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Homeनेचर एंड वाइल्ड लाइफकौन सा पौधा है हिंदुस्तान के जंगल के लिए सबसे विनाशक?

कौन सा पौधा है हिंदुस्तान के जंगल के लिए सबसे विनाशक?

Lantana: The Biggest threat to Indian Forest
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Lantana camara:- आस्ट्रेलिया के जंगलों में आग लगने के बाद भारत के वनों को आग और अन्य चीजों से बचाने के अभियान चल रहे है… लेकिन अगर आपसे कहा जायें कि भारत के जंगलों पर आग, वनों की बेतहाशा कटाई, शहरीकरण, जैसे ख़तरों से भी बड़ा ख़तरा मंडरा रहा है. अब आप जानना चाहेगें कि जंगली आग और शहरीकरण से भी बड़ा खतरा क्या है? अगर जवाब में आपको  एक फूल से ख़तरा बताया जाये तो आपको कैसा लगेगा?

देखें यह वीडियो: Destroyer of the forest Lantana Camara

हैरान हो गये ना ? जी हां यह बात बिल्कुल सच है कि भारतीय जंगलों को एक फूल के पौधे से ख़तरा है. इस बेहद ख़तरनाक पौधे का नाम है छत्तियानाशी…जिसका वैज्ञानिक नाम है लैंटाना कैमरा। इसे आम बोलचाल की भाषा में पंचफूली भी कहा जाता है। अब आप कहेंगें एक पौंधा से पूरे भारत के जंगलों को कैसे खतरा हो सकता है? लैंटाना कैमरा या छत्तियानाशी को 200 साल पहले अँग्रेज़ शोभाकार फूल के रूप में लाये थे. सजावट के लिए आये यह फूल आज भारत के वनों के लिए अभिशाप बन गये हैं। सुंदर दिखनेवाले यह फूल असल में बेहद ही ख़तरनाक होते है. लैंटाना कैमरा के पौधे जहां पर भी उगते है वहां की ज़मीन को बंज़र बना देते है. इससे भी बड़ी मुश्किल यह है कि इस पौधे के आसपास कोई पेड़-पौंधा यहां तक कि खर-पतवार तक पनप नहीं सकता. ज़हरीला होने के कारण इसे हाथी,हिरण जैसे शाकाहारी प्राणी खा नहीं सकते. और अगर खा भी ले तो यह उन प्राणीयों के शरीर पर गंभीर असर दिखाता है.

Lantana plant

इसके आसपास स्थानीय प्रजाति के पौधे नहीं पनप पाने के कारण लंबे अंतराल के बाद जंगलों का विनाश होना आरंभ हो जाता है. पंचफूली का पौधे के अत्यधिक प्रसार की वजह से भारतीय जंगलों में शाकाहारी प्राणीयों के आहार में कटौती हो रही है.जिसके कारण शाकाहारी जानवर खेतो में आते है और इंसानों के साथ उनका संघर्ष होता है.

इसके अलावा इन प्राणीयों के पीछे मांसाहारी जानवर जैसे की बाघ,तेंदुआ इंसानों के क्षेत्र में आ जाते है…जिससे संकट और भी विकट हो जाता है. इस पूरी प्रक्रिया से इंसान,जंगल और वन्य जीव तीनों खतरे में है…. इस पौधे के विस्तृत फैलाव का विनाश करना आसान नहीं है.जंगलों के साथ यह पौंधा खेती की उर्वर ज़मीन को भी बंज़र बना रहा है. आज देश के अधिकतर राज्यों के किसानों के लिए छत्तियानाशी का पौधा एक बड़ी समस्या बन चुका है. इस पौधे से देश के अनेक राज्यों में बड़े हिस्से की ज़मीन बंजर हो गई है. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाके में लगनेवाली भयानक आग भी पंचफूली की झाड़ियों को नष्ट नहीं कर पाती. बारिश होने के साथ ही पुनः  यह पौंधा फिर जगह-जगह फलता-फूलता, भूमि को बर्बाद करता देखा जा सकता है. भूमि में गहरे पैठी इसकी जड़ों को उखाड़ने पर पहाड़ी ज़मीन खिसकने लगती है और भूमि का कटाव आरंभ हो जाता है. जहां भी इसकी फसलें फैली, वहां इसके पौधों ने फसलों को चौपट कर दिया. 

आज बांदीपुर और नागरहोल नेशनल पार्क के 60 प्रतिशत ऐरीया पर लैंटानाने कब्ज़ा कर रखा है. देश के हर एक वनों पर लैंटाना का कब्ज़ा है. विदेश से आया हुआ यह पौंधा देश के वनों को बर्बाद कर रहा है. यह पौधे को नष्ट करने के लिए बहुत से प्लान तैयार किए गये है. 

  1.  पहला तरीका है यह पौधे की जड़ ऐसे काटा जाये की वो फिर से उग न सके, जो कि संभव ही नहीं है.
  2. दूसरा तरीका है गांव के लोगों के प्रयासों से स्थानीय पौधों को प्रोत्साहन देने का किंतु जागरूकता के अभाव में यह भी कारगर नहीं है.
  3. तीसरे तरीके की बात करे तो ये असरकारक होने के साथ ही ख़तरनाक भी है. यह तरीका है पौधे को खाने वाले एक कीट लैंटाना लेस को छोड़ने का, किंतु यह कीट स्थानीय प्रजाति के पौधों को भी नष्ट कर सकता है.

साधारण तौर पर देखने में आता है कि धरती पर कोई प्रजाति देशी-विदेशी नहीं होती, बशर्ते धरती का वह हिस्सा उस प्रजाति को अपना ले. लेकिन भारत के संदर्भ में लैंटाना का पौधा वनों का दुर्भाग्य बन चुका है.

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