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भारतीय वैज्ञानिकों ने की ब्रह्मांड से जुड़े रहस्यों की खोज, तीन नए Black Holes की जानकारी

Black Holes
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PIB Delhi: शोधकर्ताओं ने ब्रह्मांड में आपस में विलीन हो रहे तीन महाविशाल Black Holes का पता लगाया। तीन आकाशगंगाओं से ऐसे तीन महा विशाल ब्लैक होल्स की खोज की है जो एक साथ मिलकर एक ट्रिपल सक्रिय गैलेक्टिक न्यूक्लियस (three galaxies merging) बनाते हैं।

यह एक नई खोजी गई आकाशगंगा के केंद्र में एक ऐसा ठोस क्षेत्र है जो सामान्य से अधिक चमकीला है। हमारे निकटवर्ती ब्रह्मांडों में हुई दुर्लभ घटना के मुताबिक विलय करने वाले छोटे समूह बहुसंख्यक महाविशाल ब्लैक होल का पता लगाने के लिए आदर्श प्रयोगशालाएं हैं। जिनमे ऐसी दुर्लभ घटनाओं का पता लगाना संभव है। 

Black Hole

Black Hole Image Credit: Google Image

ब्लैक होल चमकीला क्यों दिखाई देता है? 

किसी प्रकार का प्रकाश उत्सर्जित नहीं करने के कारण महाविशाल ब्लैक होल का पता लगाना कठिन होता है, लेकिन वे अपने परिवेश में सम्मिलित होकर अपनी उपस्थिति प्रकट कर सकते हैं। जब आसपास से धूल और गैस ऐसे किसी supermassive black hole पर गिरती है  तो उसका कुछ  द्रव्यमान ब्लैक होल द्वारा निगल लिया जाता है। लेकिन कुछ  द्रव्यमान ऊर्जा में परिवर्तित हो जाता है और विद्युत चुम्बकीय विकिरण के रूप में उत्सर्जित होता है। जिससे वह ब्लैक होल बहुत चमकदार दिखाई देता है।

Active galactic nuclei/AGN:- 

Researchers Discover Three Super-massive

Researchers Discover Three Super-massiveImage Credit: Google Image

Black Holes को एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लियस-एजीएन (AGN) भी कहा जाता है। नाभिक आकाशगंगा और उसके वातावरण में भारी मात्रा में आयनित कण और ऊर्जा छोड़ते हैं। ये दोनों आकाशगंगा के चारों ओर का माध्यम विकसित करते हैं और आकाशगंगा के विकास, आकार में वृद्धि में  योगदान देते हैं।

 Indian Institute of Astrophysics:  Jyoti Yadav टीम की रिसर्च:- 

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के शोधकर्ताओं की एक टीम जिसमें  Jyoti Yadav, Mousumi Das और Sudhanshu Barway शामिल हैं।  Francoise Combes of College de France, Chaire Galaxies et Cosmologie, Paris, के फ्रैंकोइस कॉम्ब्सइ साथ  NGC7733 और  NGC 7734 की जोड़ी का संयुक्त रूप से अध्ययन करते हुए  एक ज्ञात इंटर-एक्टिव आकाशगंगा एनजीसी 7734 के केंद्र से असामान्य उत्सर्जन और NGC 7733 की उत्तरी भुजा के साथ एक बड़े चमकीले झुरमुट (क्लम्प) का पता लगाया । उनकी जांच से पता चला है कि यह झुरमुट आकाशगंगा एनजीसी 7733 की तुलना में एक अलग ही गति से आगे बढ़ रहा है

वैज्ञानिकों का यहाँ आशय यह भी  था कि यह झुरमुट  NGC 7733 का हिस्सा नहीं  होकर उत्तरी भुजा के पीछे की एक छोटी किन्तु अलग आकाशगंगा थी। उन्होंने इस आकाशगंगा का नाम  NGC 7733N  रखा है। 

astrosat

astrosat, Image Credit: Google Image

ASTROSAT क्या है? 

