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शिवालिक की पहाड़ियो पर स्थित है मां नैना देवी का यह शक्तिपीठ

Maa Naina Devi
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हिमाचल का बिलासपुर जिला, जहां शिवालिक पर्वत श्रेणी की पहाड़ियो पर स्थित एक भव्य मंदिर है। माता का ये धाम देवी के 51 शक्ति पीठों में शामिल है। देवी का ये धाम नैना देवी शक्तिपीठ के नाम से विख्यात है। वर्तमान मे उत्तर भारत की नौ देवियों मे नैना देवी का छटवां दर्शन होता है। वैष्णो देवी से शुरू होने वाली नौ देवी यात्रा मे माँ चामुण्डा देवी, माँ वज्रेश्वरी देवी, माँ ज्वाला देवी, माँ चिंतपुरणी देवी, माँ नैना देवी, माँ मनसा देवी, माँ कालिका देवी, माँ शाकुम्भरी देवी सहारनपुर आदि शामिल हैं।

नैना देवी हिंदूओं के पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती के नेत्र गिरे थे। मंदिर में पीपल का पेड़ मुख्य आकषर्ण का केन्द्र है जो की कई सालों पुराना है। मंदिर के मुख्य द्वार के दाईं ओर भगवान गणेश और हनुमान कि मूर्ति है। मुख्य द्वार के पार करने के पश्चात आपको दो शेर की प्रतिमाएं दिखाई देगी। जैसा की आप जानते हैं शेर, माता का वाहन माना जाता है। मंदिर के गर्भगृह में मुख्य तीन मूर्तियां है। दाई तरफ माता काली,मध्य में नैना देवी की और बाई ओर भगवान गणेश की प्रतिमा है। एक पवित्र जल का तालाब है जो मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। मंदिर के पास ही एक गुफा है जिसे नैना देवी गुफा के नाम से जाना जाता है।

देखें ये वीडियो: मां दुर्गा के प्रसिद्ध मंदिर

देवी की उत्पत्ति कथा

दुर्गा सप्तशती और देवी महात्यमय के अनुसार देवताओं और असुरों के बीच में सौ वर्षों तक युद्ध चला था। इस युद्ध में असुरो की सेना विजयी हुई थी। असुरो का राजा महिषासुर स्वर्ग का राजा बन गया और देवता सामान्य मनुष्यों कि भांति धरती पर विचरण करने लगे। तब पराजित देवता ब्रहमा जी के साथ मिलकर भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे और सारा वृतांत सुना दिया। सारी बात सुनकर भगवान शिव औऱ विष्णु क्रोधित हो गए, जिससे उनके शरीर से एक तेज उत्पन्न हुआ।

भगवान शंकर के तेज से उस देवी का मुख, विष्णु के तेज से उस देवी की बाहें , ब्रहमा के तेज से चरण तथा यमराज के तेज से बाल। इन्द्र के तेज से कटि प्रदेश तथा अन्य देवता के तेज से उस देवी का शरीर बना। फिर हिमालय ने सिंह, भगवान विष्णु ने कमल, इंद्र ने घंटा तथा समुद्र ने कभी न मैली होने वाली माला प्रदान की। तभी सभी देवताओं ने देवी की आराधना की ताकि देवी प्रसन्न हो और उनके कष्टों का निवारण हो सके। और हुआ भी ऐसा ही।

देवी ने प्रसन्न होकर देवताओं को वरदान दे दिया और कहा मैं तुम्हारी रक्षा अवश्य करूंगी। इसी के फलस्वरूप देवी ने महिषासुर के साथ युद्ध प्रारंभ कर दिया। जिसमें देवी की विजय हुई और तभी से देवी का नाम महिषासुर मर्दनी पड़ गया।

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नैना देवी के प्रमुख त्यौहार !

यहां माता के इस धाम में नवरात्रि का त्यौहार बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। वर्ष में आने वाली दोनो नवरात्रि, चैत्र मास और अश्विन मास के नवरात्रि में यहां पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु यहां आकर माता नैना देवी की कृपा प्राप्त करते है। माता को भोग के रूप में छप्पन प्रकार कि वस्तुओं का भोग लगाया जाता है। श्रावण अष्टमी को यहां पर भव्य व आकषर्क मेले का आयोजन किया जाता है। नवरात्री के दिनों में यहां आनेवाले भक्तों की संख्या लगभग दोगुनी रहती है।

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