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जाति आधारित जनगणना पर केन्द्र का रुख साफ, भड़के लालू-मायावती समेत कई नेता

Caste Census
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जाति आधारित जनगणना (Caste Census) को लेकर केन्द्र सरकार ने अपना रूख साफ कर दिया है, जिस पर कई नेता भड़क उठे हैं. उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने इसे लेकर केन्द्र सरकार पर निशाना साधा है.

 

दरअसल केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि जनगणना में ओबीसी जातियों की गणना करना बहुत लंबी और जटिल प्रक्रिया है. ऐसे में इसे 2021 की जनगणना में शामिल नहीं किया जाएगा. सरकार का यह रुख उन सभी क्षेत्रीय राजनीतिक दलों, संगठनों के लिए एक बड़ा झटका है जो जाति आधारित जनगणना (Caste Census) की मांग कर रहे थे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने पीएम मोदी से मुलाकात की और देश में जाति आधारित जनगणना की मांग की थी.

अब केन्द्र सरकार ने जब अपना रूख स्पष्ट कर दिया है तो उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने ट्वीट कर लिखा है कि केन्द्र सरकार की ओर से पिछड़े वर्गों की जातीय जनगणना (Caste Census) कराने से इनकार कर देना अति गंभीर और चिंतनीय है, यह बीजेपी के चुनावी स्वार्थ की ओबीसी राजनीति का पर्दाफाश और इनकी कथनी-करनी में फर्क दिखाता है. इससे ओबीसी वर्ग दुखी है, उनके भविष्य को आघात पहुंचेगा.

वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपने अंदाज में ट्वीट कर लिखा है कि जनगणना में सांप-बिच्छू, तोता-मैना, हाथी-घोड़ा, कुत्ता-बिल्ली, सुअर-सियार समेत सभी पशु-पक्षी, पेड़-पौधे गिने जाएंगे लेकिन पिछड़े-अति पिछड़े वर्गों के इंसानों की गिनती नहीं गोगी. बीजेपी/आरएसएस को पिछड़ों से इतनी नफरत क्यों. यह पिछड़ा वर्ग के साथ बहुत बड़ा छल है.

इनके अलावा समाजवादी पार्टी ने ट्वीट कर लिखा है कि बीजेपी पिछड़ों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान में सबसे बड़ी बाधा है.

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आवेदन महाराष्ट्र सरकार द्वारा किया गया था

आपको बता दें कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दी गई थी. 2011 की जनगणना के अनुसार केंद्र सरकार से ओबीसी समुदाय के आंकड़े मांगे गए थे. केंद्र ने महाराष्ट्र सरकार के अनुरोध पर अपना जवाब दाखिल किया. जिसमें कहा गया कि 2011 की जनगणना को देखते हुए सरकार के पास हर जाति की आबादी का कोई ठोस आंकड़ा नहीं है.

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