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Homeन्यूजकिसान महापंचायत को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार, कहा- किसान आंदोलन ने शहर का गला घोंट दिया है

किसान महापंचायत को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई कड़ी फटकार, कहा- किसान आंदोलन ने शहर का गला घोंट दिया है

Supreme Court
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देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने किसान महापंचायत (Kisan Mahapanchayat) को कड़ी फटकार लगाई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पहले हाइवे जाम किए और अब शहर के अंदर पहुंचकर क्या उत्पात मचाना चाहते हैं. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court )ने सरकार से भी सवाल पूछे हैं, जानकारी के मुताबिक अब इस मामले की सुनवाई सोमवार को होगी.

दरअसल किसान महापंचायत की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर अनुमति की याचिका दायर की गई थी. अदालत से ये मांग की गई थी कि किसानों को जंतर-मंतर पर उन्हें सत्याग्रह की अनुमति दी जाए. जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले आपको ये एफिडेविट देना होगा कि जो लोग किसान आंदोलन के नाम पर एनएच जाम कर रहे हैं, आप वो नहीं हैं.

किसान आंदोलन ने शहर का गला घोंट दिया है: SC

अदालत (Supreme Court ) ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसानों ने शहर का गला घोंट दिया है, अब वह शहर में दाखिल होना चाहते हैं. बता दें कि प्रदर्शन की वजह से लोगों का काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. अभी बीते महीने भारत बंद के दौरान भी आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी पूछा कि क्या शहर में प्रदर्शन से लोग खुश होंगे.

Farmers Protest

Image Courtesy: Google.com

सड़कों पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता 

वहीं सुप्रीम कोर्ट ( Supreme Court) ने केन्द्र सरकार से पूछा कि दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन के दौरान बंद की गई सड़क को खुलवाने के लिए आपने क्या किया. सड़क पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता. वहीं किसानों का कहना है कि बैरिकेडिंग पुलिस की ओर से की गई है, किसानों ने कुछ भी नहीं किया है.

ये भी पढ़ें: Bharat Bandh 2021: किसानों का भारत बंद कल, जानें क्या है बंद का समय, किस-किस ने दिया समर्थन

27 सितंबर को किसानों ने किया था भारत बंद 

गौरतलब है कि किसान आंदोलन के 10 महीने पूरे होने पर किसानों ने 27 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया था. जिसका अलग-अलग राज्यों में मिलाजुला असर देखने को मिला था. वहीं अभी भी दिल्ली की टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर सैकड़ों की संख्या में किसान डटे हुए हैं. किसानों का कहना है कि जब तक कृषि कानूनों की वापसी नहीं होती घर वापसी नहीं होगी.

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