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जाखू मंदिर: देश-विदेश से लोग करने आते हैं दर्शन

Jhakhu mandir
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जाखू मंदिर: भारत के मनपसंद प्रवासीय स्थानों में से एक ऐसा राज्य है हिमाचल प्रदेश, वहीं हिमाचल की राजधानी शिमला में जाखू मंदिर स्थित है। मंदिर को लेकर कई सारी पौराणिक गाथाएं हैं, और लोगों में जाखू मंदिर के लिए सच्ची श्रद्धा है। मंदिर के दर्शन के लिए पूरे विश्व भर से लोग दूर-दूर से आते हैं। यह (Jhaku Temple, Shimla)  मंदिर जाखू पहाड़ी पर समुद्र तल से 8048 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। इस पहाड़ी से  बर्फीली चोटियों, घाटियों और शिमला शहर का एक सुंदर और मनोरम दृश्य नजर आता है। भगवान हनुमान को समर्पित यह धार्मिक केंद्र ‘रिज’ के निकट स्थित है। पहाड़ी पर स्थित मंदिर के कारण पर्यटक  सूर्योदय और सूर्यास्त के लुभावने दृश्यों का आनंद लेते हैं। 

लाय सजीवन लखन जियाए, श्री रघुवीर हरषि उर लाये |

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई |

अर्थ: आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी को  जीवित किया, श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया। श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा कि तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो। 

यह विडिओ देखें:  हनुमान मंत्र: मनोजवं मारुततुल्यवेगं

-Jakhu-Temple- Shimla

जाखू मंदिर समुद्र ताल से 8,054 फीट की ऊंचाई पर स्थित है  Image credit: 40kmph.com

जाखू पर्वत से जुड़ी मान्यताएं: हनुमान जी के पद चिन्हों को संगमरमर से बनवा कर रखा गया 

मान्यता है कि राम-रावण युद्ध के दौरान, लक्ष्मण जी के मूर्छित हो जाने पर संजीवनी बूटी लेने के लिए हिमालय की ओर आकाश मार्ग से जाते हुए हनुमान जी की नज़र यहां तपस्या कर रहे यक्ष ऋषि पर पड़ी। बाद में इसका नाम यक्ष ऋषि के नाम पर ही यक्ष से याक, याक से याकू, याकू से जाखू तक बदलता गया| हनुमान जी यहां विश्राम करने और संजीवनी बूटी का परिचय प्राप्त करने के लिए जाखू पर्वत के जिस स्थान पर उतरे, वहां आज भी उनके पद चिन्हों को संगमरमर (Sangmarmar) से बनवा कर रखा गया है|

शिमला के जाखू में स्थित ये हनुमान मंदिर एक विश्व प्रसिद्ध मंदिर है जहां देश-विदेश से लोग दर्शन करने आते हैं|

यक्ष ऋषि से संजीवनी बूटी का परिचय लेने के बाद हनुमान जी (Lord Hanuman) ने यक्ष ऋषि को वापस मिलकर जाने का वचन देकर द्रोणगिरी पर्वत की ओर चल पड़े | मार्ग में कालनेमि नामक राक्षस के कुचक्र में फंसने के कारण समय के आभाव में हनुमान जी छोटे मार्ग से अयोध्या होते हुए निकल गए | जब वो वापस नहीं लौटे तो यक्ष ऋषि व्याकुल हो गए| तब हनुमान जी ने उन्हें दर्शन दिया, उसके बाद इस स्थान पर हनुमान जी की स्वयंभू मूर्ति प्रकट हुयी जिसे लेकर यक्ष ऋषि ने यहीं पर हनुमान जी का मंदिर बनवाया | आज ये मूर्ति मंदिर में स्थापित है| 

यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि उन्हें यहां आकर सुकून मिलता है और उनकी मुरादें भी पूरी होती हैं | यहां जो लोग भी सच्चे मन से आते हैं उन्हें हनुमान जी कभी खाली हाथ नहीं भेजते | जाखू मंदिर के प्रांगण में ही अब हनुमान जी की 108 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा भी स्थापित की गयी है जिसे आप शिमला में कहीं से भी देख सकते हैं | इस मूर्ति (Statue) के सामने आस-पास लगे बड़े-बड़े पेड़ भी बौने लगते हैं | अगर आप शिमला घूमने के लिए आते हैं तो जाखू मंदिर के दर्शन के बिना आपकी यात्रा अधूरी रहेगी | वैसे तो जाखू मंदिर की तिथि ज्ञात नहीं है परन्तु इसको रामायण काल के समय का बताया जाता है |

इस मंत्र से पाएं  मन की शांति  || हनुमान बाण मंत्र || 

जाखू मंदिर समुद्र ताल से 8,054 फीट की ऊंचाई पर स्थित है 

हनुमान जी की 108 फीट ऊंची विशाल प्रतिमा भी स्थापित की गयी है Image Credit: twitter

जाखू मंदिर के दर्शन पूरी तरह निःशुल्क हैं | जाखू मंदिर के दर्शन सुबह 5 बजे से दिन 12 बजे तक और फिर शाम को 4 बजे से रात के 9 बजे तक होते हैं | जाखू मंदिर के दर्शन करने के लिए आपको लगभग एक से दो घंटा लग सकते हैं | 

हिमालय के खूबसूरत दृश्यों के साथ ब्रिटिश युग की वास्तुकला को पहाड़ी के नीचे से ऊपर तक रोपवे केबल कार द्वारा अच्छी तरह से देखा जा सकता है | शानदार गोंडोला की सवारी समुद्र ताल से 8,054 फीट की ऊंचाई पर ले जाती है जिसमे सिर्फ 5 से 6 मिनट लगते हैं | रोपवे यात्रा के दौरान आस-पास के दृश्य अपनी सुन्दरता से आपको हैरान कर देते हैं | जाखू मंदिर के लिए रोपवे की सवारी सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक है | यहां घूमने के लिए सितम्बर से लेकर जनवरी तक सर्दियों के महीने सुखद और शांत होते हैं | कभी-कभी यहां के बंदरों से निपटना काफी मुश्किल हो जाता है, यहां के बन्दर सामान छीनने के लिए काफी प्रसिद्ध हैं, इसलिए बंदरों से सावधान रहें और उनके सामने खाने की कोई भी चीज अपने हाथ में ना लें | बंदरों को दूर रखने के लिए अपने हाथ में छड़ी लेकर चलें, यहां के बन्दर लोगों द्वारा दिए गए खाने को उदारता पूर्वक स्वीकार करते हैं | मंदिर परिसर से बाहर निकलने से पहले घंटी बजाना अच्छा माना जाता है |

यहाँ पढ़ें:  हनुमान जी के संदर्भ में समर्थ रामदास स्वामी कहते हैं, ‘हनुमानजी हमारे देवता हैं

विद्यावान गुनी अति चातुर, रामकाज करिबे को आतुर |

दुर्गम काज जगत के जेते , सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते |

अर्थ– आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम के काज करने के लिए आतुर रहते है। संसार में जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।

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