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निष्कलंक महादेव: यहां मिली थी पांडवों को पाप से मुक्ती, सागर करता है शिवलिंग का जलाभिषेक

Nishkalank Mahadev Mandir
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।ॐ नमो नीलकंठाय, दक्षज्वर ध्वंसनाय श्री नीलकंठाय नमः।

Nishkalank Mahadev Mandir: अरब सागर के किनारे, समुद्र की ऊंची लहरों के बीच स्थापित है प्राचीन महादेव मंदिर। एक ऐसा मंदिर जिसके नाम में जुड़ा हुआ है सम्पूर्ण इतिहास। कहा जाता है कि यहां स्थापित शिवलिंग से हुआ था पांडवों के पापों का नाश। आइए जानते हैं निष्कलंक महादेव (Nishkalank Mahadev Mandir) की लोककथा।

nishkalank

निष्कलंक महादेव (Nishkalank Mahadev) पौराणिक कहानी:

निष्कलंक महादेव का इतिहास बड़ा रोचक है। पौराणिक कथा के अनुसार जब पांडवों ने पांच शिवलिंग की स्थापना की। पापों से मुक्ति पाने के लिए पांडवों ने पांचों शिवलिंग को अरब समुद्र के किनारे स्थापित किया। पांडवों ने शिवलिंग की निरंतर पूजा-अर्चना की। भक्ति भाव में लीन पांचों भाइयों को देखखर शिवजी प्रसन्न हुए। महादेव ने प्रसन्न होकर पांडवों को पापों से मुक्ति दिलाई। इस तरह से पांडवों सहित गांववासियों ने सच्ची श्रद्धा से स्थापित शिवलिंग की आराधना शुरू कर दी। प्राचीन स्थान निष्कलंक महादेव के नाम से जाना गया।

nishkalank mahadev

समुद्र की लहरों के बीच स्थित है पांचों शिवलिंग:

इस शिवलिंग की विशेषता है कि ये 24 घंटों में से 12 घंटे समुद्र की लहरों में डूबा रहता है। पवित्र स्थान को दूर से देखने पर स्वर्ग जैसी अनुभूति मिलती है। मानों धरती और आकाश का मिलन हो रहा हो ऐसा प्राकृतिक द्रश्य नजर आता है। निष्कलंक महादेव के शिखर पर 52 गज की ध्वजा लहराती है। जब-जब समुद्र में हाई टाइड आती है उससे शिवलिंग का जलाभिषेक होता है। अर्थात निष्कलंक महादेव का समुद्र देव स्वयं जलाभिषेक करते हैं।

Nishkalank Mahadev Bhavnagar

महादेव के शिखर पर 52 गज की लहराती है ध्वजा:

ज्वारभाटा के समय भी ध्वजा निरंतर लहराती नजर आती है। ध्वजा के दर्शन का एक अलग ही महत्व है भक्तजन ध्वजा के दर्शन के लिए दूर क्षेत्रों से आते रहते हैं। पांडवों के पाप दूर करने वाले भोलेनाथ, शरण में आने वाले सभी भक्तों की समस्याएं दूर करते हैं। पवित्र स्थान पर श्रावण और भादो महीने की अमावस के दिन बड़े मेले का आयोजन होता है। बड़ी संख्या में लोग मेले का हिस्सा बनते हैं। शिवरात्रि के समय निष्कलंक महादेव मंदिर में एक अलग ही माहौल देखने को मिलता है। सभी भक्तजन अपने परिवार के साथ भोलेनाथ की शरण में आते हैं।

गुजरात के अलावा देश के कोने-कोने से आते है भक्त:

गुजरात के अलग अलग हिस्सों भावनगर, सौराष्ट्र, अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, जामनगर से लोग दर्शन करने आते हैं। गुजरात के अलावा देश के कोने-कोने से भक्त निष्कलंक महादेव के दर्शन करने अवश्य आते हैं। आने वाले सभी श्रद्धालुओं को निष्कलंक महादेव से अटूट श्रद्धा भक्ति है। भक्तों का ऐसा मानना है पवित्र स्थान पर एक बार आकर माहदेव के दर्शन करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। आप भी गुजरात में हैं तो निष्कलंक महादेव के दर्शन करने अवश्य जाएं।

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