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Homeनेचर एंड वाइल्ड लाइफजानिए क्या है जयसुख भाई पटेल का ‘रण सरोवर प्रोजेक्ट’, जिससे गुजरात समेत पूरे देश को ऐसे होगा फायदा

जानिए क्या है जयसुख भाई पटेल का ‘रण सरोवर प्रोजेक्ट’, जिससे गुजरात समेत पूरे देश को ऐसे होगा फायदा

rann sarovar
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Rann Sarovar: लिटिल रण ऑफ कच्छ गुजरात में मौजूद ये वो जगह है, जिसकी खूबसूरती को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. वैसे तो भारत में घूमने के लिए कई टूरिस्ट प्लेस हैं लेकिन Little Rann Of Kutch की बात ही कुछ अलग है. ये भारत में  मौजूद एक ऐसी जगह है जहां पर जाकर ऐसा लगता है कि मानों जैसे धरती और आसमान का मिलन हो रहा हो.यहां जीप की सवारी करना, वाइल्ड एज सेन्चुरी और विदेशी पक्षी फ्लेमिंगो को देखना बहुत ही अद्भुत अहसास देता है. लिटिल रन ऑफ कच्छ की खूबसूरती के बारे में कहने और बताने को तो बहुत कुछ है.

लेकिन आइये जानते हैं रण ऑफ कच्छ की उस खासियत के बारे में जिसकी वजह से Ajanta Oreva Group के मालिक और गुजरात के समाज सेवी जय सुख भाई पटेल ने इसे रन सरोवर में बदलने का एक बेहतरीन प्रोजेक्ट तैयार किया है.

1. सवाल क्या है Rann Sarovar ?

      JAY SUKH BHAI- गुजरात में है दो रण

  • लिटिल रण ऑफ कच्छ 5 हजार स्वेयर किलोमीटर का एरिया है. ये पूरी तरह से रेगिस्तान है जहां कोई मानव बस्ती नहीं है.
  • ये जगह समुद्र से 2 से 3 फुट की ऊंचाई पर है.
  • राजस्थान, नॉर्थ गुजरात और मध्य गुजरात और एमपी के कुछ हिस्सों का पानी यहां से होकर समुद्र में जाता है.
  • एशिया के सबसे बड़े मीठे पानी का सरोवर इस जगह पर बन सकते हैं.

2. सवाल आपको ये आइडिया कहां से आया?

इस बंजर जमीन को रण सरोवर में तब्दील करने का बेहतरीन आइडिया जयसुख भाई पटेल के दिमाग में कहां से आया आइए उन्हीं से जानते हैं.

JAYSUKH BHAI –इस जगह पर लगातार विजिट किया और इस पूरे प्रोसेस को समझा.

  • यहां पर इकट्ठा होने वाला पानी धीरे-धीरे समुद्र में चला जाता है और हरक्कियां क्रीक से आने वाला नमकीन पानी यहां पर इकट्ठे मीठे पानी के साथ मिलकर उसे भी खारा बना देता है.
  • धीरे-धीरे समुद्र में जाते-जाते ये पानी 50 किलोमीटर की जमीन को सॉल्टी बना देता है.
  • हरक्कियां क्रीक पर बनाया जाए डैम.

 3. सवाल- इस पूरे प्रोसेस को आगे बढ़ाने का क्या तरीका है.

‘रण सरोवर’ बनने से लाखों हेक्टेयर भूमि एक विशाल हरित पट्टी बन जाएगी और मीठे पानी का स्तर ऊंचा हो जाएगा. आइए जानते हैं अब जयसुख भाई पटेल से कि खारे पानी को मीठे पानी में बदलने के पूरे प्रोसेस को आगे बढ़ाने का उनके पास क्या तरीका है.

JAYSUKH BHAI – हरक्कियां क्रीक से आना वाला सी का वाटर जो रण ऑफ कच्छ में आ जाता है, कहीं ना कहीं अगर हम उसे रोक देते हैं तो जो मिठा पानी यहां जमा होगा वो यहां की साल्ट जमीन को 4-6 साल में मिठा कर देगा.  

  • टेक्निकली भी इस बात को पुख्ता किया गया है कि ये जो सॉल्ट वाटर है उसे कैसे मिठे पानी में बदला जाएगा.
  • सभी बातों को ध्यान में रखकर ये बात सामने आई है कि यहां जमा पानी तभी मिठा हो सकता है जब यहां खरा पानी को आने से रोका जा सके.

4 .सवाल- प्रोजेक्ट पर कौन-कौन से मंत्रालय कर रहे हैं काम और क्या आ रही हैं अड़चनें?

जय सुख भाई पटेल के इस प्रोजेक्ट की गुजरात और केंद्र सरकार ने भी सरहाना की है.

