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उत्तराखंड में कैसे हुई मां शीतला देवी की स्थापना, जानिए पूरी कहानी

Sheetla mata
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उत्तराखंड एक ऐसी देवभूमि जहां लगभग सभी देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। इस पावन भूमि पर निवास कर रही है एक एसी ही देवी जिनके दर्शन हम आपकों कराने जा रहे है। नैनीताल के हल्दवानी में स्थित शीतला देवी मंदिर। देवी का यह भव्य और विशाल मंदिर है जो हल्दवानी से 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शीतला देवी मंदिर हल्दवानी का एक बहुत ही आकर्षक मंदिर है। माता का यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। यहां वातावरण काफी शानदार है। शीतला देवी मंदिर को सिताल भी कहा जाता है।

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माना जाता हैं कि शीतला देवी के नाम से पूजित इस स्थान पर यात्रा मार्ग के निकट एक बहुत बड़ा बाज का वृक्ष है जिसके नीचे मां भगवती उमादेवी ने विश्राम किया था। ऐसा माना जाता है कि भीमताल के पंडित लोग बनारस से मूर्ति को अपने गांव में शीतला माँ का मंदिर बनाने के लिए ला रहे थे, तब उनको पैदल चलते-चलते माँ के द्वार तक पहुंचने में रात हो गयी और उन्होंने रानीबाग के गुलाबघाटी में ही विश्राम किया। उसी दौरान रात में एक व्यक्ति ने इस जगह में मां की स्थापना का सपना देखा और व्यक्ति ने अपने साथी को सपने के बारे में बताया। उनके साथियों को उस बात पर भरोषा नहीं हुआ,और उन्होंने मूर्ति को उठाना शुरू कर दिया, लेकिन वह मूर्ति को हिला तक न सके। उन लोगों को तब भरोसा हुआ और मंदिर की स्थापना की। तब से वह पांडेय लोग ही सबसे पहले देवी की पूजा करने आते है।

वन्देऽहंशीतलादेवी राक्षभस्थांदिगम्बराम्।।

मार्जनी कलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।

अर्थात- गर्दभ पर विराजमान, दिगम्बरा, हाथ में झाडू तथा कलश धारण करने वाली सूप से अलंकृत मस्तक वाली मां की मैं वंदना करता हूं। शीतला माता के इस वंदना से यह स्पष्ट है कि ये स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। हाथ में झाडू होने का अर्थ है कि हम लोगो को भी सफाई के प्रति जागरूक होना चाहिए। कलश से हमारा तात्पर्य है कि स्वच्छ रहने से स्वास्थ्य में समृद्धि आती है।

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स्कन्द पुराण में इनकी अर्चना का स्तोत्र शीतलाष्टक के रूप में प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र की रचना भगवान शंकर ने लोकहित में की थी। शीतलाष्टक शीतला देवी की महिमा गान करता है। साथ ही उनकी उपासना के लिए भक्तों को प्रेरित भी करते है। नवरात्र के दिनों में देवी के दर्शन के लिए भक्तों की काफी भीड़ भी रहती है जिससे की खास मौके पर देवीकृपा प्राप्त हो सके।

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