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Homeन्यूजप्रधानमंत्री ने किया पार्वती माता मंदिर का शिलान्यास, सोमनाथ मंदिर को मिली सौगात

प्रधानमंत्री ने किया पार्वती माता मंदिर का शिलान्यास, सोमनाथ मंदिर को मिली सौगात

Somnath Mandir
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर (Somnath Temple) में कई नए प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत सोमनाथ प्रदर्शन गैलरी, समुद्र दर्शन पथ और मंदिर से जुड़े अन्य प्रोजेक्ट शामिल हैं। इस कार्यक्रम के दौरान PM Modi ने पार्वती मंदिर का शिलान्यास भी किया। माता के मंदिर का निर्माण 30 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। 

प्रधानमंत्री मोदी: “मैं लौह पुरुष सरदार पटेल जी के चरणों में भी नमन करता हूं जिन्होंने भारत के प्राचीन गौरव को पुनर्जीवित करने की इच्छाशक्ति दिखाई। सरदार साहब, सोमनाथ मंदिर को स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र भावना से जुड़ा हुआ मानते थे”। 

सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण का सौभाग्य मिला: पीएम मोदी

समुद्र दर्शन पथ, सोमनाथ प्रदर्शन गैलरी और जीर्णोद्धार के बाद नए स्वरूप में जूना सोमनाथ मंदिर के लोकार्पण का सौभाग्य मिला है। साथ ही आज पार्वती माता मंदिर का शिलान्यास भी हुआ है। मैं लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को भी प्रणाम करता हूं जिन्होंने विश्वनाथ से लेकर सोमनाथ तक, कितने ही मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया। प्राचीनता और आधुनिकता का जो संगम उनके जीवन में था, आज देश उसे अपना आदर्श मानकर आगे बढ़ रहा है।  (Prime Minister Narendra Modi)

मंदिर को सैकड़ों सालों के इतिहास में कितनी ही बार तोड़ा गया

इस मंदिर को सैकड़ों सालों के इतिहास में कितनी ही बार तोड़ा गया, यहां की मूर्तियों को खंडित किया गया, (Somnath Mandir History)इसका अस्तित्व मिटाने की हर कोशिश की गई। लेकिन इसे जितनी भी बार गिराया गया, ये उतनी ही बार उठ खड़ा हुआ। ये शिव ही हैं जो विनाश में भी विकास का बीज अंकुरित करते हैं, संहार में भी सृजन को जन्म देते हैं इसलिए शिव अविनाशी हैं, अव्यक्त हैं और अनादि हैं। 

Somnath

Somnath temple Image Credit: Google Image

पीएम मोदी ने कहा कि “शिव में हमारी आस्था हमें समय की सीमाओं से परे हमारे अस्तित्व का बोध कराती है, हमें समय की चुनौतियों से जूझने की शक्ति देती है। जो तोड़ने वाली शक्तियां हैं, जो आतंक के बलबूते साम्राज्य खड़ा करने वाली सोच है, वो किसी कालखंड में कुछ समय के लिए भले हावी हो जाएं लेकिन, उसका अस्तित्व कभी स्थाई नहीं होता, वो ज्यादा दिनों तक मानवता को दबाकर नहीं रख सकतीं”। 

सोच होनी चाहिए इतिहास से सीखकर वर्तमान को सुधारने की:- 

हमारी सोच होनी चाहिए इतिहास से सीखकर वर्तमान को सुधारने की, एक नया भविष्य बनाने की। इसलिए, जब मैं ‘भारत जोड़ो आंदोलन’ की बात करता हूं तो उसका भाव केवल भौगोलिक या वैचारिक जुड़ाव तक सीमित नहीं है। ये भविष्य के भारत के निर्माण के लिए हमें हमारे अतीत से जोड़ने का भी संकल्प है। (Somnath)

 पश्चिम में सोमनाथ और नागेश्वर से लेकर पूरब में बैद्यनाथ तक, उत्तर में बाबा केदारनाथ से लेकर दक्षिण में भारत के अंतिम छोर पर विराजमान श्री रामेश्वर तक, ये 12 ज्योतिर्लिंग पूरे भारत को आपस में पिरोने का काम करते हैं। 

Somnath Temple

Somnath Temple Gujarat, Image Credit: Google Image 

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना:-

हमारे चार धामों की व्यवस्था, हमारे शक्तिपीठों की संकल्पना, हमारे अलग अलग कोनों में अलग-अलग तीर्थों की स्थापना, हमारी आस्था की ये रूपरेखा वास्तव में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना की ही अभिव्यक्ति है। 

ऐसा स्थल है जिसे हजारों साल पहले हमारे ऋषियों ने ज्ञान का क्षेत्र बताया था। जो आज भी पूरे विश्व के सामने आह्वान कर रहा है कि सत्य को असत्य से हराया नहीं जा सकता, आस्था को आतंक से कुचला नहीं जा सकता।  

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