  •  JAYSUKH BHAI – 2006-07 में उस समय के गुजरात के सीएम और वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पसंद आया था ये प्रोजेक्ट.
  • साल 2014 में नरेंद्र मोदी सर के प्रधानमंत्री बनने पर प्रोजेक्ट के सिलसिले में फिर मुलाकात की और उन्होंने कहा हम ये प्रोजेक्ट कर सकते हैं.
  • केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भी प्रोजेक्ट के लिए की मुलाकात.
  • पानी की फील्ड के एक्सपर्ट्स को भी पसंद आया प्रोजेक्ट.
  • गुजरात सरकार इस प्रोजेक्ट टेक्निकली, फिजिबिलिटी, इकोनोमिकली पर कमेटी बनाई हुई है जो इस पर काम कर रही है.

5 . सवाल- प्रोजेक्ट से अगरिया लोगों की जिंदगी में कैसे होगा सुधार?

 लिटिल रण ऑफ कच्छ में काम रहे 40 हजार अगरिया मजदूर विषम परिस्थितयों में बुनियादी सुविधाओं के बिना अपना जीवन बिताने को मजबूर हैं. जयसुख भाई पटेल का ये प्रोजेक्ट इन अगरिया मजदूरों की जिंदगी को सुधारने में कैसे कारगार साबित होगा आइए जानते हैं.

 JAYSUKH BHAI – गुजरात नमक की खेती करने वाले अगरिया सबसे पिछड़े हुए हैं.

  • नमक की खेती करने वाले लोगों की इनकम प्रतिदिन 100 रुपए से भी कम है.
  • 50 साल से बुनियादी सुविधाओं के बिना अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं नमक की खेती करने वाले मजदूर.
  • इस प्रोजेक्ट को अप्रूवल मिलने के बाद अगरिया लोगों की स्थितियों में होगा सुधार.
  • अगरिया लोगों के लिए आजीविका कमाने के खुलेंगे कई ऑप्शन.
  • रन सरोवर बनने से मत्स्य उद्योग भी बनेगा आजीविक का साधन.
  • रन सरोवर बनने से अगरिया की प्रतिदिन की आय 600-700 रुपए हो जाएगी.

इसे भी पढ़े: वन्यजीव सप्ताह विशेष- सिंह और गिर को समर्पित एक शख़्सियत– परिमल नथवाणी

6 . रण सरोवर बनने के बाद जंगली गधो के अभियारण( wild ass century) में कैसे बदलाव आएगा.

आइए जयसुख भाई पटेल जानते हैं कि क्या इस प्रोजेक्ट के आने के बाद wild Ass Century किस तरह से सुरक्षित रहेगी.

  • JAYSUKH BHAI –पूरे एशिया में केवल रण ऑफ लिटिल कच्छ में ही पाए जाते हैं जंगली गधे
  • रन सरोवर बनने से सुधरेंगी जंगली गंधों की जिंदगियां
  • 15 साल पहले केवल 500- 600 जंगली गधे लिटिल रण ऑफ कच्छ में पाए जाते थे, लेकिन अब इनकी संख्या करीब 5000- 6000 के करीब पहुंच चुकी है.
  • बारिश के समय कच्छ में बनें आइलैंड बनते हैं जगली गधों का सहारा.
  • लेकिन जब नवंबर दिसबंर का समय आता है तो इनके पास खाने और पीने के लिए कुछ नहीं बचता, फिर ये जानवर गांवों की ओर जाने को मजबूर हो जाते हैं जिससे वहां रह रहे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
  • रन सरोवर बनने से जंगली गधों के लिए जो आइलैंड बनेंगे वहां उनके खाने- पीने सुविधाएं मौजूद रह सकती हैं.
  1. सवाल- रण सरोवर बनने से यहां आने वाला विदेशी पक्षी फ्लेमिंगों बंद हो जाएगा, इसमें कितनी हकीकत है?

 रण सरोवर बना तो क्या फ्लेमिंगो का आना जारी रहेगा. आइए जानते हैं इस पर क्या कहते हैं जयसुख भाई पटेल. 

  •  JAYSUKH BHAI –विदेशी पक्षी फ्लेमिंगो यहां पानी में आता है.
  • जो पानी यहां नवंबर- दिसबंर में डेवलप होता है उस पानी में पैदा होने वाली मछलियों को खाने के लिए ये पक्षी यहां आता है.
  • अगर सिर्फ कुछ महीने पानी रहने से इतने ज्यादा फ्लेमिंगो यहां आते हैं तो अगर यहां 12 महीने पानी रहेगा तो इनकी संख्या में ओर इजाफा होगा.
  • रण सरोवर बनने के बाद गुजरात का रण ऑफ कच्छ बनेगा सबसे बड़ा Bride Sanctuary. 

