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हर मनोकामना पूर्ण करती माँ उल्का देवी !

Maa Ulka Devi
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नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।

नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम्।।

इस श्लोक का मतलब है कि उन देवी को नमन है जो देवियों की देवी है, जो शिव की प्रिया हैं , उन देवी के हम शरणागत हैं, उन्हें वंदन है, जो सृष्टि में प्रकृति स्वरूप में व्याप्त हैं और जो मंगल दायिनी हैं !

भारत में कई धार्मिक स्थल है सभी की मान्यताएं भी अलग अलग है आज हम आपको एक ऐसे ही देवी मंदिर की यात्रा पर लेकर चल रहे है जिसकी कथा और मान्यता काफी प्रसिद्ध है। हम बात कर रहे है उत्तराखंड (Uttarakhand) राज्य के बागेश्वर जिले में स्थित उल्का देवी मंदिर (Ulka Devi Mandir) की। उत्तराखंड के प्रमुख शक्तिपीठ(Shaktipeeth) के रूप में ख्याति प्राप्त उल्का देवी मंदिर देवी भक्तों के लिए पूजनीय है, और यही वजह है कि यहां स्थान धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।

Temple of Maa Ulka Devi

उल्का देवी मंदिर(Ulka Devi Mandir) में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को यहां आकर एक अलग और अनोखा सुकून मिलता है। हिमालय की मनोरम पहाड़ियों में स्थित माता का ये मंदिर प्रकृति की गोद में भक्ति की अलग ही कहानी बयां करता है। माना जाता है कि माता का ये मंदिर आदिकाल से ही यहां स्थित है। मां उल्का देवी को शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है, और मां उल्का देवी को क्षेत्र की रक्षिका देवी यानी की रक्षा करने वाली देवी के रूप में माना जाता है।

यहाँ पढ़ें: ट सावित्री व्रत की विधि और उसकी कथा के बारे में जानिये

मां उल्का देवी की मान्यताएं

 

मां उल्का देवी(Maa Ulka Devi) को भगवती के नाम से भी जाना जाता है, इस जगह की शक्ति और मान्यताओं की वजह से दूर दूर से भक्त यहां माता के दर्शन के लिए आते है। इस जगह के लोगों की मान्यता है कि मां उल्का के इस दरबार में मांगी गई मन्नत कभी भी व्यर्थ नहीं जाती है, जो अपनी आराधना और श्रद्धा के साथ मां के चरणों में पुष्प अर्पित करता है, वह परम कल्याण का भागी बनता है, मां अपने भक्तों को कई बीमारियों से बचाती है और उनकी रक्षा करती है, मां उल्का देवी मंदिर से दूर दूर तक सुन्दर दृश्य दिखाई देता है,  देवी के इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है

Maa Ulka Devi Mandir

मां उल्का देवी के मंदिर को आधुनिक शैली से निर्मित किया गया है, मंदिर को ध्यान से देखे तो कई नई तरह की कारीगरी भी देखने को मिलती है, यहां मंदिर में सभी त्यौहार काफी जोर से मनाया जाता है जिसमें प्रत्येक नवरात्र सहित जन्माष्टमी, करवाचौथ व बट सावित्री के मौके पर विशेष आयोजन किया जाता है, यहां सप्तमी के समय महानिशा पूजा, अष्टमी को महागौरी और नवमी को सिद्धिदात्री देवी के पूजन के बाद हवन और कन्या पूजन में भक्तों की काफी भीड़ जुटती है दशमी तिथि के दौरान यहां खासकर के शांति पूजा की जाती है, मंदिर में किए जाने वाली पूजा प्रकिया सात्विक तरीके से पूरी की जाती है। देवी का मंदिर होने के बावजूद यहां मंदिर में बलि का कोई प्रावधान नहीं है, खासकर नवरात्र के दौरान महाष्टमी और नवमी के समय यहां काफी भीड़ होती है। उल्का देवी के मंदिर में हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए आते हैं।

मां उल्का देवी मंदिर स्याकोट तक आसानी से पहुँचा जा सकता है।

हवाई– पंतनगर हवाई अड्डे तक आप बाईयर आ सकते है। वहाँ से आप बस अथवा कार से आसानी से जा सकते है। पंतनगर से मां उल्का मंदिर स्याकोट की दूरी 122 किलोमीटर है।

ट्रेन – काठगोदाम रेलवे स्टेशन तक आप ट्रेन  से आ सकते है। वहाँ से आप टैक्सी अथवा कार से आसानी से जा सकते है। काठगोदाम से मां उल्का मंदिर स्याकोट की दूरी 207 किलोमीटर है।

 

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