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भारत का एकमात्र ऐसा स्थल जहां ज्योतिर्लिंग के साथ शक्तिपीठ भी है

Jaya Durga Shaktipeeth
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देवी भागवत में 51 शक्तिपीठों का वर्णन मिलता है जबकि तंत्रचूड़ामणि में लगभग 52 शक्ति पीठों के बारे में बताया गया है। ये शक्तिपीठ माता दुर्गा को समर्पित है। देवी के ये स्थान हिंदू धर्म में काफी महत्व रखते है। ऐसा ही एक शक्तिपीठ है झारखंड के देवघर में, जिसे जय दुर्गा शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।

बाकी शक्तिपीठों की तरह देवी का ये धाम भी भक्तों की भीड़ और आस्था से भरा हुआ है। दूर दूर से भक्त यहां मां के दरबार में आते है और उनकी ममतामयी कृपा प्राप्त करते है। झारखंड के देवघर में स्थित वैद्यनाथ धाम जहां माता का हृदय गिरा था, जिस कारण यह स्थान ‘हार्दपीठ’ के नाम से भी जाना जाता है। इसकी शक्ति है ‘जयदुर्गा’ और शिव को ‘वैद्यनाथ’ कहते हैं। बैद्यनाथ धाम में भगवान शंकर के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में नौवां ज्योतिर्लिग है। यह भारत देश का एकमात्र ऐसा स्थल है, जहां ज्योतिर्लिंग के साथ शक्तिपीठ भी है। यही कारण है कि इस स्थल को ‘हृदय पीठ’ या ‘हार्द पीठ’ भी कहा जाता है।

देखें ये वीडियो: दुर्गा शतनम स्तोत्र | दुर्गा स्तुति

शक्तिपीठ का इतिहास !

देवी भागवत और शिवपुराण के मुताबिक एक बार सती के पिता दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया। इस अवसर पर सती व उनके पति शिव के अतिरिक्त सभी देवी-देवताओं व ऋषि-मुनियों को बुलाया गया। पिता के इस रवैये से माता सती को दुख तो हुआ लेकिन बावजूद इसके माता सती गणों के साथ पिता राजा दक्ष के घर पहुंच गई। पिता के घर पहुंचने पर भी माता सती की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया बल्कि उनका किसी प्रकार आदर सत्कार तक नहीं किया। माता सती को पिता के इस रवैये ने औऱ परेशान कर दिया। उलटे राजा दक्ष ने क्रोध में आकर भगवान शिव की निंदा करने लगे।

मां सती अपने पति का अपमान सहन न कर पाई और स्वयं को हवन कुंड को समर्पित कर दिया। भगवान शिव को जब इसकी खबर मिली तो वे क्रोधित हो गए और सती की मृत देह को लेकर ब्राह्मांड में घूमने लगे। भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 हिस्सों में बांट दिया,  जिससे की भगवान शिव का क्रोध शांत हो सके। उस समय झारखंड के देवघर में स्थित वैद्यनाथ धाम में माता का हृदय गिरा, जिसकी वजह से ये शक्तिपीठ अस्तित्व में आया। भगवान शिव का स्थान भी यहीं होने की वजह से ये देवघर की ये भूमि काफी खास हो जाती है। इस स्थान के बारे में एक मान्यता यह भी है कि यहीं पर माता सती का दाह संस्कार भी हुआ था।

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नवरात्री में दर्शन करने का है खास महत्व

नवरात्र के दिनों में देवी के इस धाम की सौंदर्यता देखनी बनती है। इस दौरान देवी का ये स्थान काफी पावन और शांति प्रदान करनेवाला है। भक्त यहां आकर मां के सामने अपनी भक्ति प्रकट करते है और मां भी अपने बच्चों पर कृपा करने में जरा भी देरी नहीं करती। यहां ना सिर्फ नवरात्रि बल्कि शिव और शक्ति का धाम होने की वजह से महाशिवरात्रि भी यहां काफी धूमधाम से मनाई जाती है। इस दौरान पूरा इलाका भक्तिमय रंग में डूबा और शिव औऱ शक्ति का जयकारा साफ दिखाई पड़ता है।

आपको बता दें कि यहां नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा विशेष फलदायी है। नवरात्रि ही एक ऐसा पर्व है जिसमें माता दुर्गा, महाकाली, महालक्ष्मी और सरस्वती की साधना कर जीवन को सार्थक किया जा सकता है और जीवन को पूर्णरूप से सुखमय बनाया जा सकता है।

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