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Homeन्यूजहमारे बीच नहीं रहे, भट्टमेवाड़ा समाज को सर्वव्यापी बनाने वाले समाज सेवी “श्री डायालाल द्विवेदीजी”

हमारे बीच नहीं रहे, भट्टमेवाड़ा समाज को सर्वव्यापी बनाने वाले समाज सेवी “श्री डायालाल द्विवेदीजी”

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‘सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं’ इसी सोच के साथ नि:स्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने में सर्वोपरि, सरल स्वभाव और मर्दूलता से काम करने वाले भट्टमेवाड़ा समाज को पूरे विश्व में पहचान दिलाने वाले ‘समाज सेवी श्री डायालाल द्विवेदीजी’ का दु:खद निधन हुआ। उनके असायमिक देहांत पूरे विश्व में रहने वाले भट्टमेवाड़ा समाज  को गहरा असर पड़ा है। राजस्थान जन सम्पर्क सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी गोपेंद्र नाथ भट्ट और एन.सी.आर.दिल्ली में रहने वाले समाज के लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। 

‘समाज सेवी श्री डायालाल द्विवेदी’

भट्टमेवाड़ा समाज को विश्व फलक पर दिलाई पहचान 

समाज सेवी “श्री डायालाल द्विवेदीजी ” सहित उनकी पत्नी श्रीमती मनोरमाजी और पूरा परिवार मिलकर नि:स्वार्थ भाव से स्वजाति बंधुओं की समाज सेवा करता रहा है। कुछ समय पहले ही उनकी पत्नी की भी कैंसर से मृत्यु हो गई थी। मनोरमाजी ने भी अपनी अंतिम सांस तक परिवार और समाज की सेवा की।यहाँ तक द्विवेदीजी द्वारा  ‘समाज-दर्पण’ नामक पुस्तिका भी प्रकासित की गई है।

‘समाज सेवी डायालाल द्विवेदी’ द्वारा प्रकासित पुस्तिका ‘समाज-दर्पण’

भट्टमेवाड़ा समाज के जाने माने समाज सेवी श्री डायालाल द्विवेदी के असामयिक देहान्त पर राजस्थान जन सम्पर्क सेवा के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी गोपेंद्र नाथ भट्ट गहरा शोक व्यक्त करते हुए बताया कि द्विवेदीजी के निधन के दुःखद समाचार से यकायक विश्वास नहीं हो रहा है। 

तन-मन-धन से सिर्फ एक ही मूलमंत्र समाज को संगठित करना: 

श्री डायालाल द्विवेदीजी ने भट्ट मेवाड़ा समाज को एकजुट करने में और उनकी हर एक परेशानियों,  मुश्किलों को हल करने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनके जीवन का बस एक ही उद्देश्य था कि पूरे विश्व में बसे स्वजाति बंधुओं को एकत्रित करना उनके परिवार के सदस्यों का ब्योरा तैयार करना। उनकी यह कोशिश रंग लाई, पूरे देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी समाज कि अपनी स्वयं कि एक डायरेक्टरी (निर्देशिका) है।  

समाज में किसी की शादी का प्रस्ताव रखना हो , नौकरी की सिफ़ारिश करनी हो, घर की परेशानियों का हल निकालना हो या चाहे सुख दुख की कोई भी घड़ी हो श्री डायालालजी हमेशा सभी के साथ रहे। इनके पुत्र परेश द्विवेदीजी भी अपने माता-पिता के पदचिन्हों पर चल रहें हैं। वे भी समाज सेवा कि सेवा में दिन-रात अपना योगदान दे रहे हैं। 

“सत्य परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं “विचार धारा के धनी अति कर्मठ, समाजसेवी, विनम्रता और रिश्तों को प्रेम से सींचने वाले समाज को एक नवीन दिशा देने वाले हमारे परम पूज्य श्री डायालाल जी साहब का आकस्मिक देव लोक गमन भट्मेवाडा समाज की अपूरणीय क्षति है। आप हमेशा हमारे दिलों में विशिष्ट स्थान पर रहेंगे। ईश्वर पुण्यात्मा को श्रीचरणो में स्थान देवे एवं परिवारजनों को इस आकस्मिक वज्रपात को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। हमारे ईष्ट से यही प्रार्थना करते हैं ।
श्रीमती वीरबाला जोशी , समाजसेवी एवं पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राजस्थान

 

संकलनकर्ता कि कलम से.. सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं..

समाज के लिए बेजोड़ विरासत और दस्तावेज किए तैयार 

समाज सेवा के लाभदायी काम के लिए द्विवेदीजी ने पूरे भारत में घूमकर और विदेशों में बसें स्वजाति बंधुओं के परिवारजनों से संपर्क कर पुस्तिका के लिए उपयोगी विवरण जुटाया और समाज के लिए बेजोड़ विरासत और दस्तावेज तैयार किया। समाज सेवा का उनका यह दृढ़निश्चय शलाघनीय और हमेंशा प्रेरणास्पद रहेगा। इस तरह से पूरे विश्व में से भट्टमेवाड़ा समाज के लोगों को ढूंढ निकालकर उनके परिवार के लोगों का इतिहास खोजकर उन लोगों तक द्विवेदीजी द्वारा पहुंचाया गया है। 

पूर्व वरिष्ठ अधिकारी गोपेंद्र नाथ भट्टजी ने कहा कि, “श्री डायालाल द्विवेदीजी के अनायास हम सभी के मध्य से चले जाने से पूरे भट्टमेवाडा समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। वे सहृदय थे और बहुत ही सरल. मिलनसार स्वभाव वाले व्यक्ति थे। करीब हफ़्ते पूर्व उनसे बात हुई थी । द्विवेदीजी ने ‘समाज-दर्पण’ पुस्तिका का प्रकाशन करवा कर अविस्मरणीय काम किया था”।

स्वर्गीय मनोरमा देवी द्विवेदी

स्वर्गीय मनोरमा देवी द्विवेदीजी

हमेंशा हर किसी की मदद के लिए तत्पर रहने वाले और बेजोड़ व्यक्तित्व के धनी समाज सेवी  श्री डायालाल द्विवेदीजी और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मनोरमा देवी द्विवेदी को उनके नेक कार्यों को सदैव बहुत ही श्रद्धा के साथ याद किया जायेगा।

हमारी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि उनके परिवारजनों को इस दु:खद परिस्थिति का सामना करने कि हिम्मत दे और भगवान श्री डायालाल द्विवेदीजी की आत्मा को शांति दे।

 

 

 

 

 

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Latest comment

  • We was very good leader. His efforts will be remembered.

    Jai shree Ekling ji.

    Dr. Umesh Dwivedii

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