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Lal Bahadur Shastri Jayanti 2021: जानिए ‘श्रीवास्तव’ से ‘शास्त्री’ बने लाल बहादुर के जीवन से जुड़े किस्से

Lal Bahadur Shastri
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ईमानदारी के मिसाल और साफ-सुथरी छवि के नेता का नाम अगर जेहन में आए तो देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का नाम जरूर याद आता है. ऐसा हो ही नहीं सकता कि शास्त्री की सादगी और उनकी ईमानदारी को आप याद न करें. आज उनकी 117वीं जयंती हैं. उनकी जयंती पर लोग उनकी सादगी को याद कर रहे हैं, उनके जीवन से जुड़े कई किस्से बरबस ही लोगों को याद आ रहे है. हम आपको कुछ ऐसे ही किस्से बताने जा रहे हैं कि कैसे जाति से लेकर हर उस गलत परंपरा का उन्होंने विरोध किया जो वास्तव में गलत था.

2 अक्टूबर 1904 के मुगलसराय में जन्मे लाल बहादुर शास्त्री का जीवन शुरू से ही संघर्षों भरा रहा. मात्र 18 महीने की उम्र में लाल बहादुर शास्त्री के पिता शारदा प्रसाद श्रीवास्तव, जिन्हें सब मुंशीजी कहा करते थे, उनका निधन हो गया. मात्र डेढ़ साल की उम्र में लाल बहादुर के सिर से पिता का साया उठ गया. ननिहाल में रहकर प्राथमिक शिक्षा लेने के बाद लाल बहादुर काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि ली.

 

Lal Bahadur Shastri Jayanti 2021

Image Courtesy: Google.com

श्रीवास्त हटाकर लगाया शास्त्री 

कहते हैं कि ये शास्त्री की उपाधि लाल बहादुर श्रीवास्तव को शास्त्री बनाने के लिए पर्याप्त थी. लाल बहादुर जाति व्यवस्था के इतने विरोधी थे कि नाम के आखिर में लगने वाला श्रीवास्तव को हटाकर उन्होंने शास्त्री लगा लिया और तब से वो लाल बहादुर शास्त्री के नाम से जाने जाने लगे. साल 1928 में उनका विवाह ललिता से हुआ. लाल बहादुर शास्त्री की छह संतानें हुईं. उनमें से अनिल शास्त्री कांग्रेस में और सुनील शास्त्री बीजेपी में हैं.

Lal Bahadur Shastri Jayanti 2021

Image Courtesy: Google.com

स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई सक्रिय भागीदारी 

आजादी के आंदोलन में गांधीवादी लाल बहादुर शास्त्री का काफी अहम योगदान रहा. कहते हैं कि 8 अगस्त 1942 को जब गांधीजी ने अंग्रेजों भारत छोड़ो और करो या मरो का नारा दिया तब 9 अगस्त 1942 को इलाहाबाद पहुंचकर लाल बहादुर शास्त्री ने इस नारे को मरो नहीं मारो में चतुराई पूर्वक बदल दिया. इस नारे ने आंदोलन को हवा दे दी, हालांकि 19 अगस्त 1942 को अंग्रेजी सेना ने शास्त्रीजी को गिरफ्तार कर लिया. इससे पहले असहयोग आंदोलन और दांडी यात्रा में भी लाल बहादुर शास्त्री ने सक्रिय भागीदारी निभाई.

परिवहन मंत्री रहते हुए लिए ये फैसले 

जब देश आजाद हुआ तो पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार में लाल बहादुर शास्त्री परिवहन मंत्री बनाए गए. उस वक्त तक परिवहन विभाग में महिला कंडक्टर्स नहीं होती थी, पहली बार इन्होंने महिला कंडक्टर्स की नियुक्ति की. इसके लावा पुलिस मंत्री का पदभार संभालते हुए शास्त्रीजी ने भीड़ को नियंत्रण में रखने के लिए लाठी की जगह पानी की बौछार का इस्तेमाल करने का आदेश दिया.

Lal Bahadur Shastri Jayanti 2021

Image Courtesy: Google.com

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आज भी रहस्य बनी है मौत 

कुल मिलाकर शास्त्रीजी लोगों की समस्याओं को देखते हुए फैसले लिया करते थे. उनकी एक आवाज पर पूरे देशवासियों ने एक दिन का खाना छोड़ दिया था. पंडित जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री की मौत आज भी रहस्य बनी हुई है. पाकिस्तान के साथ हुए ताशकंद समझौते के महज 12 घंटे बाद ही 11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री की मौत हो गई.

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