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Homeन्यूजडॉक्टरों ने किया चमत्कार! इंसान में लगाया सुअर का दिल, मरीज हुआ बिल्कुल ठीक

डॉक्टरों ने किया चमत्कार! इंसान में लगाया सुअर का दिल, मरीज हुआ बिल्कुल ठीक

pig heart transplant
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Pig Heart Transplant: दुनियाभर में डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है। अमेरिका के वाशिंगटन में डॉक्टरों की एक टीम ने इसे फिर साबित किया है। अमेरिका के डॉक्टरों ने इतिहास में पहली बार एक ऐसी सर्जरी की है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है। और आने वाले समय में उनकी यह सर्जरी दुनियाभर के दिल के रोगियों के लिए वरदान साबित होगी। अमेरिका में मैरीलैंड के रहने वाले 57 वर्षीय एक व्यक्ति की सर्जरी करके उसके सुअर का दिल लगाया गया है। सुअर का जेनेटिकली मोडिफाइड (Pig Heart Transplant) दिल इंसान को लगाकर मेडिकल की दुनिया में एक नया आयाम स्थापित किया है।

दुनिया में पहली बार ऐसी सर्जरी:

बता दें इससे पहले कभी ऐसी सर्जरी ना तो हुई है ना कभी ऐसा सुनने को मिला था। लेकिन अमेरिका के डॉक्टरों ने चमत्कार करते हुए ऐसा कारनामा कर दिखाया है। सुअर का जेनेटिकली मोडिफाइड दिल प्रत्यारोप होने के बाद मरीज की हालत पिछले तीन दिन से बिल्कुल सामान्य बताई जा रही है। सुअर के दिल में आनुवांशिक बदलाव करके मरीज के ट्रांसप्लांट किया गया है। अगर वाकई यह सर्जरी कामयाब होती है तो आने वाले दिनों में दिल के रोगियों के काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।

सुअर के दिल में किया गया आनुवांशिक बदलाव:

बता दें डॉक्टरों की टीम ने जब पाया कि मरीज को पारंपरिक हृदय प्रत्यारोपण या कृत्रिम हृदय पंप का सहारा नहीं दिया जा सकता है। फिर डॉक्टरों ने सुअर के दिल से तीन ऐसे जीन बाहर निकाल दिए, जिनकी कारण से मानव प्रतिरक्षा प्रणाली सुअर के अंगों को स्वीकार नहीं करती है। यहीं नहीं इसके बाद उन्होंने उस दिल में छह जीन अलग से डाले भी गए थे। सुअर के दिल में यह आनुवांशिक बदलाव करके फिर मरीज के हृदय ट्रांसप्लांट किया गया है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड मेडिकल स्कूल ने बयान जारी कर बताया कि यह ऐतिहासिक ट्रांसप्लांट शुक्रवार को किया गया।

डॉक्टरों की निगरानी में रहेगा मरीज:

डेविड बेनेट नाम के मरीज में हृदय ट्रांसप्लांट किया गया है। डॉक्टर अब बेनेट की कई दिनों से लेकर हफ्तों तक निगरानी करेंगे, ताकि यह देखा जा सके कि ट्रांसप्लांट सही से काम कर रहा है या नहीं। बेनेट इसे चमत्कार से कम नहीं मान रहे है। उन्होंने कहा कि ”’मेरे पास दो ही विकल्प थे, या तो मरूं या फिर यह ट्रांसप्लांट करवाऊं। मैं जीना चाहता हूं। मैं जानता हूं कि यह अंधेरे में तीर चलाने जैसा था, लेकिन अब बिस्तर से बाहर निकलने के लिए काफी उत्सुक हूं।’

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