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Homeभक्तिभगवान सूर्य की पूजा करने के बाद जरूर पढ़ें ये कथा, हर तरह के कष्ट से मिलेगी मुक्ति

भगवान सूर्य की पूजा करने के बाद जरूर पढ़ें ये कथा, हर तरह के कष्ट से मिलेगी मुक्ति

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Ravivar Vrat Katha: रविवार को भगवान सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है. इस दिन कई श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं और मंदिर जाकर या फिर घर पर ही भगवान सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करते हैं. भगवान सूर्य को दीर्घायु और स्वस्थ शरीर प्रदान करने वाला माना जाता है. कहते हैं कि जो भी भगवान सूर्य की सच्चे दिल से पूजा-अर्चना करता है उसे कभी भी स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी नहीं होती और सूर्यदेव(Suryadev) उसे लंबी आयु प्रदान करते हैं.

रविवार के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तालाब या नदी में स्नान कर भगवान सूर्यदेव की पूजा करने का विधान है. यूं तो स्नान करने के बाद कई लोग रोजाना भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देते हैं लेकिन रविवार के दिन भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है. रविवार का व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को स्नानादि से निवृत हो विधि-विधान से भगवान सूर्य की पूजा करनी चाहिए.

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Image Courtesy: Google.om

इस कथा के पढ़ने से पूरी होंगी सारी मनोकामनाएं

पूजा-अर्चना के बाद आपको भगवान सूर्य की ये कथा(Ravivar Vrat Katha) जरूर पढ़नी चाहिए, इस कथा के पढ़ने अथवा सुनने से हर तरह के कष्ट से मुक्ति मिलती है. पौराणिक कथा के मुताबिक प्राचीन काल में एक बुढ़िया बड़े ही विधि-विधान से रविवार का व्रत रखा करती थी. उस दिन वह पड़ोसन के घर से गाय का गोबर मांगकर लाती और उससे अपने आंगन को लीपकर स्वच्छ करती और फिर भगवान सूर्यदेव की विधि-विधान से पूजा किया करती थी. भगवान सूर्यदेव की कृपा बुढ़िया के घर सारी धन-संपदा बढ़ गई, उसके घर में सुख-समृद्धि का वास होने लगा.

बुढ़िया से ईर्ष्या करती थी पड़ोसन

ऐसा देखकर बुढ़िया से पड़ोसन ईर्ष्या करने लगी. एक दिन की बात जब रविवार का व्रत करने के लिए बुढ़िया को को गोबर की जरूरत थी तो पड़ोसन ने अपनी गाय आंगन में बांध दी ताकि उसे गोबर न मिले. बुढ़िया को उस दिन गोबर नहीं मिला तो वह सूर्यदेव की पूजा नहीं कर सकी और बगैर कुछ ग्रहण किए रात को सो गई. सुबह जब बुढ़िया ने उठकर देखा तो उसे आंगन में सुंदर गाय और बछड़ा दिखाई दिया, जिसे देखकर वह बेहद प्रसन्न हुई जबकि पड़ोसन और ईर्ष्या करने लगी.

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Image Courtesy: Google.om

राजा ने छीनी बुढ़िया से गाय

बुढ़िया अपनी गाय को रोजाना घर के बाहर बांध देती थी, वह गाय सोने का गोबर देती थी, जिसे पड़ोसन रोज उठा ले जाया करती थी. एक दिन सूर्यदेव ने पड़ोसन की चालाकी दूर करने के लिए इतनी तेज आंधी चलाई कि बुढ़िया को गाय घर में बांधनी पड़ी और दूसरे दिन जब उसने सोने का गोबर देखा तो बेहद प्रसन्न हुई. उधर पड़ोसन ने इस बात की शिकायत राजा से कर दी और राजा के सैनिक बुढ़िया और गाय को लेकर राजमहल चले गए.

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गाय छीनने के बाद बुढ़िया की दयनीय हालत

राजा ने बुढ़िया से गाय छीन ली तो उसकी हालत फिर से दयनीय हो गई. भगवान सूर्यदेव ने राजा को स्वप्न दिया कि अगर तुमने उसकी गाय वापस नहीं की तो समस्त राज्य को नष्ट कर दूंगा और तुम्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा. राजा ने स्वप्न देखकर सुबह बुढ़िया को बुलाकर गाय वापस कर दी, उसके पड़ोसन को दंड दिया और समस्त राज्य में ये घोषणा करवा दी कि आज सभी लोग भगवान सूर्यदेव का व्रत रखें. भगवान सूर्यदेव की कृपा से पूरे राज्य में खुशहाली छा गई और प्रजा धनवान हो गई. इस व्रत कथा(Ravivar Vrat Katha) को पढ़ने से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. 

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