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युवाओं के प्रेरणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद के ये अनमोल विचार आपकी जिंदगी को कर सकते हैं रोशन

swami vivekananda
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राष्ट्रीय युवा दिवस 2022(National Youth Day) उस महान आत्मा को याद करने का दिन है जिसने भारतीय संस्कृति और पारंपरिक जीवन शैली को पूरी दुनिया से परिचित कराया और देश को गौरवान्वित किया. भारत के महान दार्शनिक, युवाओं के लिए प्रेरणा और एक महान आध्यात्मिक व्यक्ति स्वामी विवेकानंद(Swami Vivekananda) के सम्मान में पूरे देश में 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है. स्वामी विवेकानंद हमेशा से युवाओं के प्रेरणास्त्रोत रहे हैं.

स्वामी विवेकानंद के अनमोल विचार 

  • उनका सबसे बड़ा मंत्र था उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब तक तुम अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर लो. मतलब लक्ष्य प्राप्ति के लिए निरंतर मेहनत करना और लगे रहना जरूरी है. अगर लक्ष्य बड़ा है तो उसे पाने के लिए साधना भी बड़ी होगी.
  • खुद को कमजोर समझने वालों के लिए विवेकानंद ने ये संदेश दिया कि दिन में खुद से एक बार बात जरूर करो, वरना दुनिया के सबसे अहम व्यक्ति से बात करने का अवसर खो दोगे. खुद को कमजोर समझने की भूल न करें क्योंकि ये सबसे बड़ा पाप है, आत्मविश्वास से बड़ी शक्ति कुछ भी नहीं है.
  • देश के विकास की जब हम बात करते हैं तो विवेकानंद के विचारों की अनायास ही याद आ जाना कोई सामान्य बात नहीं है. वह कहते थे कि देश को अच्छे चिंतक और सुविचार वाले युवाओं की आवश्यकता है, क्योंकि देश का विकास युवा पीढ़ी पर निर्भर करता है. 
swami vivekananda

Image Courtesy: Google.com

युवाओं के विकास के लिए चलाए जा रहे ऐसे कार्यक्रम 

यह राष्ट्रीय युवा दिवस(National Youth Day 2022) महान प्रेरणा और नए संकल्प का दिन है, क्योंकि इस दिन स्वामी विवेकानंद(Swami Vivekananda) के रूप में भारत को एक ऐसी ऊर्जा मिली थी जो आज भी हमारे देश को ऊर्जावान बनाए हुए है और हमें आगे का रास्ता दिखा रही है. देश में युवाओं के लिए मोदी सरकार की ओर से स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया मिशन, फिट इंडिया मूवमेंट जैसे कई प्रयास किए जा रहे हैं.

swami vivekananda

Image Courtesy: Google.com

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शिकागो भाषण की वो यादें

स्वामी विवेकानंद(Swami Vivekananda Speech) का जिक्र हो तो शिकागो भाषण की याद अपने आप आ जाती है. जब 1893 में शिकागो में विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद का भाषण “अमेरिका की बहनों और भाइयों” के साथ शुरू हुआ, तो 7,000 की भीड़ ने खड़े होकर शब्दों की सराहना की, और सम्मान दो मिनट तक चला. जिसने उन्हें एक अलौकिक और शानदार वक्ता के साथ-साथ एक दार्शनिक के रूप में दुनिया भर में पहचान दिलाई. उन्होंने जो उपदेश दिए और जो आदर्श उन्होंने प्रदर्शित किए, वे आज भी अमर हैं.

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