8 . सवाल- इस आइडिया को परखने के लिए और इसकी क्षमता को जानने के लिए आप कहां- कहां गए हैं किस- किस से आपने मदद ली है. और कौन कौन सी कंपनियां इसमें शामिल हैं?

जय सुख भाई पटेल वो शख्सियत हैं जो निस्वार्थ भाव से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. जय सुख भाई पटेल को ये जज्बा उनके पिता से मिला. जब गुजरात पानी की समस्या से गुजर रहा था तब जयसुख भाई के पिता ने गांव- गांव ट्रेन के माध्यम से लोगों तक पानी पहुंचाने का काम किया. आज अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए जय भाई पटेल भी उसी राह पर निकल पड़े हैं.

JAYSUKH BHAI –देखिए मैं( jaysukh bhai patel) एक बिजनेसमैन हूं, मैं अपने फादर की कंपनी को रन कर रहा हूं.

  • एक बिजनेसमैन होने के नाते मैंने इस प्रोजेक्ट को कई तरीकों से सोचा है,
  • लगभग 50 साल से मैं अपने फेमिली बिजनेस को आगे बढ़ा रहा हूं.
  • लेकिन इस प्रोजेक्ट को लेकर मैंने कई बड़े लोगों से मुलाकात की है. जिन लोगों को पानी की समझ है और जो लोग आने वाले समय में इस प्रोजेक्ट को गुजरात के लिए एक बड़ी सफलता के रुप में देख रहे हैं. इन लोगों में केपी लेहरी, सोमनाथ ट्रस्ट के अंदर मैनेजिंग ट्रस्टी- जय प्रकाश नारायण, नरमावाला – कल्प सरोवर जो इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं ये प्रोजेक्ट रन सरोवर की तरह ही है.
  • टेक्निकली सरकार को कन्वेंस करने के लिए कई बाहर की कंपनियों का सहारा लिया. लंबी रिसर्च की ताकि जब ये प्रोजेक्ट सरकार के सामने जाए तो कोई भी कमी ना सामने आए.
  • पानी के क्षेत्र में काम करने वाली बड़ी कपंनी को एक बड़ा अमाउंट देकर यहां लगाया गया और उन्हें इस प्रोजेक्ट के बारे में बताया गया तभी आज इस प्रोजेक्ट को सरकार के सामने रखा गया है.

9 . सवाल- आने वाले समय में गुजरात या केंद्र सरकार प्रोजेक्ट को पास कर देती है तो यहां का खारा पानी मीठा होने में कितना समय लगेगा ?

 रन ऑफ कच्छ को रन सरोवर में बदलने में भले ही थोड़ा समय लगे लेकिन जय सुख भाई पटेल का कहना है इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में कोई भी चैलेंज नहीं है, उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए कौन कौन से देशों का रुख किया. आइये जानते है.

JAYSUKH BHAI- प्रोजेक्ट के अंदर टेक्निकली कोई फाल्ट या चैलेंज नहीं है.

  • सूरजबारी पुल को डैम में बदलने से मिलेगा फायदा.
  • नेदरलैंड, साउथ कोरिया, अफ्रीका में इस तरीके के प्रोजेक्ट पहले से बनें हुए हैं.
  • 3-4 साल के अंदर यहां मौजूद साल्ट वाटर मिठे पानी में तब्दील हो जाएगा.
  • तभी इस पानी को खाने के लिए और पीने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं.  

10. सवाल-  ऐसे 10 मुद्दे बताएं जिसके कारण आपको लगता है कि लिटिल रन ऑफ कच्छ को रन सरोवर में बदलने के लिए सरकार तैयार हो सकती है, या उसे होना चाहिए.

रन ऑफ लिटिल कच्छ के रन सरोवर से गजरात एक ऐसा राज्य बन सकता है जो ना सिर्फ गुजरात में पानी की परेशानी को बल्कि राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों तक भी पानी पहुंचा सकता है. वैसे तो कई मुद्दे हैं जिसको ध्यान में रखकर सरकार लिटिल रन ऑफ कच्छ को रन सरोवर में बदल सकती है. लेकिन आइये जानते हैं जय सुख भाई पटेल से ही जिन्होंने वो जरुरी मुद्दे बताए जिसके तहत इस प्रोजेक्ट को सरकार का अप्रोवल मिलना चाहिए.

 JAYSUKH BHAI- गुजरात के पास पानी स्टोर करने की क्षमता नहीं है. लेकिन हमारे पास नेचुरली कुदरत की दी हुई ऐसी चीज है जहां खुद से पानी 2-3 महीने के लिए इकट्ठा हो सकता है लेकिन उसका यूज सही तरीके से नहीं हो रहा है. इसलिए Little run of kutch को रन सरोवर में बदलने का काम किया जा रहा है. ताकि 12 महीने यहां पानी को स्टोर किया जा सके. और गुजरात के जिन भी इलाकों में पानी की समस्या है उसे दूर किया जा सके.

