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Homeभक्तिसबसे पहले किसने की थी मां सरस्वती की पूजा, वीणावादन से जीवों को मिला था वाणी का वरदान

सबसे पहले किसने की थी मां सरस्वती की पूजा, वीणावादन से जीवों को मिला था वाणी का वरदान

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वसंत पंचमी(Vasant Panchami 2022) का व्रत हर साल माघ महीने की शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि सबसे पहले मां सरस्वती की पूजा(Saraswati Puja In 2022) किसने की थी. विद्यदायिनी मां सरस्वती के प्रकट होने के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला ये त्यौहार कितना खास महत्व रखता है. आज हम और आप या संसार के समस्त जीव जो कुछ भी बोल पाते हैं, वह कैसे संभव हुआ. आज हम यही जानने की कोशिश करेंगे.

संसार में हर तरफ छाया था मौन

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक एक बार ब्राह्मा(Brahma) जी ने सृष्टि की रचना के बाद देखा कि हर तरफ मौन छाया हुआ है, उन्होंने समस्त तरह के जीवों और मनुष्यों की रचना तो कर दी लेकिन कोई भी कुछ भी बोल नहीं सकता था, हर तरफ शांति का माहौल था. संसार में छाई ये शांति ब्राह्मा जी को कुछ समय के बाद सही नहीं लगी और आखिरकार उन्होंने भगवान विष्णु का ध्यान किया.

maa sarswati

Image Courtesy: Google.om

मां सरस्वती की वीणा से हुआ वाणी का संचार  

भगवान विष्णु(Lord Vishnu) ने उनकी मनोस्थिति को जानते हुए मूलप्रकृति मां आदिशक्ति का आह्वान किया तो ज्योतिपूंज रूप में मां प्रकट हो गईं. भगवान विष्णु ने ब्राह्मा जी की चिंता तो उन्हें बताई तो मां आदिशक्ति ने स्वंय से एक श्वेतवर्ण अंश उत्पन्न किया, जिनके हाथों में वीणा, वर मुद्रा पुस्तक और माला थी. श्वेतवर्ण मां सरस्वती कमल के आसन पर विराजमान थीं. उन्होंने प्रकट होते ही अपनी वीणा के मधुर आवाज से समस्त जीवों में वाणी की संचार किया.

किसने की थी पहली बार मां सरस्वती की पूजा

कहते हैं कि ब्राह्मा जी ये देखकर काफी प्रसन्न हुए, आज हम और आप जो बोल पा रहे हैं, धार्मिक मान्यताओं के हिसाब से देखें तो वह मां सरस्वती की वीणा(Veena Dayani) से निकली हुई वाणी ही है. आपने अक्सर ऐसा भी सुना होगा कि मां सरस्वती जिह्वा यानी जीभ पर विराजमान होती हैं.

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पौराणिक कथाओं में इस बात का उल्लेख भी मिलता है कि मां सरस्वती जब प्रकट हुईं तो उन्होंने भगवान विष्णु से शादी की इच्छा प्रकट की लेकिन भगवान विष्णु ने उनकी भावना का सम्मान करते हुए इनकार कर दिया और विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना की. तभी से माघ महीने की शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है.  

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