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बच्चों को पढ़ाने के लिए पेरेंट्स इन बातों का ध्यान अवश्य रखें!

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(Parenting) शिक्षा का सदियों से महत्व है, वर्तमान युग में भी बालकों को शिक्षा दिलाना अनिवार्य है। साथ ही बालकों और उनकी क्षमता के अनुसार उन्हें अच्छे से अच्छा शिक्षण देना चाहिए। आइए जानते हैं बालकों को कहां पढ़ाएं, कैसे और किस तरह से पढ़ाना चाहिए? ये सवाल सभी पेरेंट्स के दिमाग में उत्पन्न होते रहते हैं किन्तु अधिकतर माता-पिता इन प्रश्नों में असमंजस रहते हैं या फिर उन्हें जवाब नहीं मिल पाता।

यदि इस निर्णय पर किसी भी तरह की भूल होती है तो बालकों के भविष्य का सवाल रहता है। मतलब भविष्य बिगड़ सकता है या फिर कुसंग के मार्ग पर चलकर अपना भविष्य खराब कर लेते हैं। 

पेरेंट्स के निर्णय पर आधारित है बालकों का भविष्य (Good Parenting)

माता-पिता के पास पर्याप्त समय का अभाव रहता है अपने बच्चों को सही ढंग से समय नहीं दे पाते हैं और कई पेरेंट्स ऐसे भी है जी स्वयं कम शिक्षित होते हैं और बच्चों की शिक्षा के निर्णय लेने में खुद को सक्षम नहीं समझते हैं। 

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authoritative parenting Image Credit: GOogle Image

  • माता-पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे स्कूल अथवा ट्यूशन जाने के बाद सही ढंग से पढ़ाई कर रहे हैं या नहीं
  • बच्चों को पढ़ाई में आ रही मुश्किलों को सच होने के बावजूद माता-पिता उन पर ध्यान नहीं देते 
  • पर्याप्त समय के अभाव के कारण, उनकी लापरवाही या बच्चे को छोटा समझकर नजर अंदाज कर देते हैं
  • ज्यादातर माता-पिता यह भी मानते हैं कि स्कूल की फीस जमा की है अब जिम्मेदारी स्कूल वालों की है
  • पेरेंट्स यह मान लेते है अब आगे की का ध्यान स्कूल और शिक्षक रखेंगे
  • लेकिन ऐसी भूल नहीं करनी चाहिए, यदि बालक को पूछा न जाए तो उसे लगने लगता है कि मेरी तो किसी को परवाह ही नहीं है।  

यहां पढ़ें: बालक के मानसिक विकास के लिए इन बातों का अवश्य रखें ध्यान!

पेरेंट्स को समय पर शिक्षकों से मिलते रहना चाहिए:- (Child’s healthy development)

  • माता-पिता को बच्चों के स्कूल जाकर उनके अभिभावक से मिलने जाते रहना चाहिए
  • पेरेंट्स बच्चों की इच्छा के जाने बिना उन पर अपने निर्णय थोप देते हैं 
  • इस तरह से बच्चों का आत्मविस्वास टूट जाता है किसी काम को करने की चाह नहीं रहती है 
  • इन कारणों से कला कौशल का सही से विकास नहीं हो पाता है जिसमें रुचि नहीं है उसे मजबूरन प्रवृति करनी पड़ती है 
  • माता-पिता को बालकों की रुचि, शौक, कौशल्य और क्षमतानुसार पढ़ाई संबंधित निर्णय लेने चाहिए। 

माता-पिता को बच्चों से अधिक अपेक्षा न रखकर उन्हें प्रोत्साहन और प्रेम देते रहना चाहिए। उनकी कौशल्य और रुचि के आधार पर उन्हें आगे बढ़ने में मदद करना चाहिए। 

देखें यह वीडियो: ‘Dangerous Chemical in Toys’

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