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Homeभक्तिअजमेर में मणिबंद शक्तिपीठ, जानिए मां दुर्गा के इस शक्तिपीठ से जुड़ी पौराणिक कथा

अजमेर में मणिबंद शक्तिपीठ, जानिए मां दुर्गा के इस शक्तिपीठ से जुड़ी पौराणिक कथा

Maniband Shaktipeeth Temple
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Maniband Shaktipeeth Temple: राजस्थान का अजमेर शहर जहां स्थित है पुष्कर शहर और यहीं से 5 किलोमीटर दूर स्थित है माता का वो धाम जहां शक्ति स्वयं निवास करती है। पुष्कर के पास स्थित है गायत्री देवी शक्तिपीठ। आसपास के इलाके से भक्त यहां माता के दर्शन के लिए आते है, कहते है यहां मां की कलाई गिरी थी। यह शक्तिपीठ मणिदेविका या गायत्री मन्दिर (Maniband Shaktipeeth Temple) के नाम से विख्यात है।

यहां के शिव भैरू सर्ववनंदा कहलाते है। वैसे तो भारत में सभी जानते है कि शक्तिपीठ मंदिरो की स्थापना कैसे हुई। जिनमें से कुछ शक्तिपीठ मंदिर नेपाल, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका में भी स्थित है। पुष्कर स्थित मणिबंद देवी के शक्तिपीठ मंदिर से अभी भी बहुत सारे भक्त अनजान है।

Maniband Shaktipeeth Temple

Maniband Shaktipeeth Temple

मणिबंद गायत्री देवी की पौराणिक कथा:

मां के 51 शक्तिपीठों की एक पौराणिक कथा के अनुसार राजा प्रजापति दक्ष की पुत्री के रूप में माता दुर्गा ने सती के रूप में जन्म लिया था और भगवान शिव से उनका विवाह हुआ था, एक बार मुनियों के एक समूह ने यज्ञ आयोजित किया। यज्ञ में सभी देवताओं को बुलाया गया था, जब राजा दक्ष आए तो सभी लोग खड़े हो गए लेकिन भगवान शिव खड़े नहीं हुए। भगवान शिव दक्ष के दामाद थे, यह देख कर राजा दक्ष बेहद क्रोधित हुए। अपने इस अपमान का बदला लेने के लिए सती के पिता राजा प्रजापति दक्ष ने भी एक यज्ञ का आयोजन किया। उस यज्ञ में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन उन्होंने जान-बूझकर भगवान शिव को इस यज्ञ का निमंत्रण नहीं भेजा। भगवान शिव इस यज्ञ में शामिल नहीं हुए और जब नारद जी से सती को पता चला कि उनके पिता के यहां यज्ञ हो रहा है लेकिन उन्हें निमंत्रित नहीं किया गया है। यह जानकर वे क्रोधित हो उठीं।

नारद ने उन्हें सलाह दी कि पिता के यहां जाने के लिए बुलावे की जरूरत नहीं होती है। जब सती अपने पिता के घर जाने लगीं तब भगवान शिव ने उन्हें समझाया लेकिन वह नहीं मानी तो प्रभु ने स्वयं जाने से इंकार कर दिया। शंकर जी के रोकने पर भी जिद कर सती यज्ञ में शामिल होने चली गईं। यज्ञ-स्थल पर सती ने अपने पिता दक्ष से शंकर जी को आमंत्रित न करने का कारण पूछा और पिता से उग्र विरोध प्रकट किया। इस पर दक्ष, भगवान शंकर के बारे में सती के सामने ही अपमानजनक बातें करने लगे। इस अपमान से पीड़ित सती ने यज्ञ-कुंड में कूदकर अपनी प्राणाहुति दे दी।

माता सती के अंग जहां भी गिरे वो शक्तिपीठ कहलाए:

यह सूचना जब महादेव को मिली तो वो काफी क्रोधित हुए। उन्होंने अपने गण और वीरभद्र को यज्ञ स्थल भेजा वीरभद्र और महादेव के गणों ने पूरे यज्ञ को नष्ट कर दिया। और राजा दक्ष का सिर काट दिया, भगवान शिव क्रोधित होकर तीनों लोकों के चक्कर लगाने लगे महादेव के क्रोध से सभी घबरा गए। तब पश्चात भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता के शरीर के टुकड़े टुकड़े कर दिए ताकि महादेव शोक से बाहर निकल सकें। माता सती के शरीर के अंग पृथ्वी पर जहां जहां भी गिरे वो शक्तिपीठ कहलाए। देवी के इस धाम में माता की कलाई गिरी। जिस वजह से ये स्थान शक्तिपीठ में शामिल हुआ।

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(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। OTT India इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)

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