 journal Astronomy and Astrophysics में एक पत्र के रूप में प्रकाशित इस अध्ययन में पहली भारतीय अंतरिक्ष वेधशाला पर लगे Ultra-Violet Imaging Telescope /UVIT, यूरोपियन इंटीग्रल फील्ड ऑप्टिकल टेलीस्कोप जिसे ASTROSAT भी कहा जाता है, और  जो चिली में  बहुत बड़े आकार के दूरदर्शी (Very Large Telescope /VLT) पर स्थापित किया किया गया है, मिले आंकड़ों  के साथ ही  दक्षिण अफ्रीका में ऑप्टिकल टेलीस्कोप से प्राप्त (IRSF) से प्राप्त इन्फ्रारेड चित्रों का उपयोग किया गया है।

Ultra-Violet और एच-अल्फा छवियों ने निकल रही तरंगों के अतिम सिरे (टाइडल टेल्स) के साथ एक नए तारे के निर्माण का प्रकटीकरण  करके वहां तीसरी आकाशगंगा की उपस्थिति का भी समर्थन किया जो एक बड़ी आकाशगंगा के साथ एनजीसी 7733 एन के विलय से बन सकती थी। इन दोनों आकाशगंगाओं के केंद्र (नाभिक) में एक सक्रिय महाविशाल ब्लैक होल बना हुआ है और इसलिए इनसे एक बहुत ही दुर्लभ एजीएन सिस्टम बन जाती  है। 

यहां पढ़ें: भूकंप प्रतिरोधी भवनों के निर्माण के लिए थर्मोकोल का किया जाएगा उपयोग, जानिए कैसे?

आकाशगंगा के विकास को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कारक

शोधकर्ताओं के अनुसार, आकाशगंगा के विकास को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कारक आकाशगंगाओं की परस्पर क्रिया है  जो तब होती है जब विभिन्न आकाशगंगाएं एक-दूसरे के निकट आती हैं और एक-दूसरे पर अपना   जबरदस्त गुरुत्वाकर्षण बल लगाती हैं। इस तरह आकाशगंगाओं के आपस में मिलते समय उनमे विद्यमान  महाविशाल ब्लैकहोल्स के भी एक-दूसरे के एक दूसरे के पास आने की सम्भावना प्रबल हो जाती हैं। अब द्विगुणित हो चुके ब्लैक होल्स अपने परिवेश से गैस का उपभोग करना शुरू कर देते हैं और  दोहरी सक्रिय मंदाकिनीय नाभिक प्रणाली (एजीएन) में परिवर्तित हो जाते  हैं।

 

Black Holes

Journal reference: Astronomy & Astrophysics, Volume 651, id.L9, 6 pp.

भारतीय खगोलभौतिकी संस्थान (IIA) की टीम इसका घटना क्रम की व्याख्या करते हुए बताती है कि अगर दो आकाशगंगाएं आपस में टकराती हैं तो उनके ब्लैक होल भी अपनी गतिज ऊर्जा को आसपास की गैस में स्थानांतरित करके पास आ जाएंगे। ब्लैकहोल्स के बीच की दूरी समय के साथ तब तक घटती जाती है जब तक कि उनके बीच का अंतर एक पारसेक ( (3.26 light-years) के आसपास न हो जाए। इसके  बाद दोनों ब्लैक होल तब अपनी और अधिक गतिज ऊर्जा का व्यय नहीं कर पाते हैं ताकि वे और भी करीब आ सकें और एक-दूसरे में विलीन हो सकें। इसे अंतिम पारसेक समस्या के रूप में जाना जाता है। तीसरे ब्लैक होल की उपस्थिति इस समस्या को हल कर सकती है। आपस में विलीन हो रहे दोनों ब्लैकहोल ऐसे में अपनी ऊर्जा को तीसरे ब्लैकहोल में स्थानांतरित कर सकते हैं और तब एक दूसरे के साथ विलय कर सकते हैं।

देखें यह वीडियो: वैज्ञानिकों ने 3 नए  black holes की खोज 

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