Ott India News Logo
Recent Posts
Connect with:
Sunday / September 25.
HomeकानूनSection 420 क्या होती है, आसान भाषा में समझिए यहां…..

Section 420 क्या होती है, आसान भाषा में समझिए यहां…..

section 420
Share Now

Section 420: धोखाधड़ी ये शब्द इतना आम है कि आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में सुनते ही रहते हैं. आप में से बहुत से लोग ये जानते भी होंगे या नहीं भी जानते तो ये जान लीजिए कि किसी के साथ धोखाधड़ी करने पर आपको जेल तक जाना पड़ सकता है. आपको बता दें कि धोखधड़ी कानून की धारा 420 के तहत आती है. अब धारा 420 क्या होती है, इसके तहत सजा का क्या प्रावधान है, आपकी किन हरकतों को धोखधड़ी करार दिया जा सकता है, धारा 420 के तहत सजा होने पर जमानत का क्या प्रावधान है और वकील की जरुरत क्यों पड़ती है इन सभी सवालों के जवाब हम आपको आसान भाषा में समझएंगे. 

धारा 420 क्या होती है?

जब कोई किसी व्यक्ति को धोखा देता है या बेईमानी से किसी भी व्यक्ति को कोई भी संपति देने या किसी बहुमूल्य वस्तु या उसके एक हिस्से को या कोई भी हस्ताक्षरित या स्टैमप्ड डॉक्यूमेंट को एक बहुमूल्य वस्तु में बदलने के लिए या नष्ट करने के लिए प्रेरित करता है तो इस परिस्थिति में उस व्यक्ति पर धारा 420 के तहत कार्रवाई की जाती है. या आसान शब्दों में इस यूं समझिए कि अगर किसी व्यक्ति ने धोखे से आपसे किसी जरुरी दस्तावेज या किसी घर पर सिग्नेचर करवा लिए तो इसके लिए आप उस पर धारा 420 के तहत केस दर्ज करवा सकते हैं.

ये तत्व धोखाधड़ी में शामिल

लेकिन अब सवाल आता है कि आखिर आपकी कौन सी हरकतें धोखाधड़ी के तहत गिनी जा सकती हैं. तो आपको बता दें कि किसी कीमती संपत्ति या चीज को सील करने, बदलाव करने या उसे नष्ट करने के लिए बेईमानी की भावना से किसी व्यक्ति को उकसाना धोखाधड़ी माना जाता है. इसके अलावा किसी भी बात को गलत तरीके से पेश करना भी धोखाधड़ी का अपराध करने के लिए जरुरी तत्वों में से एक है. धोखाधड़ी के अपराध को साबित करने के लिए कोर्ट में ये भी साबित करना बहुत जरुरी है कि कोई भी गलत काम अभियुक्त की जानकारी में किया गया था और इसका उद्देश्य सिर्फ शिकायतकर्ता को धोखा देना था.  

ये भी पढ़ें: Section 188: क्या है पैनडेमिक अधिनियम या धारा 188? विस्तार से जानें यहां….

इसके बाद अब बात कर लेते हैं धारा 420 के तहत दी जाने वाली सजा की. धारा 420 के तहत सजा होने पर सात साल तक की सजा हो सकती है और जुर्माना भी लगाया जा सकता है. आपको यहां ध्यान देने की बात ये है कि ये एक गैर जमानती अपराध है. अब बात आती है इस धारा के तहत सजा होने पर जमानत का क्या प्रावधान है जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया कि ये एक गैर जमानती अपराध है लेकिन इसमें जमानत लेने के लिए अभियुक्त को कोर्ट के सामने एक रकम जमा करनी होती है या एक बॉन्ड तैयार किया जाता है और इसके बाद जज उचित तर्क के आधार पर जमानत दे सकते हैं.  

इसलिए पड़ती है वकील की जरुरत

अब बात आती है कि वकील की जरुरत क्यों पड़ती है तो आपको बता दें कि कोर्ट में ये आरोपी का इरादा साबित करना होता है कि उसने धोखाधड़ी की है तो इसलिए इस परिस्थिति में वकील की मदद लेनी पड़ती है.

 

अधिक रोचक जानकारी के लिए डाउनलोड करें:- OTT INDIA App

Android: http://bit.ly/3ajxBk4

IOS: http://apple.co/2ZeQjTt

No comments

leave a comment