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Homeनेचर एंड वाइल्ड लाइफनदी जिंदा है या मुर्दा बताने वाली मछली पर अस्तित्व का संकट, क्या इंसान कुछ नहीं बचने देगा ?

नदी जिंदा है या मुर्दा बताने वाली मछली पर अस्तित्व का संकट, क्या इंसान कुछ नहीं बचने देगा ?

Mahseer
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मछली जो कहलाती है मछलियों की बाघ. मछली का नाम है Mahseer. हिंदी और कुमाऊनी में महासिर,महासेर और महासौला के इन मछलियों के  समूह को जाना जाता हैं . इसमें माही यानी मछली और शेर यानी बाघ. इसलिए इस मछली को मछलियों की बाघ के शानदार नाम से नवाजा गया हैं.

Mahseer

Golden Mahseer जिसे वैज्ञानिक Tor putitora के नाम से जानते है. जो ज्यादा से ज्यादा 2.74 मीटर तक लंबी हो सकती है. जिसका अधिकतर वजन 50 किलोग्राम हो सकता है.

यह मछली मीठे पानी में सबसे ज्यादा मजबूत होती है. इसके शरीर  का रंग सुनहरा होता है. Golden Mahseer के स्केल्ड सुनहरे रंग के होते इसी कारण से इनको सुनहरी महाशीर कहते है. यह मछली उनके बड़े-मजबूत स्केल्ड और पावरफूल होठ से भी जानी जाती है.

Mahseer

Image-dhritiman-mukherjee

महाशीर मछली मध्य प्रदेश की राज्य मछली हैं. इसके साथ महाशीर मछली अरूणाचल प्रदेश, कर्णाटक, हिमाचल प्रदेश, जम्मु-काश्मीर,नागालैंड और उत्तराखंड में देखने को मिलती है.

क्यो जरूरी है महाशीर मछलियां

कई जलीय जीवों की उपलब्धता पानी की गुणवत्ता का मानक कहा जा सकता है. महाशीर जिस नदी में होती है वहां कि नदी का पता लगता है. नदी जिंदा है या मर गई है यह मछली का होना बया कर देता है. महाशीर की तेजी से घटी संख्या इस बात का प्रमाण है कि नदी बेसिनों का जल प्रदूषित हुआ है.  जलीय जैव विविधता की सेहत बेहद खराब हो रही है. जो इकोसिस्टम के लिए खतरनाक है.  महाशीर को फिश ऑफ फ्रेश वाटर भी कहा जाता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक महाशीर को बचाना जरूरी है क्योंकि यह साफ पानी में रहने वाली एकमात्र मछली है. जो पानी की गुणवत्ता के लिए एक मानक माना जा सकता है. साफ पानी वाली नदियों की water ecosystem के लिए इसकी अहम भूमिका है. महाशीर मछली का कम होना जल स्रोतों की बिगड़ती सेहत का प्रतीक है.

mahseer

Image-dhritiman-mukherjee

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महाशीर मछलियों की आबादी में तेजी से गिरावट आ रही है. यह मछली प्रदूषण के कारण पानी में ही मर रही है. इसी के साथ नदियों के बीच में बांघ दूसरी चीजें  बनाने कि वजह से मछलियों के आवास में कमी आ रही है. ज्यादा मछलियों का शिकार करने से भी इनकी आबादी में कमी आ रही है. आज महाशीर मछलियों की आबादी घटकर तीन प्रतिशत हो चुकी हैं.

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