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Homeन्यूजगुजरात का एक ऐसा मंदिर जहां देश-विदेश से भक्त भेजते हैं विघ्नहर्ता को पत्र!

गुजरात का एक ऐसा मंदिर जहां देश-विदेश से भक्त भेजते हैं विघ्नहर्ता को पत्र!

Ganesh Chaturthi
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Siddhivinayak Mandir Gujarat:

ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा।

गणेशजी सभी के दुखों को हरते हैं, विघ्नहर्ता कष्टों को दूर करते हैं। गणेश जी का उत्सव मनाने के लिए भक्तजन हर साल आकर्षित थीम के आधार पर मूर्ति की सजावट करते हैं। गुजरात राज्य के राजकोट के उपलेटा से 24 किलोमीटर दूर ढांक गांव में सदियों से एक अनोखी परंपरा चली आ रही है। इस गांव के लोग गणेश उत्सव को भगवान को पत्र लिखकर त्योहार मनाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि ढांक गांव में 5000 वर्ष पुराने स्वयंभू गणेशजी स्थापित हैं। 

इस गांव के लोग एक अनोखे अंदाज में अपने सुख-दु:ख डाक के माध्यम से प्रभु तक पहुंचाते हैं। आइए जानते हैं क्या है यह अनोखी परंपरा जो सदियों से चली आ रही है। 

siddhi Vinayak temple

Siddhi Vinayak temple, Rajkot 

ढांक गांव के सिद्धिविनायक गणेश मंदिर की अनोखी परंपरा:- 

  • राजकोट के उपलेटा से 24 किमी दूर ढांक गांव में 5000 साल पुराने स्वयंभू गणेश स्थापित हैं
  • विघ्नहर्ता डाक के माध्यम से भक्तों के दुखों को दूर करते हैं
  • देश- विदेश से लोग करीब 100 से 150 पत्र पोस्ट के जरिए भेजते हैं 
  • पत्र में सभी भक्त अपनी सुख दुख, शुभ कार्यों की कहानी लिखकर भेजते हैं 
  • मंदिर के महंत गर्भगृह में गणपति बाप्पा को पढ़कर सुनाते हैं 
  • मंदिर में यह परंपरा लगभग 27 वर्षों से चली आ रही है
  • भक्तजन शादी, प्रसंग के कार्ड भी भेजते हैं
  • गुजरात राज्य के राजकोट के सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में गांव गांव से श्रद्धालु आते हैं 
  • मंदिर द्वारा किसी भी प्रकार का चन्दा नहीं लिया जाता है
  • सिद्धिविनायक गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के दिन 1008 मोदकों का महाप्रसाद बनता है
  • इस मंदिर में मुंबई, पूने, महाराष्ट्र, और गुजरात से लोग दर्शन करने आते हैं। 

खासकर गणेश चतुर्थी के दौरान भक्त बड़ी संख्या में आते हैं। ऐसी मान्यता है कि गांव की चारों दिशाओं में गणेश जी विराजमान हैं। बप्पा जहां भी रहते हैं वहां किसी भी प्रकार की आपत्ति नहीं आती है। एक लोककथा ऐसी है कि यहां पांडवों ने आकर गणेशजी सहित समस्त शिव परिवार की पूजा की थी।

Siddhivinayk Mandir

Siddhivinayk Mandir, Gujarat Rajkot

यहां पढ़ें: 85 साल से लक्ष्मी विलास पैलेस के लिए गणपति की मूर्ति बना रहे ये शिल्पकार, जानिए क्या है खासियत

गणेश चतुर्थी के दिन 1008 मोदकों का महाप्रसाद का भोग लगाया जाता है:- 

पिछले 3 साल से भक्तों को जो पत्र मिल रहे हैं, उन पत्रों को मंदिर के पत्र रूम में रखा जाता है। गणेशोत्सव के दौरान मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है। पुजारी के अनुसार मंदिर द्वारा कभी भी चंदा नहीं लिया जाता है। साथ ही सिद्धिविनायक गणेश मंदिर (Siddhivinayak Mandir Gujarat) में गणेश चतुर्थी के दिन 1008 मोदकों का महाप्रसाद बनता है, और भक्तों को प्रसाद बाटा जाता है। साथ ही महाप्रसाद का भी आयोजन किया जाता है। 

देखें यह वीडियो: Swasthya Hetu Ganesh Mantra

मंदिर में सर्वप्रथम गणेशजी के बड़े भाई कार्तिकेय के दर्शन होते हैं इसके बाद शिव भगावन के समस्त परिवार के दर्शन होते हैं। गणेश जी का वाहन मूषक है। लेकिन इस मंदिर में गजानन आसन पर विराजमान हैं। सौराष्ट्र में सबसे प्राचीन गणेश मंदिरों में से एक है ढांक गांव का गणेश मंदिर।

ढांक गांव में हर साल गणेश महोत्सव मनाया जाता है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। 

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