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अडानी अंतरिक्ष में लगाएंगे छलांग, PSLV निर्माण के लिए लगाई बोली

PSLV Privatization
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पूरे देश में इन दिनों निजीकरण (Privatization) बढ़ता ही जा रहा है. अब सरकारी बैंक, बीमा कंपनियां भी निजी आधार पर अंतरिक्ष से जुड़ी सेवाओं के लिए भी ठेके मांग रही हैं, देश की सार्वजनिक संपत्तियों से ये ऑर्डर लेकर निजी कंपनियों को सौंप रही हैं. इसी सूची में शामिल होने वाला एक और नाम पीएसएलवी मिसाइल (PSLV Privatization) है.

पीएसएलवी निजीकरण
भारतीय इतिहास में पहली बार, भारत भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बाहर निजी कंपनियों द्वारा अंतरिक्ष प्रक्षेपण वाहनों का प्रक्षेपण देखेगा. कहा जा रहा है कि निजी कंपनियां अब भारत में पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) का निर्माण कर सकेंगी.

भारत सरकार अब इसरो से बाहर के किसी व्यक्ति/कंपनी को उपग्रह प्रक्षेपण यान बनाने का ठेका दे रही है. अडानी समूह और लार्सन एंड टर्बो (एलएंडटी) भी पीएसएलवी के निजीकरण की दौड़ में हैं. इसके अलावा कुछ और भी संस्थाएं हैं जो इस डील को हासिल करने के लिए सट्टा लगा रही हैं.

 

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एक प्रमुख समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, यह सौदा पांच प्रक्षेपण यान बनाने का होगा. न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) द्वारा 30 जुलाई को जारी आरएफपी के जवाब में, तीन संगठनों ने पीएसएलवी के निजीकरण के लिए अपनी बोली लगाई.

एनएसआईएल ने 5 पीएसएलवी के लिए बोलियां आमंत्रित की
NSIL को शुरू में ISRO का कार्यकारी निकाय माना जाता था. हालांकि बाद में इसे लॉन्च वाहनों, उपग्रहों और अन्य मालिकाना उत्पादों के उत्पादन के लिए आवश्यक बना दिया गया. एनएसआईएल ने पांच पीएसएलवी के लिए रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) की घोषणा की, जिसमें कई इकाइयों ने रुचि दिखाई. हालांकि अंत में 3 संगठनों ने कुछ सप्ताह पहले ही बोलियां जमा की हैं.

एनएसआईएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक राधाकृष्णन डीए ने कहा कि इन (पीएसएलवी निजीकरण) बोलियों का प्रौद्योगिकी-वाणिज्यिक मूल्यांकन चल रहा है, जिसके बाद बोलियां खोली जाएंगी. कुछ महीनों में प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है. एक सूत्र ने कहा कि यह सौदा इस साल के अंत तक हो सकता है. चयनित निर्माता एक लाइसेंस प्राप्त निर्माता होगा.

BHEL भी कतार में
उल्लेखनीय है कि भारतीय दिग्गज मैकेनिकल कंस्ट्रक्शन कंपनी और सार्वजनिक उपक्रम BHEL भी इस ठेके को पाने के लिए कतार में हैं.
दिलचस्प बात यह है कि तीन संगठनों में से एक एचएएल और एलएंडटी का एक संघ है, दूसरा अडानी-अल्फा डिजाइन, बीईएल और बीईएमएल है, जबकि तीसरे बोलीदाता के रूप में भेल ने एक तरफ यानी व्यक्तिगत आधार पर बोली लगाई है.

अंतरिक्ष विभाग का मानना है कि यह बोली मेक-इन-इंडिया पहल को गति देगी. साथ ही इससे इसरो की क्षमता में भी इजाफा होगा. इस तरह की रणनीति से इसरो हर साल ज्यादा से ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च कर सकेगा.

 

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