  • एग्रीकल्चर को मिलेगा पानी, इससे फायदा ये होगा कि यहां 7 District और 11 तालुका के अंदर 1 मिलियन से ज्यादा लोगों को पीने का पानी मिल सकता है और 5 मिलियन लोगों को कृषि के लिए पानी की सहायता मिल सकती है.
  • Water Sports Activity आने से टूरिज्म को काफी बढ़ावा मिलेगा.
  • इंडिया का एक मात्रा ऐसा इलाका जहां तापमान में बदलाव का बड़ा फर्क देखा जाता है. तापमान के बदलने से दो फायदे हैं. 1. Natural solar energy 2. हवा की रफ्तार काफी तेज है जिससे solar energy develop होने में फायदा मिलेगा
  • गुजरात के किसी भी इलाके में इस जगह से पानी पहुंचाया जा सकता है. 
  • मिठे पानी से छिंगा मछली पाई जाएगी जिसकी कीमत 2000 किलो मिलती है. इससे यहां रहने वाले लोगों को एक जीवन यापन करने का सहारा मिलेगा और उनका रोजगार बनेगा.  
  • ऑलिव की खेती करने से मिलेगा फायदा, ऑलिव की खेती केवल ऐसी जगह की जाती है जहां तापमान में बदलाव देखा जाता है.इसकी खेती से लोगों की आय में 10 गुना बढ़ोतरी देखने को मिलेगी.  
  • नर्मदा नदी से ज्यादा पानी इस जगह स्टोर किया जा सकता है 

11.सवाल-  प्रोजेक्ट को लेकर क्या फीलिंग है?

 गुजरात का लिटिल रन ऑफ कच्छ रण सरोवर में बदल जाए इसको लेकर जयसुख भाई पटेल के पास तर्क और तथ्य की कोई कमी नहीं है इस प्रोजेक्ट को लेकर वो पीएम मोदी से लेकर गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्रालय संभालने वाले गजेंद्र सिंह शेखावत से भी मुलाकात कर चुके हैं तो आइये जानते हैं इस प्रोजेक्ट को लेकर क्या है जय सुख भाई पटेल की भावनाएं.

JAYSUKH BHAI- प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से मिली है सकारात्मक प्रतिक्रिया.

  • गृहमंत्री अमित शाह भी इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी सकारात्मक हैं.
  • गजेंद्र सिंह शेखावत से भी इस प्रोजेक्ट के सिलसिले में हुई है 3-4 बार मुलाकात.
  • आईआईटी रुड़की के डायरेक्टर और टेक्निकल टीम से भी मिला है अच्छा रिस्पॉन्स.
  • केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और रूपाला साहब से भी इस प्रोजेक्ट को लेकर मिला है सहयोग.
  • गृहमंत्री अमित शाह ने मनसुख मांडविया से प्रोजेक्ट में तेजी लाने की कही बात.

12. सवाल- सूरजबारी पुल के जरिए कैसे रोका जा सकता है खारा पानी?

सूरज बारी पुल कच्छ और सौराष्ट्र को जोड़ने वाला एकमात्र पुल है. माना जाता है कि ये पुल सौ साल पुराना है. क्षतिग्रस्त हालत में पड़े इस पुल का अब कोई इस्तेमाल नहीं है ऐसे में जयसुख भाई पटेल का मानना है कि अगर इस पुल की जगह पर डैम बना दिया जाए तो लिटिल रण ऑफ कच्छ में आने वाले खारे पानी को रोका जा सकता है.

 JAYSUKH BHAI- 50 साल पुराने पुल को डैम में बदलने से रोका जा सकता है खारा पानी

  • पुल को डैम में बदलने से दरिया में नहीं जाएगा मीठा पानी
  • 110 नदियां अपने साथ लेकर आती हैं मिट्टी जिसे हर साल 400 से 500 करोड़ की लागत से कंडला बंदरगाह से निकाला जाता है.
  • रण सरोवर बनने से नदियों के जरिए आने वाली मिट्टी इसी जगह पर बैठ जाएगी.

ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि रण सरोवर बनेगा या नहीं. लेकिन मानवता की दृष्टि से ये प्रोजेक्ट गुजरात के कच्छ और सौराष्ट्र के लोगों के लिए जीवनदान साबित हो सकता है. साथ ही अगरिया समुदाय के लिए भी रण सरोवर किसी वरदान से कम नहीं है. एक बंजर भूमि हरी-भरी जमीन बन जाए तो इससे विश्व फलक पर भारत का नाम एक बार फिर गौरव से लिया जाएगा.

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