकर सभी देवी देवता भगवान विष्णु से आग्रह करने लगे कि उन्हे इस संकट से बचाए। इसी दौरान भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया था। इसलिए जहां-जहां सती के अंग गिरे वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए और इस स्थान पर माता सती का कुंज भाग गिरा था। जिसके कारण से इस स्थान का नाम कुंजापुरी”(Kunjapuri)पड़ा और पौराणिक समय में इस स्थान पर मंदिर का निर्माण होने के कारण इस मंदिर का नाम कुंजापुरी देवी मंदिररखा गया।

यहाँ पढ़ें: जानिए हुगली नदी के तट पर स्थित किरीतेश्वरी शक्तिपीठ की कहानी

मनोरम दृष्य के बीच भक्तिकेन्द्र !

Kunjapuri Devi

Image Credit:- Temple Purohit

कुंजापुरी देवी मंदिर(Kunjapuri Devi Temple)के परिसर से बर्फ से ढकी हुई पहाड़ों और चोटियों के मनोरम दृश्य लोगों को अत्यधिक आकर्षित करते है। यहां से स्वर्ग-रोहिणी , गंगोत्री (Gangotri), बंदरपूंछ और चौखम्बा के नजारे दिखाई देते है। नवरात्रि के त्यौहार के समय कुंजापुरी देवी मंदिर पर एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में बड़ी संख्या में भक्त लोग मंदिर पर पूजा-अर्चना करने के लिए आते है। इस सिध्पीठ में साल भर भक्त एवम् श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए आते है। कुंजापुरी देवी मंदिर में सभी त्यौहार मनाये जाते है विशेष कर दुर्गा पूजा व नवरात्र के त्यौहार पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। यह मन्दिर भक्तों की अटूट आस्था का केन्द्र है, कहा जाता है कि यहां आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनायें पूर्ण होती हैं।

 

 

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