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Homeभक्तिशनिदेव की वक्र दृष्टि से न देव बच सके हैं न दानव, भगवान भोले पर भी पड़ चुका है शनि का प्रभाव

शनिदेव की वक्र दृष्टि से न देव बच सके हैं न दानव, भगवान भोले पर भी पड़ चुका है शनि का प्रभाव

Shani
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शनिदेव(Shani Dev) की महिमा के बारे में तो आपने कई पौराणिक कहानियां सुनी होंगी, लेकिन क्या आपने ये सुना है कि भगवान शनिदेव की वक्र दृष्टि से भगवान भोले भी नहीं बच सके. भक्तों की हर मुराद पूरी करने वाले देवाधिदेव महादेव को शनिदेव की वक्र दृष्टि(Shani Dev Vakra Drishti) की वजह से न सिर्फ कुछ समय के लिए कैलाश पर्वत छोड़ना पड़ा बल्कि उन्हें अपना रूप भी बदलना पड़ा.

देवाधिदेव महादेव को छोड़ना पड़ा था कैलाश पर्वत

पौराणिक कथाओं में इस बात का उल्लेख मिलता है कि कैसे भगवान शनि की वक्र दृष्टि से बचने के लिए देवाधिदेव महादेव(Mahadev) ने कैलाश पर्वत छोड़ना उचित समझा. एक बार की बात है भगवान शनिदेव भोलेनाथ के पास पहुंचे और प्रणाम कर कहा कि प्रभु, कल मैं आपकी राशि में आने वाला हूं, यानि कि कल आपके ऊपर हमारी वक्र दृष्टि(Shani Dev Vakra Drishti) पड़ेगी.

Bhole

Image Courtesy: Google.com

शनिदेव की वक्र दृष्टि का प्रभाव  

ऐसा सुनकर भगवान भोलेनाथ(Bholenath) आश्चर्यचकित रह गए, उन्होंने पूछा कि हे शनिदेव आप मुझे ये बताएं कि आपकी वक्र दृष्टि कितने समय तक मेरी राशि में रहेगी, जिस पर शनिदेव ने कहा कि सवा प्रहर तक आपके ऊपर हमारी वक्र दृष्टि का प्रभाव रहेगा. ऐसा सुनने के बाद भक्तों की हर चिंता को दूर करने वाले भोलेनाथ खुद से सोचने लगे कि शनिदेव की वक्र दृष्टि से कैसे बचा जाए.

भगवान शंकर को लेना पड़ा पशु योनि में जन्म

इस प्रश्न पर विचार करते हुए भोलेनाथ ने सोचा कि क्यों न कैलाश पर्वत को छोड़कर कहीं और चला जाऊं और अपना रूप भी बदल लूं. ऐसा सोचते हुए भगवान भोलेनाथ ने मृत्युलोक की ओर प्रस्थान किया. मृत्युलोक आने के बाद उन्होंने एक हाथी का रूप धारण कर लिया, जब काफी समय बीत गया तो उन्होंने सोचा कि सवा प्रहर तो बीत ही चुका होगा अब कैलाश पर्वत की ओर चलते हैं.

Shani

Image Courtesy: Google.com

ये भी पढ़ें: शनिदेव के क्रूर दृष्टि से केवल संकटमोचन है वंचित|

इंतजार करते मिले शनिदेव

जैसे ही शंकर भगवान(Lord Shiva) कैलाश पर्वत पर पहुंचे, वहां शनिदेव उन्हें इंतजार करते दिखे. भगवान शंकर ने ये बताने की जैसे ही कोशिश की कि आपकी वक्र दृष्टि का मुझपर कोई असर नहीं हुआ, भगवान शनिदेव ने कहा कि मेरी वक्र दृष्टि की वजह से ही आपको देवयोनि छोड़कर पशु योनि में कुछ प्रहर के लिए जन्म लेना पड़ा. शनिदेव(Shani Dev) की न्यायप्रियता को देखकर शंकर भगवान काफी प्रसन्न हुए.    

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