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जानिए ताजमहल के कारीगर कहा से आये थे ?

Taj Mahal, one of the seven wonders of the world
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शाहजहाँ ने बनाया बड़े शौक़ से

बरसों इस को सजाया बड़े शौक़ से

हाँ ये भारत के महल्लात का ताज है

सब के दिल पे इसी का सदा राज है

अब्दुल क़ादिर बदायूंनी

स्वर्ग के बगीचे में पवित्र दिलो का स्वागत है. जब दिलो की बात हों, प्यार की बात हो किसी की याद की बात हों. तब ताजमहल की बात ना हो एसा कैसे हो सकता है? प्रेम की बात आये और ताजमहल का ज्रिक ना आये तो कैसे प्रेम की बात आगे बढ़ेगी? प्यार की निशानी, कला की निशानी और आगरा की शान यानी ‘ताज महल’। मुगलों की राजधानी कही जाने वाला शहर आगरा विश्व की सबसे नायाब इमारत को अपने में समेट के बैठा है। तो आईये जानते है ताज महल की कहानी.

Taj Mahal Agra

ताजमहल शाहजहाँ की तीसरी बेगम मुमताज महल की मज़ार है. मुमताज के गुज़र जाने के बाद उनकी याद में शाहजहां ने ताजमहल बनवाया था. कहा जाता है कि मुमताज़ महल ने मरते वक्त मकबरा बनाए जाने की ख्वाहिश जताई थी जिसके बाद शाहजहां ने ताजमहल बनावाया. ई.स.1632 में शुरू हुआ ताजमहल के बनने के काम करीब 22 साल तक चला. इसे बनाने में करीब 20 हजार मजदूरों ने योगदान दिया. यमुना नदी के किनारे संगमरमर से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर ताजमहल है. जो आज ना केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में विख्यात है. अपनी पहचान बना चुका है. 1632 में इसको बनाने में करीब 3.2 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. आज यदि ताजमहल बनता तो इसकी लागत करीब 6800 करोड़ रुपए होती.

Mumtaz Mahal

कहा से आये थे कारीगर?

शाहजहाँ ने इस अद्भुत चीज को बनवाने के लिए बगदाद और तुर्की से कारीगर बुलवाए थे. माना जाता है कि ताजमहल बनाने के लिए बगदाद से एक कारीगर बुलाया गया जो पत्थर पर घुमावदार अक्षरों को तराश सकता था. इसी तरह बुखारा शहर से कारीगर को बुलाया गया था, वह संगमरमर के पत्थर पर फूलों को तराशने में निपुण था. वहीं गुंबदों का निर्माण करने के लिए तुर्की के इस्तांबुल में रहने वाले कुशल कारीगर को बुलाया गया और मीनारों का निर्माण करने के लिए समरकंद से दक्ष कारीगर को बुलाया गया था. और इस तरह अलग-अलग जगह से आए कारीगरों ने ताजमहल बनाया था. आगरा का ताजमहल मुग़ल वास्तुकला का सर्वश्रेष्ठ नमूना है. ताजमहल की वास्तु शैली तुर्क,फारसी,भारतीय और इस्लामी वास्तुकला का अनोखा सम्मिलन है. कभी कभी आपको सवाल होता होगा की यमुना नदी के तट पर ही क्यों ताजमहल बनाया गया ? आगरा में काफी जगह थी वहा क्यो नही बनाया.

देखिए ये विडियो: https://ottindia.tv/watch/taj-mahal-the-beauty-of-india-69643d313938

यमुना नदी के किनारे ही क्यों ताजमहल बनाया ?

आप जानकर हैरान होंगे कि ताजमहल की इमारत एक लकड़ी पर बनाई गई है. इस लकड़ी को नमी की जरूरत होती है। जैसे—जैसे इसे नमी मिलती है ये और मजबूत होती है. यही कारण है कि ताजमहल का निर्माण यमुना नदी के किनारे किया गया. इसके चारों तरफ चार मीनारें बनाई गई हैं. ये मीनारें ताजमहल को संतुलन देती हैं. इन मीनारों को बाहर की तरफ हल्का सा झुकाव दिया गया है ताकि कोई कुदरती आपदा के समय ये मीनारें मकबरे पर न गिरकर बाहर की ओर गिरें और ताजमहल बचा रहे.आज ताजमहल विश्व में प्यार के प्रतीक रूप से प्रचलित है. प्रेम के ईस महल को देखने के लिए विश्व भर में से प्रवासी दौडे चले आते है. तकरीबन वर्ष में 70 से 80 लाख लोग ताजमहल का दीदार करने आते है. 

Taj Mahal situated on banks of river Yamuna

ताजमहल को संभाल के रखने वाले शहर की बात करे तो. यह शहर ताज महल के अलावा. काफी पुरानी इमारत को अपने आगोश में लिए बैठा है. जैसे की आगरा का किल्ला,जामा मस्जिद,दिवाने खास, एतमादुद्दौला का मकबरा जैसे कई बेशकीमती इमारत है.आगरा नायाब चीजों के लिए मशहूर है पर यहा के पेठा के लिए भी आगरा जाना जाता है. यहां का कई फ्लेवर का पेठा मिलता है. पेठा गुलाब लड्डू, कंचा पेठा, केसर अंगूरी पेठा, केसर पेठा, लाल पेठा, ड्राय चेरी पेठा, कोकोनट पेठा,रसभरी पेठा, पान पेठा, सैंडविच पेठा, चॉकलेट पेठा और चेरी मैंगो पेठा. ताज महल के कारण आगरा में टूरिज्म का बिजनेस फलफूल रहा है. यहा के लोगों को रोजगार मुँह या हो रहा है. और सरकार को ताजमहल में से 77 करोड रुपये से ज्यादा की आय होती है.

आज भी ताज महल के वातावरण में प्रेम की महक आती है. जो सदीयो से लोगो को अपनी ओर आकर्षित करती है. लेकिन अब ताज महल अपने वह तीन प्रेम के रंग नही दिखा रहा. जो पहले दिखाता था. अब प्रदूषण ताज पर अपने रंग दिखा रहा है. और ताज की चमक कम हो रही है. 

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