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सेक्स के दौरान महिला या पुरुष किसे आता है ज्यादा आनंद, जानकर कहोगे कि वाह! क्या बात बताई है…

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सेक्स(Sex) का नाम लेने पर शर्म महसूस होता है तो भी ये जानकारी आपके काम की है, क्योंकि सेक्स भी आपकी जिंदगी का एक अहम हिस्सा है, जिसे एक न एक दिन स्वीकार करना ही पड़ता है. हालांकि इस बात में दिलचस्पी लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ती ही रही है कि संभोग के दौरान महिला(Woman) को ज्यादा आनंद आता है या पुरुष(Man) को. अब सवाल ऐसा है कि इसका एक लाइन में जवाब तो मुश्किल है, लेकिन हां जवाब ऐसा जरूर है कि आपको जानकर संतुष्टि मिलेगी.

सेक्स में आनंद का सवाल

इस जवाब को जानकर हो सकता है आप कहें कि वाह क्या बात बताई है. दरअसल सेक्स(Sex) को लेकर प्राचीनकाल से ही लोगों के बीच कई भ्रांतियां हैं, उनमें से एक ये है कि कुछ लोगों का मानना है कि पुरुष को सेक्स के दौरान ज्यादा आनंद आता है जबकि कुछ लोग ये कहते हैं कि महिलाओं को सेक्स के दौरान ज्यादा आनंद आता है क्योंकि वह पुरुषों की तुलना में ज्यादा एक्टिव(Sexually Active) होती हैं. विज्ञान के जमाने में ऑर्गेज्म(Orgasm) को मापने के लिए नई मशीनें भी बनाई जा रही हैं. खैर अगर ये सवाल आपके मन में भी उठ रहा है तो कोई गलत नहीं है.

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Image Courtesy: Google.com

इस कहानी में है सवाल का जवाब

क्योंकि पौराणिक कथाएं बताती हैं कि धर्मराज युधिष्ठिर जैसे महापुरुष भी इन सवालों से नहीं बच सके. उनके दिमाग में जब ये प्रश्न आया तो वह अपने दादा पितामह भीष्म के पास पहुंचे अब चूंकि सवाल ऐसा था कि वह सीधे तौर पर पूछ नहीं सकते थे, इसलिए जब पितामह भीष्म(Bhisma) ने पूछा तो उन्होंने अपनी शंका के तौर पर इसे जाहिर किया. तब पितामह भीष्म ने कहा कि इस सवाल का जवाब जानने के लिए तुम्हें एक कहानी सुननी होगी.

जब राजा को बनना पड़ा था स्त्री

कहानी की शुरुआत होती है राजा भंगस्वाना(King Bhangswana) की कहानी से. दरअसल एक न्यायप्रिय राजा भंगस्वाना ने पुत्र प्राप्ति के लिए अग्नीष्टुता अनुष्ठान किया, जिसमें अग्निदेव का विशेष आह्वान होना था, इस बात को लेकर इंद्रदेव(Indradeva) काफी नाराज हो गए. उन्होंने राजा भंगस्वाना को सबक सीखाने के बारे में सोचा. एक दिन राजा जब शिकार पर निकले तो इंद्रदेव ने उन पर सम्मोहन बाण छोड़ दिया, जिससे राजा अपने सैनिकों से दूर कहीं जंगल में जाकर भटक गए.

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स्त्री रूप में दिया कई बच्चों को जन्म

जंगल में भटकते हुए राजा को जब प्यास लगी तो उन्हें एक जादूई तालाब दिखा, जिसमें जाते ही उनका रूप बदलने लगा. राजा पुरुष की बजाय स्त्री हो गए, जिसके कारण वह विलाप करने लगे. हालांकि उसी हालत में उन्हें अपने राज्य में लौटना पड़ा. सभी सभासदों और 100 पुत्रों को बुलाकर उन्होंने कहा कि अब मैं जंगल में तपस्या करने जा रहा हूं और तुम सब राजकाज संभालों. ऐसा कहकर राजा जंगल में एक तपस्वी के पास चले गए, जहां उन्होंने स्त्री रूप में तपस्वी के कई बच्चों को जन्म दिया.

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पुत्रवियोग में किया विलाप

इसके बाद एक दिन राजा अपने इन पुत्रों को लेकर अपने राज्य में पहुंचा और सभी को पूरी कहानी सुनाई. राजा ने जिन पुत्रों को पिता के रूप में जन्म दिया था और जिन पुत्रों को स्त्री के रूप में जन्म दिया था, वह दोनों साथ रहने लगे. ऐसा देखकर इंद्रदेव को बड़ा क्रोध आया. तब ब्राह्मण का रूप धरकर इंद्रदेव राजा के बच्चों के पास पहुंचे और उन्हें आपस में लड़वा दिया. लड़ाई इतनी भीषण हुई कि राजा के सभी पुत्र मर गए. पुत्रवियोग में राजा विलाप करने लगा.

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इंद्रदेव ने रची थी सारी माया

राजा को विलाप करता देख इंद्रदेव बड़े प्रसन्न हुए और राजा के समक्ष पहुंचकर कहा कि मैंने ही ये सबकुछ किया था. साथ ही ये बताया कि तुमने सिर्फ अग्निदेव की पूजा की थी इसलिए तुम्हारे साथ ऐसा हुआ. तब राजा ने अनजाने में की गई भूल के लिए क्षमा मांगी. इंद्रदेव ने क्षमा प्रदान करते हुए कहा कि तुम्हारा एक पुत्र जीवित हो सकता है. ऐसे में राजा ने कहा कि जिन्हें मैंने स्त्री रूप में जन्म दिया है आप उन्हें जीवित कर दीजिए, ऐसा सुनकर इंद्रदेव ने सभी पुत्रों को जीवित कर दिया और राजा को भी पौरूष प्रदान कर दिया.

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कामसुख के लिए वापस पुरुष बनने से किया इनकार

लेकिन राजा ने कहा कि हे प्रभु मुझे वापस स्त्री रूप ही दे दें, जब इंद्रदेव ने कारण पूछा तो राजा ने कहा कि क्योंकि संभोग(Sex) के समय स्त्री को पुरूष से कई गुना ज्यादा आनंद मिलता है. इसलिए मैं स्त्री रूप में ही रहना चाहता हूं. ये कथा सुनाकर पितामह भीष्म ने युधिष्ठिर से कहा कि अब तुम समझ गए होगे कि संभोग के दौरान किसे ज्यादा आनंद आता है. पौराणिक कथा ही नहीं बल्कि विज्ञान भी इस बात को मानता है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा सेक्सुअली एक्टिव(Sexually Active) होती हैं.

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