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मणिपुर में असम राइफल्स के काफिले पर हमला, कमांडिंग ऑफिसर समेत कई शहीद

Militant Attack In Manipur
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मणिपुर से असम राइफल्स के जवानों के काफिले पर हमले (Militant Attack In Manipur) की ख़बर सामने आई है. जिसमें कमांडिंग ऑफिसर समेत कई जवान शहीद हो गए. बताया जा रहा है कि कमांडिंग ऑफिसर पत्नी बच्चे के साथ जा रहे थे इसी दौरान घात लगाए उग्रवादियों ने हमला कर दिया. अब सेना के जवान उग्रवादियों की तलाश में जुटे हैं.

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर इस हमले की कड़ी निंदा की है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि देश ने आज 5 बहादुर खो दिए, जिनमें असम राइफल्स 46 के कमांडिंग ऑफिसर और परिवार के दो सदस्य भी शामिल थे. शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं. 

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह (N Biren Singh) ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि राज्य की पुलिस और अर्द्धसैनिक बल उग्रवादियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. उन्होंने लिखा कि 46 AR पर कायराना हमले (Militant Attack In Manipur) की कड़ी निंदा करता हूं. जिसमें सीओ और उनके परिवार समेत कई लोगों के मारे जाने की ख़बर सामने आई है.

मणिपुर के सिंघाट में उग्रवादी हमला 

जानकारी के मुताबिक मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के सिंघाट में घात लगाए बैठे उग्रवादियों ने काफिले (Militant Attack In Manipur) पर अचानक हमला बोल दिया. काफिले में असम राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर अपनी पत्नी बच्चे के साथ थे और उनके साथ क्विक एक्शन टीम भी मौजूद थी.

मणिपुर में उग्रवाद की समस्या

बता दें कि मणिपुर में उग्रवाद की समस्या लंबे समय से बरकरार है, इस हमले के पीछे मणिपुर की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी का हाथ बताया जा रहा है, अब तक कोई अधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि बीते कुछ सालों में उग्रवाद की घटनाओं में कमी जरूर आई है. मोदी सरकार पूर्वोत्तर में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से वहां के उग्रवादी समूहों के साथ लगातार समझौते कर रही है, साथ ही अर्द्धसैनिक बल की टुकड़ियां भी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभा रही है.

उग्रवादी गुटों से समझौता

मणिपुर के पड़ोसी राज्य असम के कई गुटों के साथ केन्द्र सरकार ने समझौता किया था. सितंबर महीने में पांच गुटों पीपुल्ड डेमोक्रेटिक काउंसिल ऑफ कार्बी लोंगरी, कार्बी लोंगरी एनसी हिल्स लिबरेशन फ्रंट, कार्बी पीपुल्स लिबरेशन टाइगर, कुकी लिबरेशन फ्रंट और यूनाइटेड पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ समझौता (Karbi Peace Accord) हुआ था. ये वो संगठन हैं जो बोडोलैंड की तरह अलग राज्य की मांग कर रहे थे. बीते साल मोदी सरकार के कार्यकाल में ही बोडोलैंड समझौता भी हुआ था. उसके बाद नागालैंड के उग्रवादी समूहों के साथ भी सरकार ने समझौता किया था.

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