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HomeकानूनSection 188: क्या है पैनडेमिक अधिनियम या धारा 188? विस्तार से जानें यहां….

Section 188: क्या है पैनडेमिक अधिनियम या धारा 188? विस्तार से जानें यहां….

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कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान पैनडेमिक अधिनियम या धारा 188 काफी चर्चा में रही. दरअसल लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों पर धारा 188 के तहत केस दर्ज किए गए. इसको लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी. जिसको लेकर पूर्व डीजीपी ने चिंता जाहिर की और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा कि धारा 188 के तहत लोगों पर कार्रवाई ना की जाए क्योंकि लोग पहले से ही कोरोना की मार झेल रहे हैं ऐसे में उन पर धारा 188 के तहत कार्रवाई करना अन्याय होगा.

उन्होंने धारा 188 के तहत दर्ज किए गए केसों को रद्द करने की मांग की. इसके बाद से ही लोग इस धारा के बारे में जानना चाहते हैं कि आखिर धारा 188 या पैनडेमिक अधिनियम है क्या, इसके तहत क्या सजा दी जा सकती है, इसके प्रावधान क्या हैं और किस कानून के तहत लॉकडाउन लगाया गया इस तरह के तमाम सवालों के जवाब हम आपको देने जा रहे हैं.

क्या है महामारी कानून?

हालांकि इससे पहले आपको बता दें कि डीजीपी विक्रम सिंह की याचिका सुप्रीम कोर्ट में अभी पेंडिंग है. महामारी कानून 1897 के तहत कोरोना वायरस के दौरान लॉकडाउन लागू किया गया. इसी कानून के तहत ये प्रावधान है कि अगर कोई व्यक्ति सरकार द्वारा लगाए गए लॉकाडउन का उल्लंघन करता है तो उस पर इंडियन पीनल कोड की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी. ये तो हो गई उस कानून की बात जिसके तहत कोरोना वायरस के दौरान लॉकडाउन लागू किया गया.

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महामारी कानून 1897 के सेक्शन 3 में इस बात का जिक्र है कि अगर कोई व्यक्ति सरकारी आदेशों का उल्लंघन करता है तो उसे आईपीसी की धारा 188 के तहत सजा दी जाएगी. इसके तहत ये भी लिखा गया है कि अगर आप किसी सरकारी अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों का उल्लंघन करते हैं तो भी धारा 188 के तहत कार्रवाई की जा सकती है.

188 के तहत सजा का क्या है प्रावधान?

आईपीसी 188 के तहत सजा के दो प्रावधान दिए गए हैं. पहला तो ये कि अगर आप सरकार द्वारा कानूनी रुप से लागू किए गए किसी आदेश का उल्लंघन करते हैं या आपके किसी भी कदम से कानून व्यवस्था में लगे अधिकारी को नुकसान होता है तो आपको 1 महीने की जेल या 200 रुपए जुर्माना लगाया जा सकता है या दोनों की सजा सुनाई जा सकती है. दूसरा अगर आपके उल्लंन से इंसानी जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा को किसी भी तरह का खतरा होता है तो इस परिस्थिति में 6 महीने की जेल या एक हजार रुपए जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है. हालांकि क्रिमिनल प्रोसिजर कोड के पहले शेड्यूल के तहत दोनों ही परिस्थितियों में जमानत दी जा सकती है.

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