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आखिर महबूबा मुफ्ती ने क्यों किया चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान, जानिए..

Mehbooba Mufti
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Mehbooba Mufti: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और PDP की मुखिया महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। महबूबा मुफ्ती ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि ‘जब तक जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 बहाल नहीं हो जाता है तब तक वह चुनाव नहीं लड़ेंगी।’ 

mehbooba MUFTI

महबूबा मुफ्ती ने कहा नहीं लड़ूंगी चुनाव:

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू कश्मीर में उत्पीड़न के युग को समाप्त करना होगा। उन्होंने साफ कर दिया है कि यदि जम्मू कश्मीर में चुनाव हुए और उनकी पार्टी जीत गई तब भी वह मुख्यमंत्री नहीं बनेंगी। महबूबा ने कहा, ‘मैंने कई बार स्पष्ट किया है कि मैं केंद्र शासित प्रदेश के तहत कोई चुनाव नहीं लड़ूंगी, लेकिन साथ ही मेरी पार्टी इस तथ्य से भी अवगत है कि हम किसी को राजनीतिक स्थान नहीं लेने देंगे। हमने पिछले साल जिला विकास परिषद का चुनाव लड़ा था।’

दिल की दूरियां कम करने का मतलब सब समझते हैं

महबूबा ने कहा कि ”प्रधानमंत्री के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई। हमने जो कुछ कहा उसे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने सुना। जब प्रधानमंत्री दिल की दूरियां कम करनी है कहते हैं तो उसका मतलब क्या होता है कोई भी उम्मीद कर सकता है। ज्ञात हो कि बैठक में मोदी ने कहा था कि वह दिल्ली की दूरी और दिल की दूरी को हटाना चाहते हैं।

Mehbooba Mufti

जम्मू-कश्मीर में दमन का युग है: महबूबा

महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा हटाने करने के लिए 5 अगस्त 2019 को पारित किए गए आदेशों को हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ”जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ रिश्ते बेहतर करने होंगे। सेंट्रल लीडरशिप को उनके दर्द को समझना होगा। इसके लिए पारित सभी कठोर आदेशों पर अमल को रोकना होगा। आजकल जम्मू-कश्मीर में दमन का युग है। इसे खत्म करना होगा।

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महबूबा ने केंद्र से पूछा सवाल

उन्होंने सवाल किया कि जिस किसी को भी किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायत होती है, उसे ऐहतियाती हिरासत में डाल दिया जाता है। ट्विटर पर वास्तविक भावनाओं को उजागर करने से आपको जेल हो जाती है। क्या इसे ही लोकतंत्र कहा जाता है। महबूबा ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाने और लोगों को खुलकर सांस लेने देने की तत्काल आवश्यकता है।

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14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात:

महबूबा ने कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों पर तत्काल रोक लगाने और लोगों को खुलकर सांस लेने देने की तत्काल आवश्यकता है। 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने न केवल प्रधानमंत्री, बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वरिष्ठ नौकरशाहों से भी मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद और उमर अब्दुल्ला आदि शामिल थे।

गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद तत्कालीन जम्मू कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया था।

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