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कृषि कानूनों के एक साल, हरसिमरत कौर बादल बोंली- देश में अघोषित आपातकाल

New Farms Law
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नए कृषि कानूनों (New Farms Law) के एक साल पूरे होने पर शिरोमणि अकाली दल की ओर से काला दिवस मनाने का ऐलान किया गया है. दिल्ली में जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है, कई जगह पर प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने ट्रैफिक अलर्ट भी जारी किया है. वहीं मोदी सरकार में मंत्री रहीं हरसिमरत कौर बादल ने ट्वीट कर मोदी सरकार पर निशाना साधा है.

 

पूर्व केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने लिखा है कि राष्ट्रीय राजधानी में एंट्री प्वाइंट सील करने और शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ताओं को हिरासत में लने की कड़ी निंदा करती हूं. दिल्ली पुलिस तीन कृषि कानूनों (New Farms Law) के खिलाफ विरोध को विफल करने की कोशिश में लगी है, यह एक अघोषित आपातकाल है.

 

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दरअसल शिरोमणि अकाली दल ने कृषि कानूनों के एक साल (New Farms Law) पूरे होने पर काला दिवस मनाने का ऐलान किया है, जिसके विरोध में शिरोमणि अकाली दल के नेता और कार्यकर्ता संसद मार्च निकालने वाले हैं, जिसे लेकर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. बता दें कि सितंबर के महीने में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीनों कृषि कानूनों को मंजूरी दी थी. जिसके विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर अभी भी किसान डटे हुए है. इन कानूनों को लेकर ही हरसमिरत कौर बादल ने केन्द्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था.

वहीं पंजाब में इस कृषि कानून (New Farms Law) का शुरुआत में जबरदस्त विरोध देखने को मिला, जहां रेलवे की पटरियों से लेकर सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन हुआ, लंबे समय तक वहां ट्रेन की आवाजाही भी बाधित रही, हालांकि बाद में पंजाब से हरियाणा के रास्ते किसानों ने दिल्ली का रूख किया और दिल्ली की टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर बीते 9 महीने से किसान डटे हुए हैं.

Farmers Protest

Image Courtesy: Google.com

बीते 5 दिसंबर को मुजफ्फरनगर में किसानों ने महापंचायत का आयोजन किया था जबकि करनाल में अभी कुछ दिन पहले विरोध प्रदर्शन के दौरान एक किसान की मौत हो गई, जिसे लेकर लंबा विरोध चला और फिर बातचीत के बाद सहमति बनी. अक्टूबर 2020 से लेकर अब तक की बात करें तो कई बार सरकार और किसानों के बीच बातचीत हो चुकी है लेकिन सहमति नहीं बन पाई है. वहीं किसानों ने भी साफ कर दिया है कि जब तक कृषि कानूनों की वापस नहीं होती तब तक घर वापसी नहीं होगी. वहीं अलग-अलग विपक्षी पार्टियां भी किसानों के इस आंदोलन को समर्थन दे रही है.

किसान आंदोलन की पूरी Timeline 

  • 14 अक्टूबर 2020- केन्द्रीय कृषि सचिव किसानों के साथ बैठक करने पहुंचे लेकिन किसानों ने ये कहते हुए बैठक से इनकार कर दिया कि वो कृषि मंत्री के साथ बातचीत करना चाहते हैं.
  • 13 नवंबर 2020- किसानों की मांग पर केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने बातचीत की. तब एक समिति बनाने पर बात हुई लेकिन कोई निर्णय नहीं निकला.
  • 1 दिसंबर 2020- सरकार की ओर से एक बार फिर विशेषज्ञों की समिति बनाने की बात किसानों को कही गई लेकिन किसानों ने अस्वीकार कर दिया.
  • 3 दिसंबर 2020- कृषि मंत्री ने ये आश्वासन दिया कि एमएसपी खत्म नहीं होगी, साथ ही जानकारी दी कि सरकार पांच प्वाइंट पर विचार करने के लिए सहमत है.
  • 5 दिसंबर 2020- किसानों ने कृषि कानून रद्द करने की मांग की, इसी बीच 8 दिसंबर को भारत बंद का ऐलान कर दिया.
  • 8 दिसंबर 2020- पहली बार गृहमंत्री अमित शाह ने किसानों के साथ बैठक की. जिस पर कोई नतीजा निकलने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
  • 30 दिसंबर 2020- सरकार ने एक बार फिर किसानों की दो मांगों पर सहमति जताई.
  • 4 जनवरी 2021- किसानों ने कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग दोहराई और बैठक की अगली तारीख निर्धारित हो गई.
  • 8 जनवरी 2021- कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर कोई फैसला नहीं हुआ लेकिन केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि इसके अलावा अगर कोई और सुझाव है सरकार बातचीत करने को तैयार है.
  • 12 जनवरी 2021- सरकार ने बातचीत से समाधान के लिए चार सदस्यों की कमेटी बनाई, जिसमें भूपिंदर सिंह मान, अशोक गुलाटी, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी और अनिल कुमार धनवत का नाम शामिल था. जिसमें से भूपिंदर सिंह मान ने खुद को अलग कर लिया. इसने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में जमा की है.  
  • 20 जनवरी 2021- एक बार फिर कृषि कानूनों के लिए समिति बनाने की बातचीत की गई.
  • 22 जनवरी 2021- किसानों ने केन्द्र के प्रस्ताव को खारिज कर दिया.

इसके बाद 26 जनवरी को किसानों के ट्रैक्टर परेड और दिल्ली के लालकिले से आई तस्वीर को सबने देखा. इसमें खालिस्तानी एंगल से लेकर और भी कई बातें कहीं गईं. दिल्ली पुलिस ने कहा कि तय रूट पर ट्रैक्टर परेड नहीं निकाला गया इस वजह से ऐसा हुआ. इसी के बाद टूलकिट को लेकर भी चर्चा तेज हो गई. इस बीच ऐसा लगा कि किसान आंदोलन खत्म होने को है लेकिन कहा जाता है कि राकेश टिकैत के आंसूओं ने आंदोलन को एक बार फिर खड़ा कर दिया. इसके बाद से तीनों बॉर्डर पर किसान डटे हुए हैं.

 

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