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सूर्योदय से पूर्व स्नान न करने के नुकसान नहीं जानते तो ये जान लीजिए, मरने के बाद मिलेगी ऐसी सजा

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आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर लोग सूर्योदय के बाद ही जागते हैं, जिसकी वजह से वह स्नान(Snan)भी देर से करते हैं. जमाने के हिसाब से इस बात में कोई नयापन नहीं है कि कोई देर से जागे, देर से नहाये(Late Snan) या देर से भोजन करे. लेकिन शास्त्रों के हिसाब से इस बात को लेकर काफी फर्क पड़ता है कि आप किस समय कौन सा काम करते हैं. हिंदू धर्मशास्त्रों में बकायदा इस बात का उल्लेख है कि रोजाना स्नान क्यों जरूरी है और कैसे करना चाहिए.

ये है स्नान का सही समय

अगर आपे कोई कहे कि आपको सूर्योदय से पूर्व स्नान(Take Bath Before Sunrise) करना चाहिए तो संभव हो आप ये तर्क दें कि वह ऋषि-मुनियों का स्नान है, हम तो गृहस्थ जीवन वाले लोग हैं, ऐसे में देर स्नान करने में क्या दिक्कत है. लेकिन दिक्कत है. दरअसल ब्रह्मा मुहूर्त में 4 बजे का समय ऋषियों के लिए स्नान का माना जाता है, उसके बाद 5 बजे के बाद का समय देव स्नान और 6 बजे के बाद का समय मनुष्य स्नान कहलाता है.

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Image Courtesy: Google.com

सूर्योदय से पूर्व स्नान करना जरूरी

आजकल बहुत कम ऐसे लोग हैं, जो 8-9 बजे से पहले स्नान करते हैं. लेकिन ये मानकर चलिए कि अगर सूर्योदय से पहले या फिर मानव स्नान भी नहीं करते, शौचादि से निवृत होकर भगवान की पूजा-अर्चना नहीं करते तो आपको मरने के बाद नरक(Naraka) में यातनाएं सहनी पड़ सकती है. गरुड़ पुराण में 84 लाख तरह के नरक का जिक्र है, जिसमें 16 ऐसे नरक हैं, जिनकी यातनाएं सुनकर आपकी रूह कांप उठेगी.

नरक में मिलती है ऐसी सजा

गरम तेल में डालना, पेड़ से बांधकर पीटना, मल-मूत्र और कीड़ों-मकोड़ो से भरे तालाब में छोड़ देना, पाप के मुताबिक कठोर से कठोर सजा देने का उल्लेख है. अगर आप रोजाना स्नान(Snan) नहीं करते तो आपको इसी तरह की सजा भुगतनी पड़ सकती है.

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Image Courtesy: Google.com

कहीं आप भी तो नहीं करते राक्षसी स्नान

गरुड़ पुराण(Garuda Puran) में कहा गया है कि अगर कोई मनुष्य बिना नहाए दिन की शुरुआत करता है तो उसे इच्छा के मुताबिक फल की प्राप्ति नहीं होती, उसे यश की जगह अपयश मिलता है, वह हमेशा परेशानियों से घिरा रहता है. इसलिए ब्राह्म मुहूर्त(Brahma Muhurta) में स्नान करना अति आवश्यक है.

ये भी पढ़ें: क्या कलयुग में दर्शन दे सकते हैं भगवान, अगर हां तो आखिर कैसे, पढ़ें क्या कहते हैं पौराणिक शास्त्र

गरुड़ पुराण में स्नान(Snan) के अलग-अलग प्रकार और तरीकों का उल्लेख किया गया है. अगर आप 8 बजे के बाद स्नान करते हैं तो उसे राक्षसी स्नान की संज्ञा दी गई है. ऐसे में आपको मरने के बाद तो यातनाएं झेलनी ही पड़ेंगी बल्कि जीते जी भी सुख की अनुभूति नहीं हो सकती.

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